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raksha bandhan

August 10, 2022
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raksha bandhan

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रक्षा -बंधन पर   भाई के नाम बहिन की गीतों  भरी  एक चिटठी

रक्षा -बंधन पर   भाई के नाम बहिन की गीतों  भरी  एक चिटठी

भैया ,

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रक्षा -बंधन   

भाई के नाम बहिन की गीतों  भरी  एक चिटठी

सावन का महीना हो  और पूर्णिमा  हो  तो इसका मतलब  है -हम बहिनों का त्यौहार है… रक्षा बंधन का त्यौहार    , तो दूर -परदेस में रह रही बहिन,अपने भाई को  याद तो करेंगी ना  और चाँद को देखकर  बहिन के होठों से यह गीत तो  निकलेगा ही ना –

चंदा  रे मेरा भैया से कहना

बहना याद करे

चन्दा रे मेरे भैया से कहना

बहना याद करे

क्या बतलाऊ कैसा है वो ,

बिलकुल तेरे जैसा है वो

तू उसको पहचान ही लेगा ,

देखेगा तो जान ही लेगा

तो सारे संसार में चमके ,

हर बस्ती हर गाँव में दमके

कहना अब घर वापस आजा ,

तू है घर गहना

बहना याद करे

परदेस में रह रही तुम्हारी बहिन को चाँद में ही तुम्हारा  रूप नज़र आने लगता है।चाँद की ओर देखकर मैं गाने लगती हूँ  –

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raksha bandhan 16

मेरे भैया ,मेरे चन्दा मेरे अनमोल रतन

तेरे बदले में ज़माने की कोई चीज ना लू

तेरी साँसों की कसम खा के हवा चलती है

तेरे चहरे की छलक पाके बाहर आती है

एक पल  भी मेरी नज़रों से तू जो ओझल हो 

 हर तरफ मेरी नज़र तुझको पुकार लगाती है

तेरे चेहरे की महकती हुई लड़ियों के लिए

अनगिनत फूल उम्मीदों के चुने है मैंने

वो भी दिन आएं की उन ख्वाबों के ताबीर  मिले

तेरे खातिर जो हसीं ख्वाब बुने है मैंने

मेरे भैया ,मेरे चन्दा मेरे अनमोल रतन

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raksha bandhan 17

इस बार रक्षा बंधन पर मैं न आ  सकूँगी। डाक से राखी भेज दी है ,शायद मिल गयी होगी  ,बांधवां लेना ,क्योकि –

राखी धागों  का त्यौहार ,

राखी धागों  का त्यौहार ,

बंधा हुआ है एक एक धागे में

भाई -बहिन का प्यार

राखी धागों  का त्यौहार ,

कितना कोमल कितना सुन्दर

भाई -बहिन का नाता

इस नाते को याद दिलाने

ये त्यौहार है आता

बही के मन की आशाएं

राखी का त्यौहार

राखी धांगों का त्यौहार

बहिन कहे मेरे वीर तुझे

ना बुरी नज़रिआ लागे

मेरे राजा भैया तुझको

मेरी उमरिया लागे

धन हूँ पराया फिर भी

मिलूँगी साल में तो इक बार

राखी धागों  का त्यौहार ,

भाई कहे ओ बहिना मै

तेरी लाज का हूँ मै रखवाला

गूथूँगा मै प्यार से

तेरे अरमानों की माला

भाई- बहिन का प्यार रहेगा

जब तक है संसार

 राखी धागों  का त्यौहार ,

बंधा हुआ है एक एक धागे में

भाई -बहिन का प्यार

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raksha bandhan 18

भैया  ,राखी का ये धागा है तो कच्चा , लेकिन इस धागे में बहिन का मज़बूत प्यार छुपा हुआ है ,समझना कि मैंने अपने प्यार को धांगे में पिरो दिया है  –

 बहना ने भाई की कलाई पे प्यार बांधा है

 प्यार के दो तार से संसार बांधा है

 रेशम की डोरी से संसार बांधा है

 सुंदरता में जो कन्हैया है ,

ममता में  यशोदा मैया है

 वह और कोई नहीं  दूजा कोई ,

वह तो मेरा राजा भैया है

 मेरा फूल है तू तलवार है तू ,

मेरी लाज का पहरेदार है तू

 हमें भले किस्मत दूर कर दे ,

अपने मन से ना जुदा  करना

 सावन के  पावन दिन भैया ,

बहना को याद  करना

बहना  ने भाई की कलाई पे प्यार बांधा  है

और हां ,भाई ,मैंने तुम्हारी कलाई पर ये जो धागा बांधा है यह सिर्फ धागा नहीं है एक प्रतीक  है ,वचन निभाने का ,कलाई पर बहिन के हाथों से राखी बँधवा कर तुम वचन से बंध  गए हो। मुझे विश्वास है ,पूरा विश्वास है ,फिर भी एक बार फिर कहूँगी-

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raksha bandhan 19

भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना

भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना

भैया मेरे छोटी बाहें को ना भुलाना 

देखो ये नाता निभाना

भैया  मेरे  …..

ये दिन ,ये त्यौहार  ख़ुशी का ,पावन साइज़ नीर नदी का

भाई के उजाले माथे पे ,बहन लगाए मंगल टीका 

झूमे ये सावन सुहाना -सुहाना 

भैया मेरे  …..

बांध के हमने रेशम की डोरी तुमसे वो उम्मीद है जोड़ी 

 नाज़ुक है जो कांच के जैसी ,पर जीवन भर न जाये तोड़ी

जाने ये सारा ज़माना ज़माना 

भैया मेरे….

शायद वो सावन भी आये। जो बहन को संग ना लाये

बहिन  पराये देश बसी हो ,अगर वो तुम तक पहुँच ना पाए 

यादों का दीपक जलना  ,जलना

भैया मेरे  ……

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raksha bandhan 20

भाई ,इस बार तो ना आ सकी ,अगली रक्षा बंधन पर ज़रूर -ज़रूर आऊँगी ,आउंगी भी  … और गाऊँगी भी

 राखी बंधवा ले मेरे भैया

 मैं  ना चांदी ,ना सोने का हार मांगू

 अपने भैया .का थोड़ा सा प्यार मांगू

इस राखी में प्यार छुपा ले  लाई बहना

भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना

भैया मेरे छोटी बाहें को ना भुलाना

देखो ये नाता निभाना

भैया  मेरे  …..

ये दिन ,ये त्यौहार  ख़ुशी का ,पावन साइज़ नीर नदी का

भाई के उजाले माथे पे ,बहन लगाए मंगल टीका

झूमे ये सावन सुहाना -सुहाना 

भैया मेरे  …..

बांध के हमने रेशम की डोरी तुमसे वो उम्मीद है जोड़ी 

नाज़ुक है जो कांच के जैसी ,पर जीवन भर न जाये तोड़ी

जाने ये सारा ज़माना ज़माना

भैया मेरे….

शायद वो सावन भी आये। जो बहन को संग ना लाये

बहिन  पराये देश बसी हो ,अगर वो तुम तक पहुँच ना पाए 

यादों का दीपक जलना  ,जलना

भैया मेरे  ……

भैया ,मैं जानती हूँ ,बचपन से ही तू बहुत शरारती रहा है  … बहुत सताता था तू मुझे ,इतना बड़ा हो गया है ,

लेकिन तेरी वो शरारतें करने की आदत अभी भी नहीं गयी है। अच्छी लगती थी तेरी वो शरारते …  आज भी

याद आती है …याद है तुझे , कौनसा गीत गा -गाकर राखी बांधती थी तुझे  ,,,, सुनाती हूँ  ….

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raksha bandhan 21

,राखी बंधवा ले मेंरे वीर

 नील अंबर से तारे उतार लाऊ

या मैं चंदा की किरणों के हार लाउ

प्यार के बादल बन लहराई बहना

कभी भैया यह बहन ना पास होगी

कहीं  परदेश बैठी उदास होगी ,बहना उदास होगी

मिलाने की आस होगी ,जाने कब बिछड़ जाये भाई -बहना

राखी बंधवा ले ….

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raksha bandhan 22

अपने हाथों से तुम्हारे माथे पर तिलक लगाऊँगी,कलाई पर राखी  बांधूगी ,आरती करूगी ,मुँह  मीठा कराऊँगी और ढेर सारी बलइयां लूंगी ,अपने भगवान् से अपने भाई के लिए ढेर सारी खुशियां  माँगूगी।जानते हो क्यों ?

ये राखी बंधन है ऐसा जैसे चन्दा और किरण  का

जैसे बदरी और पवन का ,जैसे धरती और गगन का

दुनिया की जीतनी भी बहिने है ,

उन सबकी श्रद्धा इसमे है

ये राखी बंधन है ऐसा

और अगले साल भी ना आ सकी तो भैया तुम्ही चले आना ,क्योकि 

हम बहनों के लिए मेरे भैया आता है एकदिन साल में

आज के दिन मैं जहाँ भी रहू चले आना वहां हर हाल में

हम बहिनों के लिए मेरे भैया आता है एक दिन साल में

आज के दिन मैं  जहाँ भी रहू ,

चले आना वहां हर हाल में

कितने दिन और कितनी रैना

इस आँगन में रहना है मैंने

परदेसी होती है बहिने

बाबुल जाने भेज दे मेरी डोली कब ससुराल में

 चले आना वहां हर हाल में

भैया , जो मैं तुम्हे राखी भेज रही हूँ ना ,यह कोई मामूली सूत का धागा नहीं है और ना कोई रेशम का तार ,

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raksha bandhan 23

तुम इसे न समझो रेशम का तार भैया

मेरी राखी मतलब है प्यार भैया

यूं तो दुनिया में हर चीज का मोल है

मेरी राखी मगर मगर अनमोल है

ये ना तुलती है दौलत के भार भैया

एक विनती है भैया तुमसे ,मेरी राखी की तुम भी वैसे ही लाज रखना जैसे कृष्ण ने अपनी बहन द्रोपदी

हुमायूँ ने कर्मावती ,राजा बलि ने इन्द्राणी  की लाज राखी थी। एक बहन की विनती है तुमसे –

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raksha bandhan 24

तेरी बहना पे जब भी कोई मुश्किल पड़े

आके मुझ से मिल जाना खड़े ही खड़े

मेरी राखी की सुनना पुकार भैया

मेरी राखी की रखियो  तू आन आन रे

तेरी   रक्षा करे भगवान् भगवान्

 तार तार में खेल रहे है तारो की मुस्कान रे

 भाई बहन के मन का कर दे राखी दूर अँधेरा

राखी का दिन लाया करता खुशियों भरा सवेरा

 बांध दिए है इन तारों ने  बड़े बड़े तूफ़ान रे

 ऊंच नीच के भेद भाव को जिसने कभी ना देखा

प्यार नहीं मिटता मिट सकती है पत्थर की रेखा

 फूल फूल में झूला करता बहना का वरदान रे

और हाँ भैया ,पिताजी के नाम एक सन्देश भेज रही हूँ। मेरी यह विनती उन्हें ज़रूर -ज़रूर सुनाना

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raksha bandhan 25

अगले  बरस भेज भैया को बाबुल ,सावन में लीजो बुलाये रे

लौटेंगी जब मेरे बचपन की सखियाँ दीजो संदेसा भिजाये  रे

अंबुवा तले फिर से झूले पड़ेगे ,रिमझिम पड़ेगी फुहारे

लौटेंगी फिर तेरे आँगन में बाबुल सावन की ठंडी बहारे

छलके नयन मोरा  कसके रे जियरा ,बचपन की जब याद आये रे

बैरन जवानी ने छीने खिलौने ,और मेरी गुड़िया चुराई

बाबुल थी मैं  तेरे नाजो की पाली ,फिर कईं हुई मैं  पराई

बीते रे जुग कोई चिठियां  ना पाती ,ना नैहर से कोई आये रे

भैया ,तुम्हे याद है ,तुम मुझे एक गीत सुनाया करते थे। वह गीत मुझे आज भी याद है। सुनाकर बताती हूँ ,

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raksha bandhan 26

 फूलो  का तारो का सबका कहना है।

एक हज़्ज़ारो मैं  मेरी बहना है,

सारी  उमर हमें संग रहना है। 

यह ना जाना दुनिया ने तू है क्यों उदास ,

तेरी  प्यारी आँखों में प्यार की है प्यास ,

आ  मेरे पास आ कह जो कहना है ,

एक हज़ारो मैं मेरी बहन है. ……

जबसे मेरी आखो से हो गयी  तू दूर ,

तब से सारे जीवन के सपने है चूर ,

आखो मैं नींद न दिल मैं चैन है.

एक हज़ारो मैं मेरी बहन है…..

देखो हम तुम दोनों है एक डाली के फूल

मैं  ना भूल तू कैसे मुझको गयी भूल

आ मेरे पास आ कह जो कहना है

एक हज़ारों में मेरी बहना है

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raksha bandhan 27

अगले साल जब मैं आउंगी तुमसे सुनूँगी यह गीत। पत्र समाप्त कर रही हूँ।

तुम्हारी बहिन

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