atal bihari vajapai-शब्दांजलि

अश्रुपूरित शब्दांजलि
काव्य -पुष्प
सारे स्वर ,सारे व्यंजन
अब नहीं बनेगे शब्द
जो मेरे आर्तनाद को कर सके व्यक्त
सारे रस नीरस हो गए
सारे अलंकार फीके हो गए
राजनीति की किताब से
गरिमा ,मर्यादा शुचिता
शब्द के अर्थ निरर्थक हो गए
टूट गए साँसों के बंध
अब न बन सकेगे छंद
काल ने जीवन को
विराम दे दिया
अब न कोई अंतरा है
और न मुखड़ा
शेष रह गया बस
एक यादों का टुकड़ा
जाने से उनके
कई प्रश्नों के उत्तर
अनुत्तर रह गए
अनुरक्त रह कर भी
विरक्त रह गए
जो था हमारा
पथ प्रदर्शक
उसके बिना हम
हो गए मूक दर्शक
करता था जो
हृदयभेदी शब्दों का वाक्य निर्माण
क्रूर काल ने कर दिया
निर्वाण
परिवर्तन करते –करते
राजनीति परिवर्तित हो गई
राजनीति में ईमानदारी
अतीत हो गई
राजनीति के आकाश का देदीप्यमान नक्षत्र
कहीं विलुप्त हो गया
चिरनिद्रा में सोकर सुप्त हो गया
भारतीय राजनीति का युग पुरुष खो गया
वे आगे निकल गए
हम जहाँ खड़े थे ,वहीँ रह गए
हमे आँसू, दर्द और आहे दे गए
अटलजी आपका कोई पर्याय नहीं
न कोई अनेकार्थक ,समानार्थक
आपका ही था राजनीतिज्ञ होना सार्थक
अनेक शब्दों के लिए एक शब्द
अटलजी ;
आदि से अंत तक अटल रहे
मन से , वचन से , कर्म से
‘ अटलजी ‘ अटल रहे






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