navratri sthapana puja vidhi in hindi

navratri sthapana puja vidhi in hindi
नवरात्र और माता के नवरूप navratri sthapana puja vidhi in hindi
पहले दिन माँ के पहले रूप शैलपुत्री से भक्तों को मिलेगी जीवन में स्थिरता ,दृढ़ता …..
नव् रात्र स्थापना एवं पूजन की सरल विधि
जौ , अक्षत , सिन्दूर ,लौंग ,इलायची ,पुष्प ,, गंगाजल , , घी ,वस्त्र , आभूषण ,चन्दन बिल्वपत्र , दूर्वा ,पान, रोली , सुपारी ,केसर ,जल ,इत्र ,मौली ,सर्वोषधि ,दीपक (बडा ),पंचपत्र ,धुप ,ऋतु ,नारियल फल ,नैवेद्य , ,सप्तमृतिका ,कलश , चौकी ,लाल वस्त्र (आसन पर बिछाने के लिए )माँ दुर्गा की प्रतिमा अथवा चित्र ,
पूजा स्थल पर पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख कर ऊन ,कम्बल या कुश से बने आसन पर बैठ जाये
शिखाबंधन कर माथे पर तिलक लगाए
ॐ केशवाय नमः … ॐ माधवाय नमः। … ॐ नारायणाय नमः इन मन्त्रों का उच्चारण करते हुए जल से ३ बार आचमन करे
तत्पश्चात ॐ ऋषिकेशाय नमः का उच्चारण कर हस्त प्रक्षालन कर ले
पवित्रीकरण हेतु स्वयं तथा पूजन सामग्री पर जल प्रोक्षण करते हुए निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करें –
ॐ अपवित्रः पवित्रो व सर्वावस्थाम गतोपि वा
यः स्मरेत पुण्डरीकांक्ष स बाह्यभ्यंतर : शुचि :
ॐ पुण्डरीकाक्ष पुनातु ,ॐ पुण्डरीकाक्ष पुनातु ,ॐ पुण्डरीकाक्ष पुनातु ,
अब चौकी पर कुछ अक्षत रखे ,तदुपरांत सुपारी पर मौली लपेटकर अक्षत पर रखे (ये विनायक और माँ दुर्गा के प्रतीक है )
विनायक स्तुति –
हाथ जोड़कर निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करें –
गजानन भूत गणाधिसेवितं कपित्थ जम्बूफल चारु भक्षणं
उमासुतं शोक विनाश कारकं नमामि विघ्नेश्वरं पाद पंकजं
पद प्रक्षालन हेतु विनायक के चरणों में आचमनी से जल चढ़ाये। अर्घ्य चढ़ाने और आचमन के पश्चात् शुद्ध जल से विनायक स्नान कराते हुए निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करे –ॐ गं गणपतये नमः
,तत्पश्चात दो बार मौली चढ़ाये (यह उपवस्त्र व् वस्त्र का प्रतीक है )जनेऊ पहनाये और फिर कुमकुम का तिलक लगाए।
अक्षत चढ़ाये ,फूल माला पहनाये ,फिर क्रमशः दीप -धूप दिखाए ,ऋतु फल और नैवेद्य चढ़ाये ,पान के पत्ते पर लौंग व् इलाइची रखकर चढ़ाये। तत्पश्चात मुख प्रक्षालन हेतु जल चढ़ाये।
घट स्थापना –
चौकी के बाई ओर स्वस्तिक का चिह्न बनाकर उस पर अक्षत और पुष्प चढ़ा दे तदुपरांत उस पर जल से भरा कलश स्थापित कर दे ,कलश में सर्वोषधि ,,सप्तमृतिका ,दूर्वा और कुछ सिक्के डाल दे। नारियल को लाल वस्त्र से लपेटकर ,मौली से बाँध दे और कलश के मुख पर रख दे। जल छिड़क दे और हाथ में अक्षत,पुष्प लेकर निम्न लिखित मन्त्र का उच्चारण करें –
सर्वे समुद्रा :सरिता स्तिथार्नि जलदा नदा :
आयान्तु देव पूजार्थ दुरित क्षय कारका :
गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति
नर्मदे सिंधु कावेरी जलेस्मिन सन्निधिं कुरु
दोनों हाथ जोड़कर प्रार्थना करें –
प्रसन्नों भव। अनया पूजनया वरुनाद्यावाहिता देवता प्रियतान मम

दुर्गा पूजन
आसनं –
रम्यम सुशोभनं दिव्यं सर्वसौगंध संयुतम ,आसनं च मया दत्तम ग्रहाण परमेश्वरी
पादयम –
गंगोदकं निर्मलं च सर्वसौगंध संयुतं पाद प्रक्षालनार्थाय दत्तम ते प्रतिगृह्यताम
आचमनी से जल चढ़ाये
अर्घ्य
अद्यर्य गृहाण देवेशि गन्धपुष्पाक्षतै ;सकरुणाकर में देवी गुहांण अद्यर्यनमोस्तुते
जल चढ़ाये
आचमन
सर्वतीर्थ समानीनतम सुगंधिम निर्मल जल आचमनीयं मया दत्तं गृहाण जगदम्बिके
जल चढ़ाये
स्नानं
गंगा सरस्वती रेवा पयोष्णि नर्मदा जलै :स्नापितासि मया देवि तथाशांति कुरुष्व में
जल से स्नान कराये –
सर्व भूषादिके सोम्ये लोकलज्जा निवारणे मयोपादिते तुल्यम गृह्यतां परमेश्वरी
वस्त्र चढ़ाये
चन्दन
श्री खंड चन्दन दिव्य गन्धाढयं सुमनोहरम चन्दन देव देवेशि दत्तंतेप्रतिगृह्यताम
कुमकुम – चन्दन चढ़ाये
अक्षत
अक्षतान धवलान देवि शालियांन तंदुलान तथा आनीतान तब पूजार्थम गृहाण परमेश्वरी
अक्षत चढ़ाये
पुष्प
माल्यादीनि सुगन्धीनि मालत्यादीनि वैप्रभो मायोपपादिते तुल्यं गृहयताम जगदम्बिके
पुष्प चढ़ाये
धूप
वनस्पति रसोदभूता गन्धाढ्यः सुमनोहरं आंघेय :सर्वदेवानां धेपोयंम प्रति गृह्यताम
माँ की प्रतिमा अथवा चित्र की ओर धूप करें
दीप
साज्यम च वर्ति संयुक्तम वाहिना योजितं मया दीपं गृहाण देवेशि सर्वत्र तिमिरापहा
माँ की प्रतिमा की ओर दीपक दिखाए
नैवेद्य
नैवेद्य शर्करा घृत संयुक्तम मधुरम स्वादु चोत्तम उपहार समायुक्तं नैवेद्य प्रति गृह्यताम
नैवेद्य चढ़ाये
पूजा में रह गयी त्रुटि के लिए क्षमा प्रार्थना करे –
आवाहनं न जानामि न जानामि तवार्चनम
पूजा चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरी
आरती
जय अम्बे गोरी मैया जय श्यामा गोरी
तुमको निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी
जय अम्बे …..
मांग सिन्दूर विराजत टीको मृगमद को
उज्ज्वल से दोउ नैना ,चंद्र वदन नीको
जय अम्बे …..
कनक सामान कलेवर रक्ताम्बर राजै
रक्त पुष्प गाल माला ,कण्ठं पर साजे
जय अम्बे …..
केहरि वाहन राजत ,खडग खप्परधारी
सुर -नर मुनि जान सेवत ,तिनके दुखहारी
जय अम्बे …..
कानन कुंडल शोभित ,नासाग्रे मोती
कोटिक चंद्र दिवाकर सम राजत ज्योति
जय अम्बे …..
शुम्भ -निशुम्भ बिडारे ,महिषासुर घाती
धूम्र विलोचन नैना ,निशदिन मदमाती
जय अम्बे …..
चण्ड -मुंड संहारे ,शोणित बीज हरे
मधु कैटभ दोउ मारे ,सुर भयहीन करें
जय अम्बे …..
ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी
आगम निगम बखानी ,तुम शिव पटरानी
जय अम्बे …..
चौसठ योगिनी गावत ,नृत्य करे भैरु
बाजत ताल मृदंगा और बाजत डमरू
जय अम्बे …..
तुम ही जग की माता ,तुम ही हो भरता
भक्तन की दुःख हरता सुख सम्पति करता
जय अम्बे …..
भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारी
मन वांछित फल पावत ,सेवत नर -नारी
जय अम्बे …..
कंचन थाल विराजत ,अगर कपूर बाती
श्री माल केतु में रजत कोटि रतन ज्योति
जय अम्बे …..
श्री अम्बे जी की आरती जो कोई नर गावे
कहत शिवानंद स्वामी ,सुख सम्पति पावे
जय अम्बे ..
और अंत में साष्टांग प्रणाम कर ले।










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