midway upon the journey of life-poems in hindi

midway upon the journey of life-poems in hindi
midway upon the journey of life-poems in hindi
खो गया हूँ ज़माने की भीड़ में
शहर वही है ,
लोग भी वही है
मगर अनजाने से लगते है
अपना ही पता जेब में लिए
घूम रहा हूँ मैं
मिल जाये तो बताना ,
मुझे मेरी ही तलाश है
कामयाबी के दौर में
सब कहते थे मुझे समझदार
कोई कहता था दोस्त मुझे
तो कोई कहता था यार
आ खड़े होते थे चार
तबाही का दौर ऐसा आया
सब ले गयी अपने साथ
डूबने लगी कश्ती
मैं चीखा -चिल्लाया
ज़ोर -ज़ोर से
मैं चीखा -चिल्लाया
ज़ोर -ज़ोर से
बचाने को न बढ़ा कोई एक हाथ

गुमनामियों के अँधेरे में
खो गयी थी ज़िन्दगी
खुद को जलाकर
जब
रोशन की ज़िन्दगी
खड़ा होकर चौराहे पर
पूछता था हर एक से
जानते हो मैं कौन हूँ
जवाब होता था हर एक का
अन्ज़ान हूँ
गुमनाम हूँ
जब देखा आइना तो
तस्सली हुई
कोई तो है
जो मुझे जानता है
ख्वाइशे सिर्फ ख्वाइशे होती है
ख्वाइशे कहाँ पूरी होती है
ख्वाइशे भी कैसी अजीब होती है
जब बुलाता हूँ ,
तो आती नहीं
जब कहता हूँ जाने को
तो जाती नहीं
जब जीने की ख्वाइश न थी ,
मौत का इंतज़ार करते थे
अब ज़ीने की ख्वाइश हुई
तो मौत दरवाजे पर आ खड़ी हुई
इंसानियत की चिलचिलाती धूप में
आदमी मिले कम
वह भी तब मिले
जब निकल चुका था दम











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