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Disha-kedarnath singh-12hindi-antra- दिशा’ केदारनाथ सिंह-vyakhya-MCQ

February 4, 2026
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Disha-kedarnath singh-12hindi-antra- दिशा’ केदारनाथ सिंह-vyakhya-MCQ

Add Disha-kedarnath singh-दिशा’ -कविता का मूल भाव

‘दिशा’ केदारनाथ सिंह द्वारा रचित एक संक्षिप्त किंतु अर्थगर्भित कविता है, जो बालमनोविज्ञान और मानवीय दृष्टि की सहजता पर आधारित है। इस कविता में कवि एक साधारण-सी घटना के माध्यम से जीवन की गहन सच्चाई को उजागर करता है। कवि पतंग उड़ाते हुए एक बालक से सहज भाव में प्रश्न करता है कि हिमालय किस दिशा में स्थित है।

 

बालक इस प्रश्न पर किसी प्रकार का विचार या गणना नहीं करता, बल्कि अपनी बाल-सुलभ सरलता और निष्कपट दृष्टि से तुरंत उत्तर देता है कि जिस दिशा में उसकी पतंग उड़ती जा रही है, वही दिशा हिमालय की है। यह उत्तर तर्क या भूगोल पर आधारित नहीं, बल्कि अनुभव और कल्पना से उपजा हुआ है।

 

बालक का यह सहज, निर्दोष और कल्पनाशील उत्तर कवि को गहराई से प्रभावित करता है। कवि को प्रतीत होता है कि इस सरल कथन में ही उसे हिमालय की वास्तविक दिशा का बोध हो गया है। यहाँ हिमालय केवल एक भौगोलिक पर्वत नहीं, बल्कि ऊँचाई, आकांक्षा, आदर्श और लक्ष्य का प्रतीक बन जाता है। इस प्रकार ‘दिशा’ कविता यह संकेत देती है कि जीवन की सच्ची दिशाएँ कभी-कभी जटिल ज्ञान से नहीं, बल्कि बाल-सुलभ सरलता और सहज अनुभूति से ही स्पष्ट होती हैं।

***

सप्रसंग व्याख्या- दिशा – केदारनाथ सिंह

  1.  

हिमालय किधर है ?

मैंने उस बच्चे से पूछा जो स्कूल के बाहर

पतंग उड़ा रहा था

उधर-उधर-उसने कहा

जिधर उसकी पतंग भागी जा रही थी

मैं स्वीकार करूँ

मैंने पहली बार जाना

हिमालय किधर है।

 

 

 

 

 

**प्रसंग :**

प्रस्तुत पंक्तियाँ समकालीन हिंदी कविता के सुप्रसिद्ध कवि **केदारनाथ सिंह** द्वारा रचित कविता *‘दिशा’* से ली गई हैं। इस कविता में कवि ने बालकों के सहज, स्वाभाविक और यथार्थबोध से युक्त दृष्टिकोण को अत्यंत सरल और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। बालक का उत्तर कवि को जीवन और दिशा के एक नए अर्थ से परिचित कराता है।

 

**व्याख्या –

इन पंक्तियों में कवि बच्चों की निष्कपट सहजता का वर्णन करता है। कवि जब एक बच्चे से पूछता है कि हिमालय किस दिशा में है, तो वह बच्चा—जो अपने विद्यालय के बाहर पतंग उड़ा रहा है—बिना किसी हिचक या दुविधा के उत्तर देता है कि जिस ओर उसकी पतंग उड़ती चली जा रही है, वही दिशा हिमालय की है।

 

बालक का यह उत्तर किसी मानचित्र, पुस्तक या भूगोल के ज्ञान पर आधारित नहीं है, बल्कि उसकी प्रत्यक्ष अनुभूति और कल्पनाशील यथार्थ से जुड़ा हुआ है। कवि को बच्चे का यह स्वाभाविक उत्तर इतना गहरा और सच्चा प्रतीत होता है कि वह स्वीकार करता है कि आज उसे पहली बार यह समझ में आया कि हिमालय वास्तव में किस दिशा में है। इस कथन के माध्यम से कवि यह संकेत करता है कि कभी-कभी बाल-सुलभ दृष्टि वयस्कों के जटिल बौद्धिक ज्ञान से अधिक सटीक और अर्थपूर्ण हो सकती है।

 

विशेष –

 

कविता में बच्चों के सहज, निष्कपट और अनुभवजन्य यथार्थबोध का सुंदर चित्रण है।

 

भाषा बोलचाल की, अत्यंत सरल, भावपूर्ण और प्रवाहमयी है।

 

प्रश्न, पुनरुक्ति-प्रकाश तथा अनुप्रास अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है।

 

कविता मुक्त छंद में रचित है।

 

बालक का उत्तर प्रतीकात्मक रूप से जीवन की सही दिशा की ओर संकेत करता है।

व्याख्या पर आधारित बहु-विकल्पीय प्रश्न-MCQ

**प्रश्न 1.** कविता *‘दिशा’* के रचयिता कौन हैं?

(क) अज्ञेय

(ख) धूमिल

(ग) केदारनाथ सिंह

(घ) नागार्जुन

 

**सही उत्तर :** (ग)

 

 

**प्रश्न 2.** कवि ने हिमालय के बारे में प्रश्न किससे पूछा?

(क) एक शिक्षक से

(ख) एक ग्रामीण से

(ग) एक बालक से

(घ) एक यात्री से

 

**सही उत्तर :** (ग)

 

 

**प्रश्न 3.** बालक ने हिमालय की दिशा किस आधार पर बताई?

(क) मानचित्र देखकर

(ख) पाठ्यपुस्तक के ज्ञान से

(ग) पतंग की उड़ान की दिशा से

(घ) सूर्य की स्थिति से

 

**सही उत्तर :** (ग)

 

 

**प्रश्न 4.** बालक के उत्तर से कवि को क्या अनुभूति हुई?

(क) आश्चर्य

(ख) भ्रम

(ग) जीवन की एक नई समझ

(घ) निराशा

 

**सही उत्तर :** (ग)

 

 

**प्रश्न 5.** इस काव्यांश का मूल भाव क्या है?

(क) भौगोलिक ज्ञान

(ख) बाल-सुलभ सहजता और यथार्थबोध

(ग) प्रकृति-चित्रण

(घ) शिक्षा-पद्धति

 

**सही उत्तर :** (ख)

 

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