hindi poem –
hindi poem – जो तुम आई…
hindi poem – जो तुम आई…

१. ज्योत्सना
जो तुम आयी
ज्योत्सना बनकर
सीप
मोतियों से भर गया
खाली सीप मेरा
जो तुम आयी
नक्षत्र की बूँद बनकर
संगीत
सूखे पत्तों की खड़खड़ाहट
रस घोलने लगी
जो तुम आयी
संगीत बनकर
४. रंग
मेरी रंगहीन ,बेजान
तस्वीर संवर गयी
जो तुम आयी
अरुणिम आभा बनकर
५. वसंत
मेरे उजड़े सूखे उपवन
सब्ज हो गए
जो तुम आयी
वसंत बहार बनकर 
६. गीत
मेरे बिखरे शब्द
गीत बन गए
जो तुम आयी
छन्द बनकर
७. पतंग
उड़ने लगा मन
पतंग सा
जो तुम आयी
प्रेम डोर बनकर
८. प्राण
थम सी गयी धड़कन
स्पन्दित होने लगी
जो तुम आयी
श्वास बनकर







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