Hindi Hindustani
Important Days

world postal day

October 9, 2016
Spread the love

world postal day

Hindi Hindustani
world postal day 7

विश्व डाक दिवस 

Hindi Hindustani

 


विश्व डाक दिवस 

Hindi Hindustani


डाकिया ….. 

चिट्ठी  …… 

money -order  …… 

postman …….. 

कभी ,जैसे ही ये शब्द कभी कानों में पड़ते थे ,हाथ का काम छोड़कर दरवाजे की ओर  दौड़ पड़ते थे ,इस तरह जैसे इसी पल के इंतज़ार में बैठे थे।लिफाफा इस तरह खोलते थे जैसे कोई नतीजा सामने आनेवाला हो।  उत्साह  …. कौतूहल … ख़ुशी ….. कुछ अप्रिय की आशंका …… ऐसे ना मालूम कितने भाव एक साथ जहन में उभर आते थे ,आज से २० -२२ साल  पहले तक postman  की आवाज़ सुनकर।
खाकी वर्दी पहने , सर पर टोपी ,साइकल पर सवार ,उसका जोर -जोर से घंटी बजाना यह दृश्य तो अब किताबों में या पुरानी  हिंदी फिल्मो में ही देखे जा सकते है

अब  हिंदी  फिल्मों में  चिट्ठी के गाने सुनने  को नहीं मिलेंगे और शायद लिखे भी नहीं जायेगे। जैसे –

संदेशे आते है ,संदेशे जाते है  …..

  डाकिया डाक लाया ,ख़ुशी पयाम कहीं दर्दनाक लाया  …. 

आएगी ज़रूर चिट्ठी मेरे नाम की ,तब देखना 

 

चिट्ठी आयी है आयी है ,वतन से चिट्ठी आयी है  ….. 

चिट्ठी न कोई सन्देश  …… 

मेरा प्रेम पत्र  पढ़कर तुम नाराज़ न होना  …… 

लिखे जो खत तुझे ,वो तेरी  याद में  ….. 

फूल तुम्हे भेजा  है खत में  ….. 

हम ने सनम को खत लिखा ….. 

कागज़ कलम दावत ला  ..लिख दू … 

Hindi Hindustani

 


आज डाकिया और चिट्ठी के साथ ऐसा ही व्यवहार होता है ,जैसे नई पीढ़ी के कुछ  स्वार्थी ,खुदगर्ज़ एहसान फरामोश  युवक शादी के बाद अपने बूढे माता -पिता के साथ व्यवहार करते नज़र आते है 


 जब से mobile -inter- net का प्रचलन शुरू हुआ ,चिट्ठी और डाकिया भूतकाल (past) में काम आने वाले शब्द बन गए। वह तो भला हो विद्यालयी पाठ्य क्रम निर्धारित करने वालों का जिन्होंने आज तक भी पत्र लेखन को पाठ्य क्रम में शामिल किया हुआ है अन्यथा हमारी नई पीढ़ी के बच्चे  तो यह भूल जाते कि  पत्र होता क्या है  ?

आजके parents  अपने बच्चों को बतलाते है कि हमारे ज़माने  में खत के ज़रिये massage  एक जगह से दूसरी जगह भेजे जाते थे

खत क्या मोबाइल से बड़ा होता था ,पापा ?
अरे नहीं रे ,खत pen से कागज़ पर लिखा जाता था ,जिसे अंग्रेजी में letter  और हिंदी में पत्र और चिट्ठीऔर उर्दू में ख़त  कहते है।

 

अच्छा वो ,जिसे हमारी language  की teacher लिखना भी सिखाती है और उसे  हमारे exam में language के question paper  में भी लिखना होता है।
हाँ  ….. हाँ  …… वही -वही ,कोई मामूली बात होती तो post -card लिख दिया करते थे ,कुछ ज्यादा लिखना होता तो अंतर्देशी पत्र लिख देते थे और भी ज्यादा लिखना होता तो लिफ़ाफ़े का इस्तेमाल करते थे। और रक्षा-बंधन के त्यौहार पर राखी भी भेज दिया करते थे। लिफाफे पर  वजन के अनुसार ticket  लगना होता था……. और एक बात ,डाक टिकट के बहाने हम अपने महा पुरुषों को भी याद कर लिया करते थे।बीच -बीच में महापुरुषों  के जन्मदिन या पुण्यतिथि पर उनके चित्र छपे डाक टिकट ज़ारी होते थे .डाक टिकट पर उन महापुरुषों के चित्र देखकर उनके त्याग ,बलिदान और महान कार्यों  का स्मरण हो आता था .जिन्हें हम भूल से जाते थे ,उनकी यादें फिर से ताज़ा हो जाती थी .
हाँ ,एक और बात बताता हूँ ,गाँव  या छोटे कस्बे  के लोग जो बड़े शहरों में काम करने आते थे ,वे महीने में एक दिन अपने बूढ़े माँ -बाप को money -order से रूपया भेजते थे। पहले money transffer का काम post -ऑफिस ही करते थे।

आज post -office ,post-man ,money-order,डाकिया ,चिट्ठी ये शब्द out  of faishon  हो गए है। समय गति शील है ,परिवर्तन शील है ,समय के साथ -साथ बहुत कुछ बदल जाता है ,लेकिन पुरानी चीज का भी अपना महत्त्व होता है।
पहले के समय पत्र के माध्यम से जो भावों की अभिव्यक्ति की जाती थी ,उसमे आत्मीयता की अनुभूति होती थी ,पढ़ते -पढ़ते ऐसा लगता था जैसे कहने वाला प्रत्यक्ष सामने हो। साहित्कारों के पत्र  तो साहित्य की धरोहर बन गए। उन्हें पढ़ते हुए ऐसा  लगता है जैसे कोई पत्र  नहीं बल्कि कोई साहित्यिक रचना पढ़ रहे हो। mobile
के massage में वह बात कहाँ जो कलम से कागज़ पर  लिखे पत्रों में है।

पापा ,और भी बताओं ना post -office  के बारे में

Hindi Hindustani९ ,अक्टूबर विश्व डाक दिवस के रूप में मनाया जाता है।
universal postal union की स्थापना १८७४ में स्विटजर लैंड के बर्न  में हुई थी।यद्यपि इससे पूर्व अमेरिका में postal  service  के विस्तार को लेकर एक सम्मलेन आयोजित किया गया था ,किन्तु उद्देश्य विफल रहा था।universal postal union  का पूर्व नाम general  postal union था। १८७६ में भारत भी general  postal union का सदस्य बन गया ,भारत में डाक सेवा लार्ड क्लाइव के समय शुरू हो गयी थी। कलकत्ता में पहला डाकघर खोला  गया था। १८५२ में post  पर stamp  लगाने की शुरुआत हुई। ६ नंबर वाले pin -code  का प्रयोग  भारत में १९७२ से शुरू हुआ। postal  service  को अलग- अलग देशों में अलग -अलग नामों से जाना जाता है -श्री लंका में श्री लंका पोस्ट ,पाकिस्तान में पाकिस्तान पोस्ट , इंग्लैंड में रॉयल मेल ,अमेरिका में यू एस मेल ,फ्रांस में ला पोस्ट ,जर्मनी में डूटस्चे ,नर्वे में नार्वेपोस्ट ,चीन में चुनघवा ,

कई देशो में डाक सेवा बंद कर दी गयी है किन्तु भारत में डाक सेवा आज भी जारी है। हां, काम -काज के तरीके में समय के अनुसार कुछ बदलाव किये है ,जो आवश्यक भी थे.कुछ आधुनिक सेवाए शुरू की गयी  है।

No Comments

    Leave a Reply

    error: Content is protected !!
    error: Alert: Content is protected !!