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world laughter day-हँसना जरूरी है

April 30, 2017
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world laughter day-हँसना जरूरी है

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world laughter day-हँसना जरूरी है 5

हास्य दिवस


हास्य दिवस पर विशेष 

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दौड़ …. दौड़ ….और सिर्फ  दौड़……. होड़  …… होड़ ……. सिर्फ होड़…….दूसरों से  आगे निकल जाने की……..  ……..दूसरों से ज्यादा पाने की ……. ऊँचा और ऊँचा उठने की…….. अपने को दूसरों से ज्यादा श्रेष्ठ  साबित करने  की…….. जहाँ देखो ,जिधर देखो ,हर कोई इसी कोशिश में लगा है।
 जिसके पास कुछ नहीं ,वह कुछ पाने की ,जिसके पास कुछ है ,वह उससे ज्यादा पाने की……. और  जिसके पास पहले से ही ज्यादा है , ,उससे भी ज्यादा पाने की होड़  में लगा है ….. दौड़ में लगा है। ……अपने से आगे वाले को पीछे छोड़ कर आगे निकल जाने पर भी वह अपने को फिर दूसरे से पीछे ही   पाता है……. .चाहे वह बिजनेसमैन हो, चाहे नेता हो ,चाहे अभिनेता हो, चाहे  खिलाडी,चाहे विद्यार्थी  हर कोई  दौड़ में शामिल है। 
मुक़ाबला हो, अच्छा है 
,आगे बढ़ाने की चाह हो, अच्छा है। 
लेकिन ठहरे ,ठहर कर सोचे।
 …. ख़ास तौर से वें  लोग  जिन्हे भगवान ने पर्याप्त दिया है  ,इतना पर्याप्त कि अपनी सभी ज़रूरतों को पूरा करने के बाद भी शेष रह जाता है। ऐसे लोगों को ज़रूर ऐसा सोचना चाहिए कि  इस   होंडा -होडी में शामिल होकर वे वह सब कुछ तो नहीं खो रहे ,जो उनके पास है।
थोड़ा है.थोड़े की ज़रुरत है ,इस  महत्वाकांक्षा ने आदमी को चलती-फिरती मशीन बना दिया है। मुसीबत मोल लेकर हँसाना भूल गया है। अधिकांश लोगोँ के चहरे हारे हुए जुआरी की तरह उदास नज़र आते है। डॉ. मदन कटारिया ने  मनुष्य की प्रवृति का  अध्ययन किया और अनुभव किया कि  हास्य ही वह माध्यम है ,जो मनुष्य को इस त्रासदी से मुक्ति दिला सकता है।हास्य  जो  मनुष्य  को सकारात्मक  और ऊर्जा  से लबरेज कर सकता है 
 मई महीने में  विश्व भर में जो हास्य दिवस मनाया जाता है , इसका श्रेय डॉ. मदन कटारिया को दिया जाता है। 

हँसना क्यों ज़रूरी है ?

 

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 जिन्दगी  जीने  के दो  तरीके  है – एक हँस  कर जीना और दूसरा  रोकर जीना।  रोने से मुश्किलें  कम  न  होगी ,बढ़ेगी।
तो क्या हँसने  से मुश्किलें ख़त्म  हो जाऐगी ?
 जी नहीं , मुश्किल ख़त्म तो नहीं होगी  ,लेकिन  हाँ  मुश्किलों में जीने  का हौसला  जरूर  बढ़ जायेगा दर्द का एहसास छूमंतर हो जायेगा।   

हँसाना कुदरत की नियामत है ..  
हँसी -दर्द का pain killer  है  ….
हँसी -ज़िन्दगी की तपती धूप में ठंडी छाँव  का टुकड़ा है  ….
हँसी -कंटीले रास्ते  में चलते हुए पैरों के नीचे मखमली घास आ जाने जैसा अहसास है। 
हँसी -दुखों से मुक्ति की राम बाण औषधि है …   
हँसी- हताशा -निराशा  में  डुबकियां लगा रहे लोगों के लिए एक तिनका है। 

 

 आदमी  जब  हँसता  है तो लगता है  – वह  अब  भी जिन्दा  है।  कहते  है न कि  जिंदगी  जिंदा  दिली   का नाम ,  मुर्दा  दिल क्या  खाक जिया  करते है ?


जैसे रोना स्वाभाविक  क्रिया है ,वैसे ही हँसना मानव की स्वभाविक क्रिया है। लेकिन हिंदुस्तान दुनिया का अकेला ऐसा देश है जहाँ रोने वाले के लिए लोग रूमाल की जगह तौलियां लिए खड़े मिल जायेंगे किन्तु किसी  को हँसता देखकर इनके कलेजे पर साँप  लौटने लगते है। इनके मुख से एक ही सूत्र वाक्य निकालता है -क्या बद्तमीज़ आदमी है  …. बेवकूफों की तरह दांत दिखा-दिखाकर हंस रहा है  ,,,,, पागल हो गया है। 
हिंदुस्तान में हँसना जैसे एक सामाजिक या पारिवारिक अपराध है। खुद तो हँसते नहीं ,बच्चों के हँसने पर भी पाबन्दी लगा देते है। छोटे बच्चे को हंसने पर भले ही क्षमा दान मिल जाये लेकिन पढाई करनेवाला  बच्चा   किसी बात पर हँस जाये तो माता -पिता नाम के ये मालिक बच्चे के लिए फरमान जारी कर देते है। इस तरह हँसना पारिवारिक मर्यादा की अवमानना है। इस तरह हँसना bad manner कहलाता है।नॉर्मल  रहा करो.समझे  … जानते हो , लोग क्या सोचेंगे तुम्हारे बारे में ? डाट का ऐसा चाबुक मारते है बच्चे पर कि  बच्चा ज़िन्दगी भर के लिये हँसाना भूल जाता है। 
… और बेटियों का हँसना तो जैसे धर्म या कानून तोड़ने जैसा है। उन्हें तो बचपन से ही संस्कारों के नाम पर सिखाया जाता है कि  अच्छे खानदान की लड़कियां इस तरह नहीं हँसती। 
हमारे हिंदुस्तान में तो कुछ लोग देवदास के वंशज है।    …और कुछ लोग दौलत खर्च करने में भले ही दरिया दिली दिखा दे किन्तु हँसी बहुत सोच समझ कर खर्च करते है। अपने दो इंच होठों को ढाई इंच  से ज्यादा नहीं फ़ैलने देंगे। इतनी कंजूसी के साथ हँसते है ,जैसे थोड़ा ज्यादा हँस  दिए तो tax लग जायेगा। 

हँसो मेरे भाई ,हँसो  … रोने के मौके तो ज़िन्दगी में कई बार आते है और कभी -कभी तो एक दिन में ही कई-कई बार आते है। लेकिन हँसने का मौका बहुत कम मिलता है। जैसे ही हँसने  का मौका मिले लपककर पकड़ लो। हँसी  का कोई मौका हाथ से न जाने  दो। 

चलिए , आपको मेरी बातें बकवास लगती  है। मत मानिये मेरी बात।लेकिन डाक्टर साहबों की बात पर तो यकीन करेंगे न आप ?चिकित्सा वैज्ञानिक मानते है और कहते भी है कि  मनुष्य के उदर और वक्ष के मध्य एक डाय फ्राम होता है ,जो हँसते समय धौकनी का काम करता है।
हँसना-  वर्जिश करा देता पेट ,फेफड़े और यकृत की।
 हँसाना आक्सीजन का प्रवाह बढ़ा देता है।
 भीतर का दूषित पदार्थ लेक्टिव एसिड बाहर  निकल आता है हँसने  से।
 हँसना रक्त प्रवाह बढ़ा देता है ,
हँसना पाचन तंत्र ठीक करता है. 
हँसने से पिट्यूटरी ग्लैंड्स और एड्रिनल ग्लैंड्स प्रभावित होते है।
हंसने से मस्तिष्क की अल्फ़ा वेन  सक्रिय  हो जाती है और वीटा वेन निष्क्रिय  हो जाती है। 
हँसने से भय और तनाव दूर होता है।


देखो  -उन् तारो  को कैसे हँस  रहे है ,
देखो  – उस  चाँद को  कैसा खिला है ,
देखो – वो  भवरा  भी तो  खिले हुए  फूल पर ही   गुनगुना रहा है।  
नदिया की लहरे  भी कल कल  की हँसी   हँसते हुए  बह  रही है , 
और देखो उस गुलाब  की  तरफ  जो काटो  के बीच  भी मुस्कुरा रहा  है।   
अब तो सोचेंगे ना ,कि  हँसाना क्यों ज़रूरी है?    
हँसाते इंसान है और रूलाते हैवान है 

   

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