प्रेरक वचन -मस्तिष्क का सात्विक भोजन है

दृढ इच्छा शक्ति से हिमालय को हथेली पर उठाया जा
सकता है -स्वामी विवेकानंद
Inspirational motivational quotes in hindi
सीखने की इच्छा रखनेवाला गधे से भी सीख ले सकता है -स्वामी की आज्ञा पालन ,कष्टदायी स्थिति की परवाह ना करना और सदैव संतुष्ट रहना -चाणक्य
शत्रु को मारने में पाप नहीं ,पाप शत्रु को छोड़ने में है -प्रेमचंद
एक पाप मनुष्य के सारे पुण्यों को खा जाता है -सुभाषित
दिल ,तलवार से नहीं बल्कि प्रेम भरी मुस्कराहट से जीता है -शेक्सपियर
आचरण चरित्र का प्रमाण पत्र है -सुभाषित
स्वर्ण और रजत मंडित महल यही रह जायेगे ,जब काल तुम्हे अपने साथ ले जायेगा -गरुड़ पुराण
विश्वास और निर्दोषता का गुण जितना एक शिशु से सीखा जा सकता है ,उतना किसी और से नहीं -दांते
शोक धैर्य को नष्ट कर डालता है ,शोक बुद्धि को क्षीण बना देता है ,शोक सब कुछ नष्ट कर देता है। शोक के समान कोई और शत्रु नहीं -वाल्मीकि रामायण

प्रेम दूज का चाँद है और श्रद्धा पूर्णिमा का चाँद। प्रेम बढ़ता है और श्रद्धा घटती है।
प्रेमी बनो ,श्रद्धेय नहीं -प्रेमचंद
दृढ इच्छा शक्ति से हिमालय को हथेली पर उठाया जा सकता है -स्वामी विवेकानंद
विजेता वह नहीं जिसने भुज बल से राज्यों को जीता हो ,सच्चा विजेता वह है जिसने मन को जीत लिया हो -सुभाषित
प्रेम दूज का चाँद है और श्रद्धा पूर्णिमा का चाँद। प्रेम बढ़ता है और श्रद्धा घटती है। प्रेमी बनो ,श्रद्धेय नहीं -प्रेमचंद
दुःख से भी कण्ठावरोध होता है और आनंद से भी किन्तु दुःख से हुआ कण्ठावरोध शुष्क और दाह युक्त होता है ,इसके विपरीत आनंद से भरा हुआ कण्ठावरोध आद्र व शीतल होता है -प्रेमचंद
शांति के समान कोई तप नहीं ,संतोष से बढकर सुख नहीं ,तृष्णा से बढ़कर कोई व्याधि नहीं और दया के समान कोई धर्म नहीं -चाणक्य
स्त्री और पुरुष के मूल्यांकन का सबसे श्रेष्ठ अवसर तब होता है ,जब दिनों के बीच झगड़ा होता है। झगड़ते समय कौन कैसा व्यवहार करता है। यह व्यवहार ही उनके अच्छे या बुरे होने का मापदंड है -जॉर्ज बर्नार्ड शॉ
हानि के दुःख को भुलाने की सर्वोत्तम औषधि है -निरंतर कार्य में जुटे रहना -यंग
ज्ञानी विवेक से सीखते है सामान्य मनुष्य अनुभव से सीखता है और मूर्ख आवश्यकता से -सिसरो
संन्यासी वह नहीं जो भगवा वस्त्र पहनता है ,संन्यासी वह है जो इस बात की चिंता नहीं करता कि कल क्या खाऊंगा ,कल क्या पहनूंगा ,कल क्या होगा -राम कृष्ण परम हंस
संन्यास ह्रदय की मनोदशा का नाम है ,किसी ऊपरी नियम या वेशभूषा का नहीं -श्री मद्भगवद गीता
किसी पर संदेह करने से स्वयं का मन मलिन होता है -प्रेमचंद
संशय , उत्साह की शक्ति को क्षीण कर देता है -वैशम्पायन
जो मनुष्य सब कामनाओं का त्याग कर ममता रहित ,अहंकार रहित और स्पृहा रहित हो जाता है ,उसी मनुष्य को शांति मिलती है -श्री मद्भगवद गीता
भीतर से शून्य हो जाना ही परम शांति की पराकाष्ठा है -सुभाषित
समाज के बिना मनुष्य पशु तुल्य है -चाणक्य
सत्य का स्वाद भले ही कड़वा हो किन्तु बुराई के रोग को मिटा देता है -सुभाषित
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