1. तदनन्तर बैठी सभा उटज के आगे, नीले वितान के तले दीप बहु जागे। टकटकी लगाए नयन सुरों के थे वे, परिणामोत्सुक उन भयातुरों के थे…
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1. तदनन्तर बैठी सभा उटज के आगे, नीले वितान के तले दीप बहु जागे। टकटकी लगाए नयन सुरों के थे वे, परिणामोत्सुक उन भयातुरों के थे…
गीत-3 1 मैं नीरभरी दुःख की बदली! स्पन्दन में चिर निस्पन्द बसा, क्रन्दन में आहत विश्व हँसा, नयनों में दीपक से जलते पलकों में निर्झरिणी मचली!’…
1. पंथ होने दो अपरिचित ,प्राण रहने दो अकेला! घेर ले छाया अमा बन, आज कज्जल-अश्रुओं में रिमझिमा ले वह घिरा घन; और होंगे नयन सूखे,…
1 चिर सजग आँखें उनींदी आज कैसा व्यस्त बाना! जाग तुझको दूर जाना! अचल हिमगिरि के हृदय में आज चाहे कम्प हो ले, या प्रलय के…
1 शान्त, स्निग्ध ज्योत्स्ना उज्ज्वल! अपलक अनन्त नीरव भतल! सैकत शय्या पर दुग्ध धवल, तन्वंगी गंगा, ग्रीष्म विरल. लेटी है श्रान्त, क्लान्त. निश्चल! तापस-बाला गंगा निर्मल,…