hiroshima day-6 august

6 august-हिरोशिमा दिवस
एक साल में ३६५ दिन ….दिन और तारीख गुजर जाने के बाद इतिहास के पन्ने में दर्ज हो जाती है …… कलैंडर की हर तारीख इतिहास के पन्नें से जुडी है …… हर साल का हर दिन महत्वपूर्ण होता है ……
इतिहास की कुछ तारीख और दिन गर्व और प्रसन्नता की अनुभूति कराती है , तो कुछ दिन और तारीख का स्मरण मात्र ही दिल दहला देता है …..कानों में रोने-बिलखने चीखने-चिल्लानें की कारुणिक आवाजें आर्तनाद करने लगती है .
विश्व इतिहास की किताब का वह काला पन्ना जो 6 अगस्त को लिखा गया था ,जिसने मानवता के सह अस्तिव के सामने प्रश्न चिह्न के साथ एक चुनौती खड़ी की थी ,वह आज भी विनाश का भीषणतम लीला के रूप में मुंह बाये खडी है.
आज हम जिस इतिहास के पन्ने की बात कर रहे है , वह है ६अगस्त ,१९४५ का दिन …. इतिहास का काला दिन ….. .इसी तारीख को अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा नगर पर परमाणु बम गिराया था .

6 और 9 अगस्त 1945 ,इतिहास के पन्नें की वह तारीख है जब अमेरिकी वायु सेना ने जापान के नगर हिरोशिमा पर परमाणु बम “लिटिल बॉय” और उसके तीन दिन बाद जापान के ही नगर नागासाकी पर “फ़ैट मैन” परमाणु बम गिराया .6 अगस्त की सुबह जापान वासियों के लिए नए दिन का उजाला नहीं बल्कि भविष्य का अँधेरा लेकर आया था . नगर के जिस स्थान पर बम गिराया गया था, वहाँ की भूमि गड्ढे में परिवर्तित हो गई …विषैली गैसें निकल रही थीं….मानव ही नहीं बल्कि प्रकृति भी झुलस रही थी . सब कुछ मोम की तरह पिघल गया .पत्थर पर विद्यमान मानव की छाया इस सच का जीता-जागता सबूत है। विकिरणों से झुलसे हुए वहाँ के पत्थरों तथा क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की दरारों पर वे मानवीय छायाएँ आज भी विद्यमान हैं और मौन होकर उस भीषण त्रासदी की कहानी कह रही हैं। मानव निर्मित इस विध्वंसक आणविक हथियार ने अपनी विकिरणों से मानव को वाष्प में परिणत कर उसकी जीवन लीला ही समाप्त कर दी। ये हमला इतना जबरदस्त था कि कुछ ही पल में 80 हजार से ज्यादा लोगों की मौत नींद सो गए . बम धमाकों में इतनी गर्मी थी कि लोग सूखे तिनके की तरह जल गए. एक मिनट के भीतर हिरोशिमा शहर का 80 फीसदी हिस्सा राख हो गया.
जापान के प्रमुख शहर हिरोशिमा पर अमरीका द्वारा क्रूरता से जब आण्विक आयुध का प्रयोग किया गया तो हिरोशिमा तो क्या संपूर्ण विश्व की सभ्यता कराह उठी। उस भीषणतम आण्विक शक्ति के प्रयोग के बाद हिरोशिमा की जो स्थिति हुई उसी स्थिति का वर्णन करते हुए कलम भी कांपने लगती है ।
आधुनिक विज्ञानं की दुर्दात मानवीय विभीषिका की यह भयावह तस्वीर है,जो आज भी चीत्कार रही है ।यह एक मूक साक्ष्य भी है और चेतावनी भी ……
आकाश से उतरे इस क्रूर काल ने न सिर्फ धरती की छाती को छलनी किया बल्कि प्रचण्डता से बिखरी हुई विकिरणों ने पूरे हिरोशिमा को जलाकर राख कर दिया । बम विस्फोट से चारों ओर इतनी ज्वाला फैली कि समस्त जन-जीवन क्रूरता के गाल में समाहित हो गया। बम विस्फोट से धरती दहल गयी थी और उसकी आंतरिक संरचना में उथल-पुथल मच गयी थी। क्रूर काल के रथ के पहिये टूटकर दसों दिशाओं के साथ शहर के केन्द्र में बिखर गये …. चारों ओर हाहाकार और कोहराम ….. । चारों तरफ आधुनिक सभ्यता की दुर्दात मानवीय विभीषिका के चित्र दिखाई पड़ रहे थे। विनाश का भीषणतम लीला का रूप मुंह बाये खड़ा था।

अमेरिका द्वारा गिराया गया ‘बम’ साधारण शक्तिवाला नहीं था। वह आग के गोली की तरह आकाश से उनर और पूरे हिरोशिमा को निःशेष कर गया। आज भी उस त्रासदी का दंश वहाँ के वासी झेल रहे हैं। मानव द्वारा निर्मित इस आयुध ने मानव को ही जलाकर राख कर दिया।
हिरोशिमा पर गिराए गए इस परमाणु बम से 20,000 से अधिक सैनिक और लगभग डेढ़ लाख सामान्य नागरिक मारे गए ।
हमले के बाद वहां का तापमान 300,000 डिग्री सेल्सियस और जमीन की सतह का तापमान लगभग 4,000 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था
हिरोशिमा के जो बम विस्फोट किया गया था, जिसकी विस्फोटक क्षमता 15,000 टन टीएनटी के बराबर थी। लगभग 70 प्रतिशत इमारतें नष्ट हो गई और 1945 के अंत तक अनुमानित 140,000 लोगों की मौत हो गई, साथ ही बचे लोग किसी न्किसी बीमारी से ग्रसित हो गए .
हिरोशिमा पर बम विस्फोट भयावह मानवीय दुर्घटना थी।
युद्ध और हथियारों ने आज तक मानव जाति का भला नहीं किया ,इतिहास इस बात का साक्षी है .

इतिहास मानव जाति का अनुभव है और अनुभव से सिखा जाता है .इतिहास गलती न दुहराने के प्रति सावचेत करता है ,लेकिन दुनिया ने दो- दो महायुद्ध और हिरोशिमा की दुखद त्रासदी से भी कुछ नहीं सीखा .
आणविक आयुध की होड़ में मानव कितन क्रूर हो गया हैं। विश्व के अधिकांश देश इस सृष्टि के विनाश आज भी तत्परता के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। वैश्विक राजनीति के कारण अनेक संकट की आशंकाएँ बनी रहती हैं। मनुष्य ही आज सबसे खतरनाक जीव हो गया है। आज भी मानव दिन-रात विध्वंसक कार्यों में संलग्नतता दिखा रहा है।विज्ञानं का यह विनाशकारी सृजन सारी सृष्टि का विनाशक सिद्ध होगा
आज दुनिया आण्विक आयुधों जमा करने में लगी है। विश्व में छाये त्रासदी के काले बादल संकेत कर रहे हैं कि ये कभी भी वीभत्सकारी रूप ले सकते हैं। हिरोशिमा’ जैसी त्रासदी होने का खतरा बना हुआ है ।
अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, इस्राएल और उत्तर कोरिया परमाणु हथियार अपनी बगल में दबाये बैठे है .अनुमान के अनुसार रूस के पास 6 हजार 255 , अमेरिका के पास 5800, ब्रिटेन के पास 225, फ्रांस के पास 290, चीन के पास 350 और भारत के पास 156 परमाणु हथियार हैं. यद्यपि चीन, फ़्रांस, रूस, अमेरिका और ब्रिटेन उन 191 देशों में शामिल हैं जिन्होंने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर किए हुए हैं ,लेकिन कब कौन संधि की शर्त तोड़ दे कहा नहीं जा सकता .

पिछले कुछ सालों से इराक ,ईरान ,इजराइल ,अमेरिका ,रूस ,चीन और उत्तर कोरिया जैसे देशो की स्थिति अति संवेदनशील दिखाई दे रही है .
6 अगस्त की तारीख पूरी दुनिया के लिए के लिए अलार्म है – विकास या विनाश







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