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सिपाही की माँ ,मोहन राकेश
सिपाही की माँ ,मोहन राकेश
प्रश्न 3.सप्रसंग व्याख्या करें
(क) यह भी हमारी तरह गरीब व्यक्ति है।
(ख) वर-घर देखकर ही क्या करना है, कुंती? मानक आए तो कुछ हो भी। तुझे पता ही है, आजकल लोगों के हाथ कितने बढ़े हुए हैं।
(ग) नहीं, फौजी वहाँ लड़ने के लिए हैं, वे नहीं भाग सकते। जो फौज छोड़कर भागता है, उसे गोली मार दी जाती है।
उत्तर-
(क) प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश हिन्दी साहित्य के प्रमुख कथाकर एवं नाटककार मोहन राकेश द्वारा रचित उनके एकांकी ‘सिपाही की माँ’ से अवतरित है। यहाँ एक माँ अपने बेटे को गलत कार्य करने से रोक रही है।
व्याख्या-
मानक को मारने के लिए उसके पीछे एक सिपाही आता है। वह मानक को हर हाल में मारना चाहता है। लेकिन तभी मानक खड़ा हो जाता है और उसी को मारने लगता है। यह देखकर उसकी माँ उसे रोकती हुई कहती है कि तू इसे नहीं मारेगा ! यह भी हमारी तरह गरीब है। अर्थात् युद्ध में जो सिपाही लड़ते और मरते हैं। उनका युद्ध से कोई लेना-देना नहीं होता है। वे तो अपनी छोटी-छोटी मजबूरियों के कारण युद्ध में शामिल होते हैं जिसके बदले में उन्हें अपनी जान तक गंवानी पड़ती है।
(ख) प्रसंग- प्रस्तुत गद्यांश हिन्दी साहित्य के प्रमुख कथाकर एवं नाटककार मोहन राकेश द्वारा रचित उनके एकांकी ‘सिपाही की माँ’ से अवतरित है।
बिशनी से मिलने उसकी पड़ोसन कुन्ती आती है और वह मुन्नी के लिए रिश्ता ढूँढने की बात कहती है। तब बिशनी उसे अपनी मजबूरी बताती है।
व्याख्या-
बिशनी कुंती से कहती है कि वर देखकर कोई लाभ नहीं है क्योंकि हमारे पास रुपए तो है नहीं जो विवाह किया जा सके। इसलिए जब मानक आएगा तभी कुछ हो सकता है। वैसे भी आजकल शादी-ब्याह में बहुत अधिक खर्चे होते हैं। अर्थात् बिशनी स्पष्ट कहती है कि उसके पास रुपए-पैसे बिल्कुल भी नहीं हैं इसलिए जब उसका बेटा आएगा तभी शादी के बारे में कुछ सोचा जा सकता है।
(ग) प्रसंग- प्रस्तुत गद्यांश हिन्दी साहित्य के प्रमुख कथाकर एवं नाटककार मोहन राकेश द्वारा रचित उनके एकांकी ‘सिपाही की माँ’ से अवतरित है।यहाँ बर्मा से आई लड़कियाँ फौज के नियमों के बारे में बता रही हैं।
व्याख्या-जब मुन्नी बर्मा से आई लड़कियों से पूछती है कि फौजी युद्ध से भागकर नहीं आ सकते तब उनमें से एक लड़की कहती है कि फौजी वहाँ लड़ने के लिए गए हैं। वे वहाँ से भाग नहीं सकते हैं। अगर कोई भागने की कोशिश भी करता है तो उसे गोली मार दी जाती है।
प्रश्न 4. ‘भैया मेरे लिए जो कड़े लाएँगे, वे तारों और बंतो के कड़ों से भी अच्छे होंगे न’ मुन्नी के इस कथन को ध्यान में रखते हुए उसका परिचय आप अपने शब्दों में दीजिए।
उत्तर-उक्त कथन एकांकी की पात्र मुन्नी का है जो मुन्नी सिपाही मानक की बहन और बिशनी की पुत्री है।वह विवाह योग्य हो गई है किन्तु परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि उसका विवाह किया जा सके .परिवार की साड़ी उम्मीदें मानक से जुडी हुई है . स्वभाव से भोली, निश्छल मुन्नी जब वह गाँव की उन लड़कियों को कड़े पहने देखती है जिनका विवाह हो चुका है ,अपने विवाह में ऐसे ही कड़े मिलने की उम्मीद रखती है .वह अपने मन की बात अपनी माँ बिशनी से कहती है कि भैया मेरे लिए जो कड़े लाएँगे, वे तारों और बंतो के कड़ों से भी अच्छे होंगे न’
मुन्नी के कथन से स्पष्ट होता है कि उनकी पारिवारिक आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है .किन्तु मनुष्य का स्वाभाव होता है कि वह सपने देखने नहीं छोड़ता , सपनों के पूरे होने की उम्मीद ऐसे लोगों को जीने का संबल है .
प्रश्न 5. बिशनी मानक की माँ है, पर उसमें किसी भी सिपाही की माँ को ढूँढ़ा जा सकता है। कैसे?
उत्तर- बिशनी मोहन राकेश द्वारा लिखित ‘सिपाही की माँ’ एकांकी में सिपाही मानक की माँ है। बिशनी बाह्य रूप से मानक की माँ के रूप में प्रस्तुत हुई है किन्तु वह एक सिपाही की माँ नहीं है बल्कि उसमें किसी भी सिपाही की माँ को ढूँढ़ा जा सकता है। एकांकी में एक सिपाही मानक भागते हुए विशनी के पास ले आता है और अपनी माँ बिशनी के गले से लिपट जाता है .इसके तुरंत बाद एक अन्य सिपाही मानक का पीछा करता हुआ वहां आता है . सिपाही बिशनी से पूछता है कि इसकी तू क्या लगती है विशनी कहती है,मैं इसकी माँ हूँ। मैं तुझे इसे मारने नहीं दूँगी। तब सिपाही का जवाब आता है यह हजारों का दुश्मन है वे उसको खोज रहे हैं. तब बिशनी सिपाही से कहती है-तू भी तो किसी बेटा है ,तेरा भी घर-परिवार होगा ,तेरी भी माँ होगी , तू माँ के दिल को नहीं समझता। मैं अपने बच्चे को जानती हूँ,वह किसी की जान नहीं ले सकता । इसी बीच मानक पलटकर सिपाही पर वार करने लगता है ,किन्तु बिशनी अपने बेटे मानक से उस अनजान सिपाही को मारने से वैसे ही बचाती है जैसे उसने अपने कोख जाने पुत्र मानक को सिपाही से बचाया था .इससे प्रमाणित होता है कि बिशनी में किसी भी सिपाही की माँ को ढूँढ़ा जा सकता है।
प्रश्न 6.दोनों लड़कियाँ कौन हैं?।
उत्तर-‘ मोहन राकेश द्वारा लिखित ‘सिपाही की माँ’ एकांकी में दो पात्र ऐसे है जिन्हें कोई नाम न देकर दो लड़कियों के नाम से संबोधित किया गया है हैं। एक को पहली लड़की व दूसरी को दूसरी लड़की के रूप में संबोधित किया गया है।यें दोनों लड़कियाँ बर्मा की रंगून नगर की है। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जब जापानी व हिन्दुस्तानी सेना बर्मा में युद्ध कर रही थी तब वहाँ भयंकर तबाही हुई थी । लाखों बर्मा वासी अपना देश और घर छोड़कर भारत की सीमा में घुस आये थे। उन्हीं में से यें दो लड़कियां भी अपने परिवार के ग्यारह सदस्यों के साथ दुर्गम एवं बीहड़ जंगलों एवं दलदलों को पार करते हुए भारत आई थी । मांगकर गुजर-बसर कराती है .एक दिन दोनों लड़कियाँ खाने के लिए कुछ माँगने के लिए बिशनी के घर आ जाती है .बिशनी इन्हें दया कर कटोरा भर चावल देती है
प्रश्न 7 .कुन्ती का परिचय आप किस तरह देंगे?
उत्तर–‘ मोहन राकेश द्वारा लिखित ‘सिपाही की माँ’ एकांकी में कुंती ,बिशनी की पड़ोसन के रूप में प्रस्तुत हुई है .कुंती का चरित्र भारतीय स्त्रियों के मिले-जुले स्वभाव वाला चरित्र है .उसमे दूसरे को उकसाने और सहायता दोनों का सम्मिश्रित गुण है .एकांकी में वह बिशनी को बेटी के बड़ी हो जाने की बात कहकर शीघ्रताशीघ्र विवाह कर देने के लिए उकसाती हुई नज़र आती है वही कोई अच्छा सा लड़का ढूढने में सहायता करने की बात भी कहती है .वहीँ युद्ध में गए बिशनी के बेटे मानक के जीवित लौटने पर भी संदेह व्यक्त कर बिशनी को विचलित करती है .बिशनी से वार्ता करते हुए बर्मा की दो लड़कियाँ जब कुछ खाने के लिए माँगने आती है तब कुंती के व्यवहार और वाणी में कठोरता आ जाती है .
प्रश्न 10.मानक और सिपाही एक दूसरे को क्यों मारना चाहते हैं?
उत्तर-मानक जो एकांकी में बिशनी का बेटा है जो द्वितीय विश्व युद्ध के मोर्चे पर बर्मा में लड़ने गया है .जिस देश के विरुद्ध युद्ध लड़ा जाता है ,उन देशों की सेना के सिपाही एक दूसरे में शत्रु होते है .मानक यदि भारतीय सैनिक है तो दूसरा सैनिक विरुद्ध देश का सिपाही है .दोनों ही सेना एक दूसरे के सैनिक को मारने का दायित्व निभाते है .मानक के लिए सिपाही शत्रु है और सिपाही के लिए मानक उसका शत्रु है इसलिए दोनों एक दूसरे को मरना चाहते है .
प्रश्न 11.मानक स्वयं को वहशी और जानवर से भी बढ़कर क्यों कहता है?
उत्तर-‘–‘ मोहन राकेश द्वारा लिखित ‘सिपाही की माँ’ एकांकी मानक बर्मा में भारतीय फौज की ओर से जापानी सेना से युद्ध कर रहा है। मानक और शत्रु देश का सिपाही एक-दूसरे को मारना चाहते थे । शत्रु देश का सिपाही मानक को मारने के लिए उसका पीछा करता है ,मानक भागता हुआ अपनी माँ के पास आता है। शत्रु सेना का सिपाही उसका पीछा करते हुए वहाँ पहुँच जाता है। मानक की माँ मानक को बचाना चाहती है। शत्रु सेना का सिपाही मानक को वहशी और जानवर कहता हैं। मानक क्रोध से भर जाता है और क्रोधावेश में वह अपना विवेक खो देता है और स्वयं को वहशी और जानवर से भी बढ़कर होने की बात कहता है । क्रोध में मनुष्य अपना विवेक खो देता है और जब वह बोलता है तो स्वयं को पता नहीं होता कि वह क्या बोल रहा है .मानक ने जो कहा वह विवेक शून्यता की स्थिति में क्रोधवश कहा .
प्रश्न 12.मुन्नी के विवाह की चिन्ता न होती तो मानक लड़ाई पर न जाता, वह चिन्ता भी किसी लड़ाई से कम नहीं है? क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपना पक्ष दें
उत्तर- मुन्नी के विवाह की चिन्ता न होती तो मानक लड़ाई पर न जाता, वह चिन्ता भी किसी लड़ाई से कम नहीं है ,यह कथन गरीबी से संघर्ष कर जी रहे लोगों के सन्दर्भ में एक कड़वा सच है .बिशनी और मानक आर्थिक रूप से बहुत कमजोर है .मानक की बहिन मुन्नी विवाह योग्य हो गई है .भारतीय समाज में प्राय देखा जाता है कि एक आयु के बाद लड़की का विवाह न होने पर समाज में तरह –तरह की बातें होने लगती है .जितने मुँह,उतनी बातें …सचाई जाने बिना लोग दोषारोपण करने लगते है .यें बातें ऐसी होती है जो किसी भी स्वाभिमानी को आहत कर सकती है .बिशनी ने सामाजिक अपमान से बचने के लिए ही न चाहते हुए भी मानक को फ़ौज में भेजा था ताकि उसके वेतन से एकत्र पैसों से वह बेटी की शादी कर सके .बिशनी ने मानक को फ़ौज में विवशतावश फ़ौज मे भेज तो दिया किन्तु हमेशा अनिष्ट की आशंका से घिरी रहती है .सच है , चिन्ता भी किसी लड़ाई से कम नहीं है
प्रश्न 13.सिपाही के घर की स्थिति मानक के घर से भिन्न नहीं है, कैसे। स्पष्ट करें।
उत्तर- बिशनी का अपना परिवार है जिसमे एक बेटा और एक बेटी है .बिशनी और मानक आर्थिक रूप से बहुत कमजोर है .मानक की बहिन मुन्नी विवाह योग्य हो गई है .भारतीय समाज में प्राय देखा जाता है कि एक आयु के बाद लड़की का विवाह न होने पर समाज में तरह –तरह की बातें होने लगती है .जितने मुँह,उतनी बातें …सचाई जाने बिना लोग दोषारोपण करने लगते है .यें बातें ऐसी होती है जो किसी भी स्वाभिमानी को आहत कर सकती है .बिशनी ने सामाजिक अपमान से बचने के लिए ही न चाहते हुए भी मानक को फ़ौज में भेजा था ताकि उसके वेतन से एकत्र पैसों से वह बेटी की शादी कर सके .पारिवारिक ज़िम्मेदारी निभाने के लिए ही मानक सेना में भर्ती हुआ था .यदि मानक को कुछ हो गया तो पूरा परिवार तबाह हो जायेगा
दूसरे देश के सिपाही के साथ भी ऐसी कोई मज़बूरी रही होगी जिसके कारण वह सेना में भर्ती हुआ होगा ,अन्यथा उसका अपना भी हँसता-खेलता परिवार था . दूसरे देश के सिपाही की पत्नी जिसकी कोख में 6 माह का बच्चा पल रहा है ,सिपाही के मरने पर फाँसी लगाकर जान दे देंगी ,ऐसा उसने कहा था .
कहने का तात्पर्य यह है कि देश कोई भी हो ,मनुष्य किसी भी देश का हो लेकिन सबकी पीड़ा एक है .







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