Hindi Hindustani
Important Days

father day in hindi

June 18, 2022
Spread the love

पिता 

Hindi Hindustani
father day in hindi 9

father day in hindi

Hindi Hindustani
father day in hindi 10

पिता – 

Hindi Hindustani
father day in hindi 11

 जिसके साथ हमारे साहित्यकारो ने वह न्याय नहीं  किया,जिसका वहअधिकारी है।

साहित्यकारों को माँ की ममता  दृष्टिगोचर हुई ,

माँ की ममता का बखान करते हुए न तो शब्द कम  पड़े .. न कागज़  और न स्याही  ….
लिखा   … खूब लिखा  …. और भी लिखा जा सकता है क्योकि माँ का बखान अवर्णनीय है  …अवर्चनीय है, किन्तु पिता के प्रति कवियों और लेखकों द्वारा कृपणता दिखलाना क्या न्याय संगत है ?

क्या पिता का हदय  नहीं होता ?

Hindi Hindustani
father day in hindi 12

क्या पिता का  ह्रदय पाषाण है ?

क्या पिता का ह्रदय अपनी संतान के लिए नहीं तड़पता ?

क्या ऊपर से कठोर दिखानेवाला पिता भीतर से भी उतना ही 

कठोर होता है ?

क्या उसके ह्रदय में वात्सल्य का अंकुरण प्रस्फुटित नहीं होता ?

क्यों हमारे साहित्यकारों की कलम पिता के प्रति उपेक्षित रही ?

माता कौशल्या के  स्नेह को  शब्द बना -बनाकर कर कागज़ 

पर खूब बहाया  ……

माता यशोदा के मातृत्व को शहद में डुबो -डुबोकर लिखा गया

Hindi Hindustani
father day in hindi 13

लेकिन पिता दशरथ और नन्द की व्यथा पर साहित्यकारों की कलम मूक बनी रही

क्या मर्द को दर्द नहीं होता ?

होता है ,बहुत दर्द होता है उसे भी  …अपनी संतान को दुःख और कष्ट में देखकर

पिता का ह्रदय भी भीतर से उतना स्निग्ध और कोमल होता है ,जितना एक माँ का

उसका ह्रदय भी भीतर ही भीतर अपनी संतान के लिए रोता  है ,मगर चुप-चाप  … चुप-चाप

अंतर सिर्फ इतना है कि  माँ के आँसू दृष्टित हो जाते है और पिता के आँसू   अदृश्य रह जाते है

शमा को जलते देखकर सभी कहते है – देखो ,शमा कैसे जल रही रही है  किन्तु उसके साथ जल रहे धाँगे के प्रति किसी की सहानुभूति नहीं

Hindi Hindustani
father day in hindi 14

पिता यथार्थ में पीता है

मगर ,मदिरा नहीं

अपनी संतान के सारे कष्ट पीता है

कष्ट की एक दो बूँद नहीं

सारा समंदर पीता है

बच्चों के लिए जीता है

इसीलिए वह पिता है 

रिश्तों की किताबों में 

वह गीता है 

बाहर सब कुछ 

लेकिन 

भीतर से रीता है 

Hindi Hindustani
father day in hindi 15

माँ की ममता दृश्य है  … पिता का वात्सल्य अदृश्य

पिता भीतर से रोता  है लेकिन आँसू  दिखलाता नहीं

अपने भीतर के क्रंदन को होठों से  बाहर  नहीं आने देता     

पिता अपना समस्त संचित -अर्जित सुख अपनी संतान पर 

न्यौछावरकर देता है

अपना सर्वस्व अपनी संतान पर लुटा स्वयं रिक्त रहता है

अपनी संतान से सुख न पाकर भी अपनी संतान को सुखी देख-देखकर खुश होता रहता है

कोई गिला नहीं कोई शिकवा नहीं कोई शिकायत नहीं

सुनाई नहीं देता किसी को उसका क्रंदन

है पाषाण लेकिन उसमें भी है स्पन्दन 
 

दिल उसका भी रोता है

समंदर का पानी किनारे से बाहर नहीं आता

पिता के भीतर का आंसू भी बाहर नहीं आता

माँ से वह इक्कीस नहीं, न सही

लेकिन उन्नीस भी नहीं

वह भी बीस है

औरों के लिए न सही

अपनी संतान के लिए रईस है

जो धूप में बादल का टुकड़ा बनकर चलता है  

जो सरदी में तन संतान का ढक ठिठुरता है

जो बरसात में छाता बनके छा जाता है

इसीलिए पिता कहलाता है

धनी वर्ग में पिता का त्याग भले ही स्पष्ट नज़र न आता हो किन्तु मध्यम  और निम्न वर्ग में पिता के त्याग का आकलन आँखे देखकर ही कर लेती है –

गरीब पिता की कमीज की कॉलर घिस गयी है ,नई  कमीज चाहता है। उसी समय बच्चे को स्कूल की यूनिफार्म खरीदनी हो तो पहले बच्चे की यूनिफार्म खरीदता है।

गरीब पिता के जूतों के तले घिस गए ,नया जूता खरीदना चाहता है,उसी समय बच्चे को स्कूल  यूनिफार्म के जूते खरीदने  हो तो पहले बच्चे के  यूनिफार्म के जूते खरीदता है।

हड्डियाँ कंपा देनेवाली सर्दी हो तो  अपने से पहले बच्चे के लिए गर्म कपडे खरीदता है

खुद बारिश में भींगता रहा ,लेकिन छाता बच्चे के सिर  पर रखा

खुद गरमी में तपता रहा ,लेकिन बच्चे को छतरी देकर छाया में रखा

अपने अभाव  …अपने दर्द   ….. अपनी परेशानी को पीछे रखकर ,पहले बच्चे का ध्यान रखा

वह दर्द पीता है ,इसलिए वह पिता है 

वो नाव है ,पतवार है ,किनारा है

हर एक का सहारा है

मुसीबतों से कभी न हारा है

संतान के लिए

ईश्वर जितना ही प्यारा है

माँ का विश्वास है  ,

संतान की आस है ,

इसीलिए वह ख़ास है  

You Might Also Like...

No Comments

    Leave a Reply

    error: Content is protected !!
    error: Alert: Content is protected !!