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world red cross day-8 may

May 9, 2022
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world red cross day-8 may 3

साल के 365 दिन ….साल का हर दिन महत्वपूर्ण होता है किन्तु कुछ लोगों के लिए कुछ इने-गिने दिन ही महत्वपूर्ण होते है .किसी के लिए वह महत्वपूर्ण दिन स्वयं का या अपने परिजन अथवा मित्र का  जन्मदिनहो सकता है  ……किसी के लिए विवाह की वर्ष गाँठ हो सकती है या फिर बहु प्रचलित लोकप्रिय त्यौहार हो सकता है .

दुनिया में ऐसे अनेक लोग हुए है ,जिन्होंने अपने पारमार्थिक कार्य या विचार से सामान्य दिन को भी महत्वपूर्ण बना दिया .ऐसे लोगों की सूची में एक नाम है हेनरी ड्यूनेंट का जिन्होंने 8 मई को महत्वपूर्ण बना दिया .अब प्रश्न उठता है कि हेनरी ड्यूनेंट कौन है और उन्होंने  8 मई को कैसे महत्वपूर्ण बना दिया ?

आज के इस लेख से हम इसी सवाल का जवाब जानते है . 

8 मई जिसे प्रति वर्ष International  red cross day के रूप में मनाया जाता है ,इसी दिन को  Henry Dunant  भी कहा जाता है

कैलेंडर की 8 मई की इस  तारीख को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित  रेड क्रॉस की अंतर्राष्ट्रीय समिति के संस्थापक हेनरी ड्यूनेंट   (Henry Dunant  की जयंती भी कह सकते है क्योकि इसी दिन अर्थात  8 मई ( 1828 ) को   हेनरी ड्यूनेंट जन्म दिन भी है . हेनरी ड्यूनेंट का जन्म 8 मई, 1828 को  स्विट्जरलैंड के जिनेवा में हुआ था।

वह एक स्विस व्यवसायी थे जिनके प्रयासों के कारण रेड क्रॉस की अंतर्राष्ट्रीय समिति (International Committee of the Red Cross – ICRC) बनाई गई, जिनेवा सम्मेलनों को अपनाया और प्रतिष्ठित रेड क्रॉस प्रतीक का निर्माण किया गया।

वह नोबेल शांति पुरस्कार के पहले प्राप्तकर्ता हैं ।

बात साल 1859 की है।

1859 को फ्रांस और आस्ट्रिया के बीच जो भीषण युद्ध हुआ ,जिसे सोल फेरिनो और सैन मार्टिनो की लड़ाई के रूप में जाना जाता है .इसे दुनिया की बड़ी लडाइयों में गिना जाता है .इस लड़ाई में लगभग 3,00,000 सैनिक शामिल थे ,जिसमे लगभग 130,000 ऑस्ट्रियाई और  1,40,000 फ्रांसीसी सैनिक थे।

लड़ाई ने स्विस जीन-हेनरी ड्यूनेंट की  पुस्तक, ए मेमोरी ऑफ सोलफेरिनो इसी युद्ध पर आधारित है ।यद्यपि स्वयं उन्होंने अपनी आँखों से इस युद्ध को नहीं देखा था किन्तु युद्ध के बाद उन्होंने युद्ध के मैदान का दौरा किया था .जो सैनिक युद्ध में बुरी तरह से ज़ख़्मी हुए थे ,उनकी पीड़ा की अनुभूति ने हेनरी ड्यूनेंट को व्यथित किया .भविष्य में फिर ऐसी भयावह पुनरावृति न हो ,इस विचार धारा को लेकर जिनेवा सम्मलेन हुआ और इसी के परिणाम स्वरुप अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस की स्थापना हुई।

जब सोल्फेरिनो (इटली) में भयंकर युद्ध हुआ था। इस युद्ध में 40 हजार से अधिक सैनिकों की मौत हो गई थी।

 घायल सैनिकों की दशा देखकर हेनरी ड्यूनेंट व्यथित  हो उठे । उन्हीं दिनों हेनरी ने एक किताब लिखी थी, जिसका नाम ए मैमरी आफ सोल्फेरिनो था। इस किताब में हेनरी ने घायल सैनिकों की रक्षा करने के लिए सहायता समितियां बनाने का जिक्र किया था। इसके फलस्वरूप जिनेवा पब्लिक वेल्फेयर सोसायटी ने फरवरी 1863 में एक कमेटी की स्थापना की।

इसे पहली बार साल 1948 में मनाया गया था। हालांकि, विश्व रेड क्रॉस दिवस को आधिकारिक स्वीकृति साल 1984 में मिली। उस समय से यह हर साल मनाया जाता है।

 इसी साल एक विश्व सम्मेलन किया गया। इस सम्मेलन में इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रास की स्थापना का प्रस्ताव पेशा किया गया, जिसे 1876 में अपनाया गया।

जिन सिंद्धांतों और उद्देश्य को लेकर  रेड क्रॉस की स्थापना की गई थी उन्ही  सिंद्धांतों और उद्देश्य  को बनाये रखने के लिए ही रेड क्रॉस डे   मनाया जाता है । मानव सेवा को समर्पित  संगठन रेड क्रॉस के सिद्धांत है- निष्पक्षता ,मानवता ,स्वतंत्रता, तटस्थता ,एकता, स्वैच्छिक और  सार्वभौमिकता .युद्ध अथवा प्राकृतिक आपदा के समय पीड़ित लोगों  की सहायता करना है।

वर्त्तमान में दुनिया के लगभग 210 देश इस रेड क्रॉस संगठन से जुड़े हुए हैं। दुनिया भर में  189 राष्ट्रीय रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट सोसाइटीज हैं। इसमें 97 मिलियन से अधिक कर्मचारी और स्वयंसेवक हैं।

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