todo -raghuveer sahay- 12 cbse-hindi-antara- तोड़ो-रघुवीर सहाय-भावार्थ -व्याख्या -MCQ
12 cbse board परीक्षा में hindi विषय के अंतर्गत hindi elective के लिए 12 cbse board द्वारा निर्धारित hindi book (antara) का अध्ययन करनेवाले शिक्षार्थियों !
12 cbse/hindi/antara/ Chapter 5- todo -raghuveer sahay/ तोड़ो-रघुवीर सहाय) के काव्य खंड से पूछे जानेवाले प्रश्नों का संकलन ( कविता का मूल ,काव्यांश का भावार्थ ,काव्यांश से परीक्षोपयोगी संभावित बहु विकल्पीय प्रश्न -(MCQ )आपकी परीक्षा तैयारी हेतु प्रस्तुत है .
इस भाग में 12 cbse/hindi/antara/ Chapter 5- vasant aaya -raghuveer sahay/ वसंत आया-रघुवीर सहाय)) केअंतर्गत कविता का मूल भाव ,व्याख्या तथा काव्यांश से परीक्षोपयोगी संभावित बहु विकल्पीय प्रश्न (MCQ)दिए गए है .
काव्यांश को तीन भागों में बांटा गया है –(अ)(ब)(स),
अ -भाग में कविता का मूल भाव दिया गया है
ब -भाग में काव्यांश का भावार्थ -व्याख्या दी गई है .
स-भाग में काव्यांश से परीक्षोपयोगी संभावित बहु विकल्पीय प्रश्न (MCQ)दिए गए है
यहाँ पर काव्य खंड के Chapter 5- तोड़ो -raghuveer sahay/ वसंत आया-रघुवीर सहाय) के Question -Answer(प्रश्न-उत्तर ) इस प्रकार से तैयार किये गए है जो परीक्षा में अक्सर पूछे जाते हैं , तीनों भागो को ध्यानपूर्वक पढ़ लेने के पश्चात् आपकी सम्पूर्ण पाठ की तैयारी हो जाएगी.
तोड़ो’ रघुवीर सहाय – कविता का मूल भाव -‘
तोड़ो’ रघुवीर सहाय – कविता का मूल भाव -‘
‘तोड़ो’ रघुवीर सहाय द्वारा रचित एक प्रेरणादायी और परिवर्तनकामी कविता है, जिसमें कवि नव-निर्माण, विकास और सृजन के लिए जड़ता को तोड़ने का सशक्त आह्वान करता है। कविता में कवि प्रतीकात्मक रूप से चट्टानों तथा ऊसर और बंजर धरती को तोड़ने की बात करता है, ताकि उन्हें जोड़-संवारकर हरियाली से भर दिया जा सके और मिट्टी से अन्न उपजाया जा सके। यह भौतिक विकास के साथ-साथ सामाजिक और मानसिक परिवर्तन का भी संकेत है।
कवि केवल बाह्य धरातल पर ही नहीं, बल्कि मानव-मन के भीतर जमी रूढ़ियों, जकड़नों और निष्क्रियता को भी तोड़ने की प्रेरणा देता है। वह चाहता है कि मन की ऊब, खीज और नकारात्मकता समाप्त हों और उनके स्थान पर रस, उल्लास और सृजनशीलता का संचार हो। इस प्रकार कविता में तोड़ना विनाश का नहीं, बल्कि निर्माण का माध्यम बन जाता है।
रघुवीर सहाय का आग्रह है कि जहाँ-जहाँ सृजन में बाधक तत्व मौजूद हैं, उन्हें नष्ट किया जाए, ताकि नए जीवन-मूल्यों, विचारों और संभावनाओं का जन्म हो सके। इस प्रकार ‘तोड़ो’ कविता मनुष्य को जड़ता से मुक्ति दिलाकर उसे सक्रिय, रचनात्मक और विकासोन्मुख बनाने का संदेश देती है।
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तोड़ो रघुवीर सहाय -सप्रसंग व्याख्या
तोड़ो रघुवीर सहाय -सप्रसंग व्याख्या
तोड़ो तोड़ो तोड़ो
ये पत्थर ये चट्टानें
ये झूठे खंधन दूटें
तो धरती को हम जानें
सुनते हैं मिद्टी में रस है जिससे उगती दूब है
अपने मन के मैदानों पर व्यापी कैसी ऊब है
आधे आधे गाने।
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काव्य भाग – “ब”
ब (i) व्याख्या –
प्रसंग :
प्रस्तुत पंक्तियाँ आधुनिक हिंदी कविता के महत्त्वपूर्ण कवि रघुवीर सहाय द्वारा रचित कविता *‘तोड़ो’* से ली गई हैं। इस कविता में कवि सृजन, परिवर्तन और विकास के मार्ग में बाधा बनने वाली जड़ रूढ़ियों, झूठे बंधनों और मानसिक जड़ताओं को तोड़ने का सशक्त आह्वान करता है। कविता मूलतः नव-निर्माण और रचनात्मक चेतना की उद्घोषणा है।
व्याख्या –
इन पंक्तियों में कवि मानव-समाज को संबोधित करते हुए कहता है कि नव-निर्माण और वास्तविक विकास के लिए पत्थरों और चट्टानों के समान कठोर रूढ़ियों को तोड़ना आवश्यक है। जब तक इन बंजर चट्टानों को तोड़कर धरती को समतल नहीं किया जाएगा, तब तक हम धरती की वास्तविक पहचान नहीं कर पाएँगे। धरती की मिट्टी में जीवन-रस छिपा होता है, जिससे हरियाली फूटती है और सृजन की संभावनाएँ जन्म लेती हैं।
कवि इसी भौतिक सत्य को मानसिक और वैचारिक जीवन से जोड़ता है। वह कहता है कि हमारे मन-रूपी मैदानों पर जो ऊब, खीज और जड़ता छा गई है, उसे हटाना भी उतना ही आवश्यक है। जैसे खेती के लिए भूमि को समतल करना पड़ता है, तभी उसमें अच्छी फसल उत्पन्न होती है, उसी प्रकार सृजनात्मक साहित्य और नए विचारों की उत्पत्ति के लिए मन को परंपरागत रूढ़ियों और मिथ्या बंधनों से मुक्त करना अनिवार्य है।अर्थात् कवि का स्पष्ट मत है कि जब तक हम अपने भीतर और समाज में जमी हुई कठोर मानसिकता को नहीं तोड़ेंगे, तब तक न तो नया विचार जन्म ले सकेगा और न ही सच्चा नव-निर्माण संभव होगा। यह कविता जड़ता के विरुद्ध चेतना और साहस का घोष है।
विशेष –
* कविता में नव-निर्माण और सृजन के लिए जड़ परंपराओं को तोड़ने का सशक्त संदेश दिया गया है।
* भाषा सहज, सरल, तद्भव एवं देशज शब्दों से युक्त और प्रभावपूर्ण है।
* पुनरुक्ति-प्रकाश, रूपक एवं अनुप्रास अलंकारों का स्वाभाविक प्रयोग हुआ है।
* रचना मुक्त छंद में है।
* उद्बोधनात्मक शैली कविता को प्रभावशाली और प्रेरक बनाती है।
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व्याख्या पर आधारित बहु-विकल्पीय प्रश्न-MCQ
प्रश्न 1. कविता *‘तोड़ो’* के रचयिता कौन हैं?
(क) अज्ञेय
(ख) केदारनाथ सिंह
(ग) रघुवीर सहाय
(घ) नागार्जुन
सही उत्तर : (ग)
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प्रश्न 2. कवि किसे तोड़ने का आह्वान करता है?
(क) प्राकृतिक पर्वतों को
(ख) सामाजिक संबंधों को
(ग) रूढ़ियों और झूठे बंधनों को
(घ) ऐतिहासिक स्मृतियों को
सही उत्तर : (ग)
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प्रश्न 3. धरती को समतल करने का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?
(क) भौगोलिक सुधार
(ख) शारीरिक श्रम
(ग) मानसिक और वैचारिक जड़ता को हटाना
(घ) शहरीकरण
सही उत्तर : (ग)
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प्रश्न 4. कवि के अनुसार सृजन के लिए सबसे आवश्यक क्या है?
(क) परंपराओं का पालन
(ख) धन और संसाधन
(ग) मन की ऊब और खीज को हटाना
(घ) बाहरी अनुशासन
सही उत्तर : (ग)
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प्रश्न 5. इस कविता का मूल भाव क्या है?
(क) प्रकृति-चित्रण
(ख) सामाजिक यथार्थ
(ग) सृजन हेतु रूढ़ियों के विरुद्ध संघर्ष
(घ) राजनीतिक चेतना
सही उत्तर : (ग)
तोड़ो-रघुवीर सहाय -व्याख्या
तोड़ो-रघुवीर सहाय -व्याख्या
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2.
तोड़ो तोड़ो तोड़ो
बे ऊसर बंजर तोड़ो
ये चरती परती तोड़ो
सब खेत बनाकर छोड़ो
मिद्टी में रस होगा ही जब वह पोसेगी बीज को
हम इसको क्या कर डालें इस अपने मन की खीज को ?
गोड़ो गोड़ो गोड़ो।
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काव्य भाग – “ब”
ब (i) व्याख्या –
प्रसंग :
प्रस्तुत पंक्तियाँ आधुनिक हिंदी कविता के सशक्त कवि रघुवीर सहाय द्वारा रचित कविता *‘तोड़ो’* से ली गई हैं। इस कविता में कवि ने नव-निर्माण और सृजन की प्रक्रिया के लिए जड़, बंजर और अनुपजाऊ स्थितियों को तोड़ने तथा मनुष्य को रूढ़ियों से मुक्त होकर रचनात्मकता की ओर बढ़ने का प्रेरक संदेश दिया है।
व्याख्या :
इन पंक्तियों में कवि नव-निर्माण की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए कहता है कि अनुपजाऊ, ऊसर और परती पड़ी हुई धरती को खोदकर खेती के योग्य बनाया जाना चाहिए। जब बंजर धरती खेत में परिवर्तित हो जाती है, तब उसकी मिट्टी रसयुक्त होकर उसमें डाले गए बीजों का पोषण करती है और परिणामस्वरूप हरी-भरी, लहलहाती फसलें उत्पन्न होती हैं।
कवि इसी भौतिक सत्य को मनुष्य के आंतरिक जीवन से जोड़ते हुए कहता है कि हमारा मन भी कई बार निरर्थक ऊब, खीज और जड़ता से भर जाता है। यदि इस मानसिक बंजरपन को नष्ट कर मन को सृजनात्मक क्रियाओं की ओर मोड़ा जाए, तो वह भी उर्वर बन सकता है। ऐसे मन से श्रेष्ठ, सार्थक और जीवंत साहित्य की रचना संभव है।अर्थात् कवि का आशय यह है कि जैसे खेती के लिए भूमि को तैयार करना आवश्यक है, वैसे ही सृजन के लिए मन को रूढ़ियों और निष्क्रियता से मुक्त करना अनिवार्य है।
विशेष –
* कविता में नव-निर्माण और सृजनशीलता के लिए रूढ़ियों को तोड़ने का प्रेरक संदेश है।
* भाषा सहज, सरल, देशज शब्दों से युक्त एवं भावपूर्ण है।
* पुनरुक्ति-प्रकाश, अनुप्रास तथा प्रश्न अलंकार का प्रभावी प्रयोग हुआ है।
* रचना मुक्त छंद में है।
* उद्बोधनात्मक शैली कविता को ओजस्वी और प्रेरणादायक बनाती है।
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तोड़ो-रघुवीर सहाय -व्याख्या पर आधारित बहु-विकल्पीय प्रश्न-MCQ
प्रश्न 1. कविता *‘तोड़ो’* के रचयिता कौन हैं?
(क) अज्ञेय
(ख) केदारनाथ सिंह
(ग) रघुवीर सहाय
(घ) नागार्जुन
सही उत्तर : (ग)
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प्रश्न 2. कवि बंजर धरती को खोदकर क्या बनाने की बात करता है?
(क) बाग-बगीचा
(ख) नगर
(ग) खेती योग्य खेत
(घ) जंगल
सही उत्तर : (ग)
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प्रश्न 3. बंजर धरती के खेत बनने पर क्या परिणाम होता है?
(क) मिट्टी सूख जाती है
(ख) बीज नष्ट हो जाते हैं
(ग) फसलें लहलहा उठती हैं
(घ) धरती कठोर हो जाती है
सही उत्तर : (ग)
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प्रश्न 4. ‘मन की ऊब और खीज’ से कवि का क्या अभिप्राय है?
(क) शारीरिक थकान
(ख) मानसिक जड़ता और निष्क्रियता
(ग) प्राकृतिक बाधाएँ
(घ) सामाजिक परंपराएँ
सही उत्तर : (ख)
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प्रश्न 5. इस काव्यांश का मूल भाव क्या है?
(क) प्रकृति-चित्रण
(ख) कृषि-वर्णन
(ग) नव-निर्माण हेतु रूढ़ियों को तोड़ने का आह्वान
(घ) ग्रामीण जीवन का चित्रण
सही उत्तर : (ग)


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