रुबाइयाँ , फ़िराक गोरखपुरी,व्याख्या रुबाइयाँ , फ़िराक गोरखपुरी व्याख्या 1. आंगन में लिए चाँद के टुकड़े को खड़ी…
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October 10, 2022लक्ष्मण मूर्छा और राम विलाप, तुलसीदास,व्याख्या गोस्वामी तुलसीदास (क) कवितावली 1. किसबी, किसान-कुल, बनिक, भिखारी,भाट, चाकर, चपला नट,…
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October 10, 2022उषा,शमशेर बहादुर सिंह,व्याख्या उषा ,शमशेर बहादुर सिंह 1. प्रात नभ था बहुत नीला शंख जैसे भोर का नभ…
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October 10, 2022कैमरे में बंद अपाहिज,रघुवीर सहाय,व्याख्या रघुवीर सहाय (कैमरे में बंद अपाहिज ) व्याख्या- 1. हम दूरदर्शन पर बोलेंगे…
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October 10, 2022कविता के बहाने,बात सीधी थी पर,कुंवर नारायण,व्याख्या (क) कविता के बहाने,कुंवर नारायण 1 कविता एक उड़ान हैं चिड़िया…
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October 10, 2022पतंग ,आलोक धन्वा,व्याख्या 2-पतंग ,आलोक धन्वा सबसे तेज़ बौछारें गयीं भादो गया सवेरा हुआ खरगोश की आँखों जैसा…
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October 10, 2022आत्म- परिचय,हरिवंश राय बच्चन ,व्याख्या आत्म– परिचय सन्दर्भ- उपर्युक्त काव्यांश भावों और शब्दों का मणिकांचन योग कर काव्य…
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October 9, 2022लक्ष्मण मूर्छा और राम विलाप, तुलसीदास गोस्वामी तुलसीदास (क) कवितावली 1. किसबी, किसान-कुल, बनिक, भिखारी,भाट, चाकर, चपला नट,…
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October 9, 2022रुबाइयाँ,फ़िराक गोरखपुरी रुबाइयाँ भावार्थ एवं अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न 1. आंगन में लिए चाँद के टुकड़े को खड़ी हाथों…
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October 9, 2022उषा,शमशेर बहादुर सिंह शमशेर बहादुर सिंह भावार्थ एवं अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न 1. प्रात नभ था बहुत नीला शंख…








