hindi poem

hindi poem – ना पड़े किसी की ज़िन्दगी बुझाना
चल रही आंधियां
आ रहे तूफ़ान
लेकिन न कोई पेड़ गिरा
और न खड़ा है
हर पेड़ बस झुका पड़ा है
इंतज़ार है सबको
आंधी के थमने का
और
तूफ़ान के गुजर जाने का
होता है जब भी हंगामा
होठों को सी कर
या तो हम मोमबत्तियाँ जलायेगे
फेंकेगे पत्थर
चीखेंगे -चिल्लायेंगे
या फिर मकान -दुकान गिराएगे
मिडिया चुप हो जायेगा
हम अपने -अपने घर चले जायेगे
फिर इंतज़ार करते है
किसी नए हंगामे का
क्या हो नहीं सकता ऐसा
सारे फैसले एक साथ कर ले
ताकि न पड़े फिर से मोमबत्तियाँ जलना
और ना पड़े किसी की ज़िन्दगी बुझाना









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