inspiration motivational quotes in hindi
प्रेरक विचार

inspiration motivational quotes in hindi
inspiration motivational quotes in hindi
आईने में देखकर
चेहरा अपना
संवारने से अच्छा है
चेहरे को आइना बना दे
जिसमे देखकर
अक्स अपना
ज़माना खुद को सवारे
लक्ष्य न ओझल होने पाए
तू बढता चल ,तू बढता चल
पर्वत ,सागर ,गह्वर
बाधा बन रोकेगे पल-पल
तू बहता चल ,तू बहता चल
बहता है ज्यो नदियों का जल
मंज़िल तेरे कदम चूमेगी
आज नहीं ,तो कल
मेहनत करो इतनी कि
पसीने को भी पसीना आ जाए
चलते रहो चलते रहो तब तक
जब तक तक मंज़िल ना आ जाये
कुछ ना सोचो और
जब तक मक़सद ना हासिल हो जाये
छोडो मत जब तक आस
जब तक नतीजा सामने ना आ जाये
यदि हमसे कोई प्रश्न करें कि जीवन क्या है ?
तो विज्ञान की भाषा में उत्तर होगा –
birth…..development……& distroy….
लेकिन नहीं ……
यदि birth…..development……& distroy…… यही जीवन है तो फिर हमारा मनुष्य होने का कोई
..
अर्थ नहीं रह जाता है …..फिर तो हम भी पशु तुल्य ही है ……
हमे ज्ञात होना चाहिए कि ईश्वर ने जितने भी जीव –जंतु की रचना की है उसमे मनुष्य ही ईश्वरकी सर्वश्रेष्ठ
रचना है …..
मनुष्य का जीवन पशु-पक्षियों के जीवन से भिन्न है –
क्योकि
ईश्वर ने मनुष्य को भुजबल के साथ –साथ बुद्धिबल से भी संपन्न बनाया है …..
अपने भुजबल और बुद्धिबल से
मनुष्य हर विपरीत स्थितियों को अपने अनुकूल बनाने का सामर्थ्य रखता है …
यही नहीं ,बल्कि
मनुष्य जैसा करना चाहता है ,वैसा कर सकता है
और
मनुष्य जो पाना चाहता है ,पा सकता है
यह सामर्थ्य पशुओं में नहीं
हजारों –लाखों साल पहले भी पशु …पशु ही था …आज भी पशु ही है …
जब हम वैज्ञानिक भाषा में मानव उद्गम की बात करते है ,तब मनुष्य क्या था –आदि मानव ..बिलकुल
पशुओं जैसा जीवन था उसका …….लेकिन आज ……..कहने की आवश्यकता नहीं …..कैसे संभव हो
पाया यह सब …..
उत्तर—
इच्छा शक्ति से ….प्रयासों से …भुजबल के साथ –साथ बुद्धिबल के प्रयोग से ….
निष्कर्ष क्या निकला ?
कोशिश …..प्रयास …
यानीकि कोशिश ही सफलता का मूल मंत्र है –
कोशिश कर ..कोशिश कर …हल निकलेगा
आज नहीं तो कल निकलेगा
अर्जुन बन …………लक्ष्य साध
मरूस्थल में भी नीर निकलेगा
लेकिन जब हम कोशिश करते है …तब हमें पहली कोशिश में ….या बार –बार की कोशिश के बावजूद
अपेक्षित सफलता नहीं मिलती ……हम निराशा –हताशा से भर जाते है ….हतोत्साहित हो जाते ….अपने
सामर्थ्य पर संदेह करने लगते है …
और स्वीकार कर लेते है –मुझसे नहीं हो पायेगा
ईश्वर ने मेरे भाग्य में सफल होना लिखा ही नहीं ….वर्ना मैंने तो अपनी ओर से पूरी कोशिश की थी …जी-
जान लगाकर कोशिश की थी ….
असफलता हमारी सोच को नकारात्मक बना देती है ….और नकारात्मक सोच हम पर हावी जाती है ,तब
हम अपने आपको बद-नसीब ……दुर्भाग्यशाली मानकर प्रयास करना ही छोड़ देते है ….
मनुष्य की नकारात्मक सोच मनुष्य का ध्यान उस ओर जाने ही नहीं देती कि सफलता का मार्ग असफलता
में से ही होकर गुजरता है ……जबकि सच यह कि असफलता ही सफलता की पहली सीढी होती है ……
यह आवश्यक नहीं कि हमें अपने पहले ही प्रयास में अपेक्षित सफलता मिल जाये ….
इतिहास गवाह है ….इतिहास के पन्ने पलटकर देखिये ..एक नहीं ….अनेक उदहारण मिल जायेगे
……जिन्होंने असफल होकर अपनी बार –बार की कोशिशों से असफलता के कलंक को मिटाकर
सफलता का इतिहास रचा है ….
थामस एडिसन के नाम से आप भली –भांति परिचित होंगे …बल्ब का आविष्कार करने से पूर्व उन्होंने 200
से ज्यादा बार प्रयोग किये …..हर बार विफलता ही हाथ लगी किन्तु एडिसन हताश नहीं हुए ….निराश
नहीं हुए …..उन्होंने धैर्य खोये बिना लगातार …निरंतर प्रयास जारी रखा …..लोगों ने पागल तक कह दिया
….मज़ाक उड़ाया ….
एडिसन ने ऐसे लोगों से कहा – मै असफल नहीं हुआ हूँ …मै 200 ऐसे तरीकें जानता हूँ ,जिनसे बल्ब नहीं
बनाया जा सकता ….उसके लिए नया प्रयोग करना होगा …
आप जानते है अंततःएडिसन बल्ब का आविष्कार करने में सफल हुए …जब कभी आविष्कारकों का नाम
लिया जाता है -एडिसन का नाम भी उसमे शामिल होता है
दूसरा उदहारण देखिये …एक हाथी का बच्चा जो जंजीर से जकड़ा हुआ था …उसने उस ज़ंजीर को
तोड़ने की ज़ी-जान से कोशिश की …नहीं तोड़ पाया …उसके बाद उसने प्रयास करना भी छोड़ दिया
…वक़्त गुजरा …वक़्त के साथ –साथ वह पूर्ण व्यस्क हुआ …वह एक साधारण सी रस्सी से बंधा हुआ था
…लेकिन उसने तोड़ने का प्रयास इसलिए नहीं किया क्योकि उसने मानसिकता बना ली थी कि वह ऐसा
कर ही नहीं सकता …
दोनों उदाहरणों से स्पष्ट हो जाता कि हमारी सकारात्मक और नारात्मक सोच हमारे लक्ष्य को कितना
प्रभावित करती है
भगवद्गीतागीता में भी भगवान श्री कृष्ण ने कर्म को प्रधान माना है .मनुष्य के वश में सिर्फ कर्म है
…परिणाम पर नहीं …..कर्मानुसार ही परिणाम फलीफूत होता है ….
मनुष्य है तो कर्म करते हुए गिरेगा भी ,,,,हारेगा भी ….थकेगा भी …भूल भी हो सकती है …..यह सब होना
स्वाभाविक है …लेकिन को चाहिए कि हार को जीतमें बदलने का प्रयास करता रहे …गिरकरफिर से
उठनेका प्रयास करें …थककर फिर से एक नए उत्साह से …नई उमंग से …नई ऊर्जा से ,,,,नए सिरे से
फिर से नई कोशिश में लग जाये ..गलती या भूल को सुधारता रहे ….क्योकि चलना ही ज़िन्दगी है …और
रूकना मौत की निशानी है …
सही अर्थों में ,यही जवानी है
अत:आप सिर्फ कर्म करते रहे ..सार्थक और सुनियोजित तरीके से ….अच्छी तरह सोच-समझकर
motivational thought
“लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती!”







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