inspirational-motivational quotes

विचार पुष्प
ख़ामोशी वाचालता से कहीं ज्यादा असरदार है -कारलाइल
वाचालता चांदी है और ख़ामोशी सोना। ख़ामोशी मानवोचित है तो ख़ामोशी देवोचित -सुभाषित
ईश्वर तक पहुँचाने का रास्ता मनुष्य के भीतर से ही गुजरता है -सुभाषित
फूल की सुगंध हवा की दिशा में बहती है लेकिन मनुष्य के सतकर्म की कीर्ति चारों दिशाओं में फैलाती है-महात्मा बुद्ध
स्वार्थ सिद्धि के लिए धर्म की आड़ लेकर पाखण्ड करनेवाले मानव की परिपूर्णता में बाधक है। ऐसा धर्म मनुष्य को दुर्बल बनाकर उसके आत्मविश्वास और स्वतन्त्रता का हनन करता है -नरेंद्र देव
रूढ़ियों और स्वार्थ से परिपूर्ण धर्म मानव समाज के लिए अफीम के समान है -कार्ल माक्स
धर्म सेवा का नाम है ,क़त्ल करने का नहीं -प्रेमचंद
गलती मनुष्य को गिराती अवश्य है किन्तु उठनेवाले को पहले से दुगनी ऊंचाई पर भी पहुँचा देती है -टालस्टाय
दूसरों के गुणों की अपेक्षा उसकी गलतियों से ज्यादा सीखा जा सकता है -लांगफेलो
मनुष्य गलती करता है और मूर्ख उसे दुहराते है -सिसरो
लज्जा गिरने में नहीं ,बल्कि गिरकर उठने की कोशिश न करने में है -कन्फ्यूशस
निर्धन तब तक निर्धन ही रहेगा जब तक वह आलस्य ,दुर्व्यसन और अपव्यय से दोस्ती नहीं तोड़ेगा -प्लूटार्क
क्रोध वह अग्नि है जो क्रोध पैदा करनेवाले को पहले जलती है -सुभाषित
भेद को भीतर ही छुपा कर रखना बुद्धिमता है किन्तु भेद खोल देना मूर्खता है -होम्स
आशा दर्द निवारक दवा है जो कुछ समय के लिए भय और आशंका से मुक्ति दिला देती है -सुभाषित
मनुष्य बूढा हो जाता है ,लेकिन तृष्णा कभी बूढी नहीं होती -सुदर्शन
निद्रा ,तन्द्रा ,भय ,क्रोध और आलस्य ये पांचों मनुष्य को इतनी हानि पहुंचा सकते है ,जितना पांच सौ शत्रु मिलकर भी नहीं पहुंचा सकते -सुभाषित
जब तक शरीर है ,तब तक दुःख से मुक्ति नहीं -छान्दोग्य उपनिषद
कायर कष्ट देखकर दुबकने का प्रयास करते है ,जबकि साहसी मुक़ाबले के लिए कष्ट के सामने आ खड़े होते है -सुभाषित
दुष्ट उपकार से नहीं अपकार से शांत होता है -कालिदास
संसार में यदि कोई चैतन्य मंदिर है तो वह है मानव शरीर -हिवट मैन /नावलिस
पर धन का अपहरण ,पर नारी का उपभोग और अपने हितैषी के साथ विश्वास घात करनेवाला इंसान नहीं ,हैवान होता है -सुभाषित
कुछ मुसीबतें मनुष्य स्वयं संगृहीत करता है ,उनमे से एक है -धन-सुभाषित
महान पुरुष भौतिक सम्पदा को नहीं बल्कि प्राप्त सम्मान और प्रेम को अपना धन मानते है -सुभाषित
धर्म तो एक ही है। बस ,उसके रूप अनेक है -बर्नार्ड शॉ
पाप की गठरी कंधे पर रखकर सत्य के मार्ग पर नहीं चला जा सकता -कबीर
समय तटस्थ है। वह न क्रूर है ,न दयालु ,वह न किसी के साथ चलता है और न किसी के लिए ठहरता है। वह न अच्छा है ,न बुरा -सुभाषित
सफलता वैसी ही छिपी रहती है जैसे दूध में मक्खन -सुभाषित
सफलता -साहस,निर्भीकता और परिश्रम का सम्मिलित रूप है -सुभाषित
समझ मस्तिष्क का प्रकाश है ,इसकी कोई सीमा नहीं -बेकन/विल्स
धर्म होने पर भी नीच कृत्य करनेवाले इतने लोग है ,यदि धर्म न होता तो न मालूम क्या होता ?-फ्रैंकलिन







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