
विचारों का झरना


मूर्ख अनावश्यक बोलते रहते है और समझदार आवश्यकतानुसार बोलते है

जिस कार्य से आप कुछ पाना चाहते है ,उस कार्य में सुई की नोक के बराबर भी कमी न रहने दीजिये .

अप्रिय घटित को विस्मृत करके ही प्रसन्न रहा जा सकता है .

जीवन है तो कष्ट अथवा दुःख मिलना स्वाभाविक है ,सोच आपकी है कि आप उसे किस दृष्टि से देखते है

यदि बुराई से बचाना है तो अच्छाई के लिए खिड़की –दरवाजे हमेशा खुले रखिये .

आसक्ति दुःख का मूल है .

हमारा आज का कार्य ही भविष्य का निर्धारण करता है

डर सभी को लगता है ,कष्ट सभी को होता है ,अपमान सभी को बुरा लगता है.हम चाहते है कोई हमे डराए ना ,कोई हमे कष्ट न दें ,कोई हमे अपमानित न करें .जब आप दूसरों से ऐसी अपेक्षा रखते है ,तो दूसरा भी आपसे ऐसी ही अपेक्षा रखता है .अर्थात जो व्यवहार आपको अपने लिए पसंद नहीं ,वैसा व्यवहार आप दूसरों के साथ न करें

बुराई से वही व्यक्ति नहीं डरता जो स्वयं अपना हित नहीं चाहता

खुश रहना ही खुश रहने का एक मात्र उपाय है .

जो थोड़े को बहुत माने ,वह सुखी रहता है और जो बहुत को थोडा माने वह हमेशा दुखी रहता है .
अति महत्वाकांक्षा अच्छे भले सुखी मनुष्य को भी दुखी बना डालती है .

स्वयं को सुख से रहने की इच्छा रखनेवाला मनुष्य कभी दूसरों का कष्ट नहीं देता क्योकि वह जानता है कि दूसरे को कष्ट देकर वह स्वयं भी सुखी नहीं रह सकता .

अच्छी सोच से किया गया अच्छा कार्य सदैव सुख की अनुभूति कराता है

अच्छाई की अपनी एक ताक़त होती है .वह सर्व व्याप्त अन्धकार में भी टिमटिमाते हुए ही सही किन्तु अपने अस्तित्व का बोध करता रहता है .

निर्मूल शंका रखनेवाले को संबंधों के दर्पण में दरार ही नज़र आती है

डर की दहलीज़ लाँघ कर ही जीत से साक्षात्कार किया जा सकता है .

अल्पज्ञानी को ही ढोल पीट -पीटकर अपने ज्ञानी होने की उदाघोषणा करनी पड़ती है,जबकि ज्ञानी मौन रहते है . जैसे झरना समुन्द्र की तुलना में कम जल धारण करने के उपरांत भी कल –कल की तीव्र ध्वनि करता रहता है जबकि समुन्द्र शांत रहता है .

स्वयं के क्रोध पर काबू लेनेवाला उस कुशल महावत की तरह होता है जो बिगडैल हाथी को भी वश में कर लेता है .

ईश्वर पर सौ फ़ीसदी विश्वास रखें किन्तु शेष सभी पर निन्यानवें फ़ीसदी

जो मनुष्य अपनी मंजिल पाने के लिए बने-बनाये रास्ते को छोड़कर अपना रास्ता स्वयं बनाता है यदि वह मंजिल पर पहुँचने में विफल भी रह गया ,तो भी वह दुनिया से सम्मान ही पायेगा .







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