Hindi Hindustani
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midway upon the journey of life-poems in hindi

July 21, 2016
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midway upon the journey of life-poems in hindi

midway upon the journey of life-poems in hindi

 
Hindi Hindustani

 

 
खो गया हूँ ज़माने की भीड़ में 
शहर वही है ,
लोग भी वही है 
मगर अनजाने से लगते है 
अपना ही पता जेब में लिए
 घूम रहा  हूँ मैं
मिल जाये तो बताना ,
मुझे मेरी ही तलाश है 
 
 
 
 
 
 
कामयाबी के दौर में 
सब कहते थे मुझे समझदार 
कोई कहता था दोस्त मुझे 
तो कोई कहता था यार 
Hindi Hindustani धीमे -से बुलाता था एक को 
आ खड़े होते थे चार 
तबाही का दौर ऐसा आया 
सब ले गयी अपने साथ 

 

डूबने लगी कश्ती 
मैं चीखा -चिल्लाया 
ज़ोर -ज़ोर से 
बचाने  को न बढ़ा कोई एक हाथ 
 

Hindi Hindustani
गुमनामियों के अँधेरे में 
खो गयी थी  ज़िन्दगी 
खुद को जलाकर 
जब 
रोशन की ज़िन्दगी 
खड़ा होकर चौराहे पर
पूछता था हर एक से 
जानते हो मैं  कौन हूँ 
जवाब होता था हर एक का 
अन्ज़ान हूँ 
गुमनाम हूँ 
जब देखा आइना  तो 
 तस्सली हुई 
 कोई तो है 
जो मुझे जानता  है

 

 

Hindi Hindustaniख्वाइशे सिर्फ ख्वाइशे होती है 
ख्वाइशे कहाँ पूरी होती है 
ख्वाइशे भी कैसी अजीब होती है 
जब बुलाता हूँ ,
तो आती नहीं 
जब कहता हूँ जाने को 
तो जाती नहीं 
जब जीने की ख्वाइश न थी ,
मौत का इंतज़ार करते थे 
 अब  ज़ीने की ख्वाइश हुई 
तो मौत दरवाजे पर  आ खड़ी  हुई 

 


इंसानियत की चिलचिलाती  धूप में
Hindi Hindustani छाया ढूंढने निकला  जब
जान थी हलक में  
ऑंखें थी फलक में 
गला  सूखा था 
Hindi Hindustaniपैर  थे बे-दम 
 साये तो खूब मिले ,
आदमी मिले  कम
 वह भी तब मिले  
जब निकल चुका  था दम 

 

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