जल में कुम्भ है ,कुम्भ में जल है
बाहर भीतर पानी
फूटा कुम्भ ,जल ,जल ही समाना
यह तथ कह ग्यो ग्यानी -कबीर
ये शरीर एक ऐसा बर्तन है , जिसे हम संसार बहुमूल्य आशीर्वादों से रचा गया है। वो है इस संसार के पंच तत्व (जल ,अग्नि ,वायु ,पृथ्वी ,आकाश ) जो ईश्वर की बहुत खूबसूरत देन है। इस पञ्च तत्व निर्मित बर्तन रुपी शरीर को मनुष्य ने ईश्वर की वादियो की नजाकत से मिले आशीर्वाद को बहुत सहेज कर रखा है। पर कई मनुष्य इसे मात्र एक वस्तु समझ रखा है जिसे वह अपने काम स्वरुप उपयोग करता है।
इस संसार के नियमानुसार इस माटी से बने बर्तन रुपी शरीर को एक न एक इस माटी में मिल जाना है। और इस संसार के पञ्च तत्व मे विलीन हो जाना है, इस संसार के नियम को स्वयं ईश्वर भी बदल नही सकते। क्योकि इस संसार मैं जन्म लेने वाले मनुष्य की मृत्यु और बर्तन रुपी शरीर का नाश होना कुदरत का सबसे बड़ा नियम है, जो की अटल है।
काहे तू इस माटी के शरीर को रोंदे तू।
इसे एक दिन माटी मई मेल जाना।
मनुष्य को शरीर सुफल कर्मो को करने मे , उन्हें जीवन को सफल बनाने के लिए ईश्वर ने प्रदान किया है। परंतु मनुष्य उसका उपभोग गलत कर्मो मे कर उस पवित्र शरीर को अपवित्र कर देता है , जिससे उस मनुष्य की उम्र घटती जाती है। इन सब बुरे कर्मो के कारण उसके शरीर मे कई प्रकार के रोग और कष्ट होने लगते है। जो उसके लिए सजा का कार्य पूर्ण करते है।
अच्छे कर्म करने वाला मनुष्य पूर्ण रूप से स्वस्थ रहता है ,उसे किसी तरह की बुरी आदतों और वासनाओ की आवश्यकता नही होती है , इसी कारण वो अपने जीवन के लक्ष्य को सफलता पूर्वक प्राप्त कर लेता है। ऐसे मनुष्य का माटी से बना पंच तत्व से परिपूर्ण शरीर सीधे ही ईश्वर और स्वर्ग की प्राप्ति करता है। ऐसे मनुष्य जीवन का आनंद बिना किसी कष्ट के प्राप्त करता है, एवं सम्पूर्ण जीवन का सुख इसी जन्म मे प्राप्त करता है।
इस माटी रुपी बर्तन (शरीर ) ईश्वर ने बखूबी से नवाजा और सजाया है ,इसे आंतरिक सुंदरता एवं बाह्य सुंदरता दोनों से सजाया है।……………..
ये तन माटी का इसे मिल जाना माटी मे ,
कहे फिर इसे सजाए , जो न जाने मोह – माया ,
इस माटी से बने बर्तन रुपी शरीर को ईश्वर के
आशीर्वाद एवं आंतरिक शांति से सजाओ , जिसका
तेज़ प्रकाश पूरे विश्व मे विध्यमान रहे।
ऐ ईश्वर इस संसार के मनुष्य को हमेशा स्वस्थ ,तंदरुस्त एवं शक्तिपूर्ण रखे , ताकि मनुष्य को कभी किसी के सामने झुकना ना पड़े और वह सुखी व् कष्टरहित पूर्ण रूप से व्यतीत कर सके।





No Comments