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hindi poem -हर चेहरे पर मुखौटा है

August 31, 2017
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hindi poem -हर चेहरे पर मुखौटा है

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hindi poem -हर चेहरे पर मुखौटा है 9

यहाँ तो हर चहरे पर मुखौटा है ….

 
यहाँ तो हर चेहरे पर मौखुटा है


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इन्सान इन्सान रहे

तो पहचान भी लूं मै
यहाँ तो हर चेहरे पर मुखौटा  है
 
देखा एक वत्कल धारी
सोचा, होगा कोई ज्ञानी ध्यानी
पर वह न ज्ञानी था और न ध्यानी
वह जटाधारी ‘
निकला बलात्कारी
जिसने चलाई विश्वास पर आरी
वह भी एक तरफा नहीं ,दुधारी
 
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न तू रहीम है
ना तू राम है
वासना पूर्ति ही तेरा काम है
न सच्चा तेरा डेरा  है
न अच्छा तेरा चेहरा है
न अच्छी  तेरी सूरत है
ना अच्छी तेरी सीरत है
यही तेरी हकीकत है

आस्था और विश्वासों की
Hindi Hindustaniतुमने की  फजीहत  है
अंध भक्तों के लिए  
यह भी एक नसीहत है 
इन्सान इन्सान रहे

 

तो पहचान भी लूं मै
यहाँ तो हर चेहरे पर मुखौटा  है

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राम से आशा पाल रखी थी 
राम-रहीम का भेद मिटायेगे 
नहीं पता पता था 
ये छद्म धारी ,ऐसा रूप दिखायेंगे 

ये तीनों तो पड़ गए 
Hindi Hindustaniरावण पर भी भारी 
थूकों इन पर बारी- बारी
मिलकर दुनिया सारी 
इन्सान इन्सान रहे

तो पहचान भी लूं मै
यहाँ तो हर चेहरे पर मुखौटा है

 

 

 

 
अविश्वासों ने मुझको घेरा 
लग गया सवालों का डेरा
जला तो मै था दूध से
मगर अब पीता हूँ
छाछ भी फूंक-फूंक के
गला भी रीत गया है थूक थूक के
कई एकड़ ज़मी वाले संतों के
पैर के नीचे ज़मी नहीं है 
अपनी काली करतूतों पर 
शर्म इन्हें नहीं है 
इन्सान इन्सान रहे

तो पहचान भी लूं मै
यहाँ तो हर चेहरे पर मुखौटा है

डाक्टर, जैसे जल्लाद हो गए
गुंडे सारे फौलाद हो गए 
कल तक जिनके चेहरे फीके
 
 
आज चमकदार हो गए

काबिल न थे जो चौकीदार के

वे सब सत्ता के पहरेदार हो गए
 
                                     
उम्मीद थी जिससे
ठीक से करेगा रखवाली
यह सोचकर कर रख दिया
खाकी वर्दीधारी  
बाड समझा था जिसे  ,
वही खा गई फसल सारी
शिक्षक ,भिक्षुक हो गये
विद्यार्थी इच्छुक हो गए
इन्सान इन्सान रहे
तो पहचान भी लूं मै
यहाँ तो हर चेहरे पर मुखौटा है
 

 

 

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