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October 6, 2016
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विचार -पुष्प quotes in hindiuotes in hindi

 
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मनुष्य स्वयं अपनी दुर्बलताओं से बुरी आदतों को पोषित कर ताक़तवर बनने  का अवसर देता है 

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ज़ंज़ीर ,ज़ंज़ीर ही होती है चाहे वह लोहे की  हो या सोने की ,दोनों ही मनुष्य को गुलाम बनाती है

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विद्धवता अच्छे दिनों में आभूषण है ,विपत्ति में सहायक है एवं बुढ़ापे में संचित सामग्री है

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अपवित्र विचार भी उतना ही बुरा है जितना अपवित्र कर्म

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यदि कोई कड़वे अथवा अपशब्दों का प्रयोग  करता है तो यह उसके अशिष्ट होने से ज्यादा उसके कायर होने का संकेत है

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जिस समय क्रोध उत्पन्न होने वाला हो ,उस समय क्रोध से उत्पन्न दुष्परिणामों का  भी विचार कर लेना चाहिए

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मनुष्य जन्म से न तो माथे पर तिलक लगाकर आता है और न जनेऊ पहनकर। जो सत्कर्म करता है वह ही द्विज है और जो दुष्कर्म करता है ,वह ही नीच है

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मनुष्य दूसरों के गुणोंकी अपेक्षा उसकी गलतियों से ज्यादा सीख सकता है

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किसी में दोष निकालना  सरल है किन्तु दोष को ठीक करना ज्यादा कठिन है

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ऋणी मनुष्य कभी सुख की नींद नहीं सो सकता

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आशावादी हर कठिनाई में अवसर देखता है ,किन्तु निराशावादी हर अवसर में कठिनाई ही देखता है

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जिसे अपने आप पर विश्वास नहीं ,वह दूसरों पर कैसे विश्वास  कर सकता है ?

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दुःख को दूर करने के लिए एक ही अमोघ ओषधि है ,मन से दुखों की चिंता ना करना

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ढोंगी बनने की अपेक्षा स्पष्ट रूप से नास्तिक बनना  ज्यादा अच्छा है

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अध्यात्म के बिना विज्ञानं लंगड़ा है किन्तु विज्ञानं के बिना अध्यात्म अंधा  है

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अच्छे विचारों और अच्छे प्रयासों का परिणाम निस्संदेह अच्छा ही होगा

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मनुष्य वैसा ही बन जाता  है जैसे उसके विचार होते है

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भय और बैर से मुक्ति का उपाय है -प्रेम और अहिंसा 

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बुराई पहले अकेली आती है फिर वह अपनी सभी बहनों को भी बुला लेती है

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पश्चाताप मनुष्य के पापों का बोझ हल्का कर देता है

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इच्छा से  ही दुःख आता है, इच्छा से भय आता है ,जो इच्छा से मुक्त हो गया वह न दुःख को जनता है और न भय को

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ज्ञानहीन व्यक्ति चाहे वह वृद्ध ही क्यों न हो बालक है और  शिक्षक चाहे वह अल्पव्यस्क ही हो ,पिता है

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अग्नि उसी को जलती है ,जो उसके पास जाता है किन्तु क्रोधाग्नि सरे कुटुम्ब  को जला   डालती है ।

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कामना सागर की तरह अतृप्त है ,ज्यो -ज्यो हम उसकी आवश्यकता की पूर्ति  करते है त्यों-त्यों कोलाहल बढ़ाता है ,कम  नहीं होता

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बुद्धिमान क्षति होने  पर  रोते  नहीं अपितु क्षतिपूर्ति का उपाय ढूढने लगते है

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आसक्ति ही मनुष्य को नीच और दुर्बल बनाती है

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