12 cbse board परीक्षा में hindi विषय के अंतर्गत hindi elective के लिए 12 cbse board द्वारा निर्धारित hindi book (antara) का अध्ययन करनेवाले शिक्षार्थियों !
12 cbse/hindi/antara/ Chapter 4- banaras-kedarnath singh/‘बनारस’- केदारनाथ सिंह/) के काव्य खंड से पूछे जानेवाले प्रश्नों का संकलन ( कविता का मूल ,काव्यांश का भावार्थ ,काव्यांश से परीक्षोपयोगी संभावित बहु विकल्पीय प्रश्न -(MCQ )आपकी परीक्षा तैयारी हेतु प्रस्तुत है .
इस भाग में 12 cbse/hindi/antara/ Chapter 4- banaras-kedarnath singh/‘बनारस’- केदारनाथ सिंह) का गीत-जय शंकर प्रसाद) केअंतर्गत कविता का मूल भाव ,व्याख्या तथा काव्यांश से परीक्षोपयोगी संभावित बहु विकल्पीय प्रश्न (MCQ)दिए गए है .
काव्यांश को तीन भागों में बांटा गया है –(अ)(ब)(स),
अ -भाग में कविता का मूल भाव दिया गया है
ब -भाग में काव्यांश का भावार्थ -व्याख्या दी गई है .
स-भाग में काव्यांश से परीक्षोपयोगी संभावित बहु विकल्पीय प्रश्न (MCQ)दिए गए है
यहाँ पर काव्य खंड के / Chapter 4- banaras-kedarnath singh/‘बनारस’- केदारनाथ सिंह)) के Question -Answer(प्रश्न-उत्तर ) इस प्रकार से तैयार किये गए है जो परीक्षा में अक्सर पूछे जाते हैं , तीनों भागो को ध्यानपूर्वक पढ़ लेने के पश्चात् आपकी सम्पूर्ण पाठ की तैयारी हो जाएगी.
बनारस -सप्रसंग व्याख्या
इस शहर में वसंत अचानक आता है
और जब आता है तो मैने देखा है
लहरतारा या मडुवाडीह की तरफ़ से
उठता है धूल का एक बयंडर
और इस मान पुराने शहर की जीभ
किरकिराने लगती है।
प्रसंग :
प्रस्तुत पंक्तियाँ समकालीन हिंदी कविता के प्रमुख कवि केदारनाथ सिंह द्वारा रचित कविता *‘बनारस’* से ली गई हैं। इस कविता में कवि ने बनारस के सांस्कृतिक, सामाजिक और भौगोलिक जीवन की सहज एवं यथार्थ झलकियाँ प्रस्तुत की हैं। यहाँ बनारस केवल एक नगर नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक इकाई के रूप में उपस्थित है।
व्याख्या:
इन पंक्तियों में कवि बनारस में वसंत ऋतु के आगमन का चित्रण करते हुए बताता है कि इस नगर में वसंत किसी पूर्व घोषणा या संकेत के बिना अचानक आ धमकता है। वसंत का यह आगमन कोमल पुष्पों या मधुर हवाओं के रूप में नहीं, बल्कि धूल से भरी तेज़ आँधी के रूप में प्रकट होता है। कवि देखता है कि लहरतारा अथवा मडुवाडीह जैसे इलाकों की ओर से धूल का बवंडर उठता है, जो पूरे नगर को अपनी चपेट में ले लेता है।
इस धूलभरी आँधी के कारण बनारस के प्राचीन और भीड़-भाड़ वाले जीवन में रहने वाले लोगों के मुँह में धूल भर जाती है और उनकी जीभ किरकिराने लगती है। इस दृश्य के माध्यम से कवि बनारस के जीवन की यथार्थवादी छवि प्रस्तुत करता है, जहाँ ऋतुओं का सौंदर्य भी अपने विशिष्ट और अनगढ़ रूप में दिखाई देता है। वसंत यहाँ किसी रोमानी कल्पना के रूप में नहीं, बल्कि नगर के रोज़मर्रा के संघर्षपूर्ण जीवन से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है।
विशेष –
* कविता में बनारस के नगर-जीवन का यथार्थपरक और जीवंत चित्रण हुआ है।
* भाषा तद्भव एवं देशज शब्दों से युक्त, भावपूर्ण और प्रवाहमयी है।
* अनुप्रास अलंकार का सहज प्रयोग हुआ है।
* कविता मुक्त छंद में रचित है, जो कथ्य की स्वाभाविकता को बनाए रखता है।
—
(ii) व्याख्या पर आधारित बहु-विकल्पीय प्रश्न-
**प्रश्न 1.** कविता *‘बनारस’* के रचयिता कौन हैं?
(क) अज्ञेय
(ख) नागार्जुन
(ग) केदारनाथ सिंह
(घ) धूमिल
**सही उत्तर :** (ग)
—
**प्रश्न 2.** बनारस में वसंत का आगमन किस रूप में दिखाया गया है?
(क) फूलों की खुशबू के रूप में
(ख) मधुर पवन के रूप में
(ग) धूलभरी तेज़ आँधी के रूप में
(घ) वर्षा के रूप में
**सही उत्तर :** (ग)
—
**प्रश्न 3.** कवि ने किन क्षेत्रों की ओर से धूल की आँधी उठने का उल्लेख किया है?
(क) दशाश्वमेध और अस्सी
(ख) लहरतारा और मडुवाडीह
(ग) भेलूपुर और लंका
(घ) रामनगर और सारनाथ
**सही उत्तर :** (ख)
—
**प्रश्न 4.** धूलभरी आँधी का लोगों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
(क) वे प्रसन्न हो जाते हैं
(ख) उनकी आँखों में जल भर आता है
(ग) उनके मुँह में धूल भर जाती है और जीभ किरकिराने लगती है
(घ) वे घरों में बंद हो जाते हैं
**सही उत्तर :** (ग)
—
**प्रश्न 5.** इस काव्यांश का प्रमुख वैशिष्ट्य क्या है?
(क) रोमानी सौंदर्य चित्रण
(ख) पौराणिक वर्णन
(ग) यथार्थपरक नगर-जीवन का चित्रण
(घ) आध्यात्मिक भावना
**सही उत्तर :** (ग)
व्याख्या पर आधारित बहु-विकल्पीय प्रश्न-
जो है वह सुगबुगाता है
जो नहीं है वह फेंकने लगता है पचखियाँ
आदमी दशाश्वमेध पर जाता है
और पाता है घाट का आखिरी पत्थर
कुछ और मुलायम हो गया है
सीढृियों पर बैठे बंदरों की औँखों में
एक अजीब-सी नमी है
और एक अजीब-सी चमक से भर उठा है
भिखारियों के कटोरों का निचाट खालीपन
—
**प्रसंग :**
प्रस्तुत पंक्तियाँ केदारनाथ सिंह द्वारा रचित कविता *‘बनारस’* से ली गई हैं। इस कविता में कवि ने बनारस के सांस्कृतिक, सामाजिक तथा मानवीय परिवेश को अत्यंत सूक्ष्म दृष्टि से उकेरा है। बनारस यहाँ केवल एक नगर नहीं, बल्कि संवेदनाओं से भरा हुआ जीवंत समाज बनकर उपस्थित होता है।
**व्याख्या –
इन पंक्तियों में कवि वसंत ऋतु के आगमन के समय उठने वाली धूलभरी आँधियों का बनारसवासियों पर पड़ने वाले प्रभाव का सजीव चित्र प्रस्तुत करता है। कवि कहता है कि इस धूल-भरे वातावरण में जो व्यक्ति जहाँ जिस अवस्था में होता है, वह अचानक कुछ अधिक सचेत और सजग-सा हो उठता है, और जो पहले से सजग नहीं होता, वह भी मानो बेचैन होकर पचखियाँ फेंकने लगता है। अर्थात् वसंत की यह हलचल पूरे नगर को भीतर तक आंदोलित कर देती है।
कवि आगे दशाश्वमेध घाट का दृश्य उपस्थित करता है। जब कोई व्यक्ति वहाँ पहुँचता है तो उसे घाट की अंतिम सीढ़ी का पत्थर कुछ अधिक ही मुलायम प्रतीत होता है। यह अनुभूति वातावरण में व्याप्त किसी अदृश्य कोमलता और परिवर्तन की ओर संकेत करती है। घाट की सीढ़ियों पर बैठे बंदरों की आँखों में भी एक अनोखी-सी नमी दिखाई देने लगती है, मानो प्रकृति के इस परिवर्तन से वे भी अछूते न रहे हों।
इसी प्रकार घाट पर बैठे भिखारियों के कटोरे, जो सामान्यतः खालीपन और अभाव के प्रतीक होते हैं, उस समय एक विचित्र-सी चमक से भर उठते हैं। यह चमक आशा, संभावना और जीवन की सूक्ष्म हलचल का संकेत देती है। इस प्रकार कवि धूलभरी आँधी के माध्यम से बनारस के जन-जीवन में व्याप्त संवेदनशीलता, चेतना और परिवर्तन को अत्यंत मार्मिक ढंग से अभिव्यक्त करता है।
विशेष
* कविता मुक्त छंद में रचित है।
* तद्भव एवं देशज शब्दों की प्रचुरता से भाषा जीवंत और स्थानीय बन पड़ी है।
* चाक्षुष बिंब योजना के माध्यम से दृश्य अत्यंत सजीव हो उठता है।
* अनुप्रास एवं उपमा अलंकारों का स्वाभाविक प्रयोग हुआ है।
* बनारस के जन-जीवन की संवेदनशीलता और सांस्कृतिक चेतना का सूक्ष्म चित्रण मिलता है।
व्याख्या पर आधारित बहु-विकल्पीय प्रश्न-MCQ
**प्रश्न 1.** कविता *‘बनारस’* के रचयिता कौन हैं?
(क) नागार्जुन
(ख) धूमिल
(ग) केदारनाथ सिंह
(घ) अज्ञेय
**सही उत्तर :** (ग)
—
**प्रश्न 2.** वसंत के आगमन पर बनारसवासियों में कौन-सा भाव उत्पन्न होता है?
(क) भय
(ख) उदासीनता
(ग) सजगता और हलचल
(घ) शांति
**सही उत्तर :** (ग)
—
**प्रश्न 3.** दशाश्वमेध घाट की अंतिम सीढ़ी का पत्थर अधिक मुलायम लगने का आशय क्या है?
(क) पत्थर घिस गया है
(ख) वातावरण में कोमलता और संवेदना का संचार
(ग) वर्षा का प्रभाव
(घ) कवि की कल्पना
**सही उत्तर :** (ख)
—
**प्रश्न 4.** बंदरों की आँखों में दिखाई देने वाली नमी किसका संकेत है?
(क) भय का
(ख) थकान का
(ग) वातावरण में आए भावात्मक परिवर्तन का
(घ) बीमारी का
**सही उत्तर :** (ग)
—
**प्रश्न 5.** भिखारियों के खाली कटोरों में दिखाई देने वाली चमक किस भाव को व्यक्त करती है?
(क) निराशा
(ख) उपेक्षा
(ग) आशा और संभावना
(घ) क्रोध
**सही उत्तर :** (ग)
बनारस’*-केदारनाथ सिंह- व्याख्या -
तुमने कभी देखा है
खाली कटोरों में बसंत का उतरना!
यह शहर इसी तरह खुलता है
इसी तरह भरता
और खाली होता है यह शहर
इसी तरह रोज्ञ-रोज्त एक अनंत शव
ले जाते हैं कंधे
अंधेरी गली से
चमकती हुई गंगा की तरफ़
इस शहर में धूल
धीरे-धीर डड़ती है
धीरि-धीर चलते हैं लोग
धीरे-धीर बजते हैं घंटे
शाम धीरे-धीर होती है।
—
**प्रसंग :**
प्रस्तुत पंक्तियाँ समकालीन हिंदी कविता के महत्त्वपूर्ण कवि **केदारनाथ सिंह** द्वारा रचित कविता *‘बनारस’* से ली गई हैं। इस कविता में कवि ने बनारस के सांस्कृतिक, सामाजिक और मानवीय जीवन को उसके विशिष्ट यथार्थ के साथ प्रस्तुत किया है। बनारस यहाँ केवल एक नगर नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु की निरंतर चलती प्रक्रिया का प्रतीक बन जाता है।
**व्याख्या –
इन पंक्तियों में कवि वसंत ऋतु के आगमन के बाद बनारस के जन-जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों का सूक्ष्म और मार्मिक चित्रण करता है। कवि प्रश्नवाचक शैली में कहता है कि क्या कभी ऐसा दृश्य देखा गया है कि जिन लोगों के कटोरे खाली हैं, अर्थात जिन्हें भरपेट भोजन भी नसीब नहीं होता, वे भी वसंत के आगमन का उल्लास अनुभव करते हों। यह प्रश्न बनारस की अद्भुत मानवीय संवेदनशीलता की ओर संकेत करता है।
कवि आगे बताता है कि बनारस एक ऐसा नगर है जहाँ आने-जाने, दिन-रात होने और जीवन के प्रवाह की गति निरंतर समान रूप से चलती रहती है। यहाँ प्रतिदिन कुछ लोग आते हैं और कुछ लोग चले जाते हैं। इस प्रकार यह शहर एक साथ भरता भी है और खाली भी होता रहता है। इसी क्रम में यहाँ प्रतिदिन असंख्य शवों को कंधों पर उठाकर अँधेरी गलियों से होते हुए उज्ज्वल गंगा की ओर अंतिम यात्रा के लिए ले जाया जाता है।
कवि बनारस की गति-लय को रेखांकित करते हुए कहता है कि इस शहर में धूल भी धीरे-धीरे उड़ती है, लोग भी धीरे-धीरे चलते हैं, मंदिरों की घंटियाँ भी धीरे-धीरे बजती हैं और शाम भी धीरे-धीरे उतरती है। जीवन से जुड़ी प्रत्येक क्रिया यहाँ एक समान, मंथर और शांत गति से चलती रहती है। इस प्रकार बनारस का जीवन एक विशेष लय और ठहराव के साथ प्रवाहित होता है, जिसमें उत्सव, पीड़ा, मृत्यु और आस्था सब एक साथ समाए हुए हैं।
विशेष –
* कविता में बनारस के जीवन की **मंथर, सतत और सांस्कृतिक लय** का सजीव चित्रण हुआ है।
* भाषा तद्भव, देशज, तत्सम एवं विदेशी शब्दों से युक्त, सहज, सरल, भावपूर्ण और प्रवाहमयी है।
* पुनरुक्ति-प्रकाश अलंकार का स्वाभाविक और प्रभावी प्रयोग हुआ है।
* लाक्षणिकता के माध्यम से गहन अर्थ-व्यंजना प्रकट हुई है।
* कविता मुक्त छंद में रचित है, जो कथ्य की सहजता को बनाए रखती है।
व्याख्या पर आधारित बहु-विकल्पीय प्रश्न-MCQ
**प्रश्न 1.** कविता *‘बनारस’* के रचयिता कौन हैं?
(क) धूमिल
(ख) केदारनाथ सिंह
(ग) नागार्जुन
(घ) अज्ञेय
**सही उत्तर :** (ख)
—
**प्रश्न 2.** खाली कटोरों वाले लोगों का वसंत का उल्लास मनाना किस बात का संकेत है?
(क) भौतिक समृद्धि का
(ख) सामाजिक असमानता का
(ग) मानवीय संवेदनशीलता और जीवन-रस का
(घ) व्यंग्य का
**सही उत्तर :** (ग)
—
**प्रश्न 3.** बनारस में लोगों का आना-जाना किस रूप में चित्रित हुआ है?
(क) अव्यवस्थित
(ख) अचानक
(ग) निरंतर और समान गति से
(घ) रुक-रुककर
**सही उत्तर :** (ग)
—
**प्रश्न 4.** शवों को गंगा की ओर ले जाना किस सत्य की ओर संकेत करता है?
(क) नगर की भीड़
(ख) धार्मिक आस्था
(ग) जीवन और मृत्यु की निरंतरता
(घ) सामाजिक परंपरा
**सही उत्तर :** (ग)
—
**प्रश्न 5.** ‘धीरे-धीरे’ शब्द की पुनरावृत्ति से कौन-सा भाव उभरता है?
(क) तीव्रता
(ख) भय
(ग) मंथर, स्थिर और शांत जीवन-लय
(घ) उत्सुकता
**सही उत्तर :** (ग)
व्याख्या पर आधारित बहु-विकल्पीय प्रश्न-MCQAdd Your Heading Text Here
**प्रश्न 1.** कविता *‘बनारस’* के रचयिता कौन हैं?
(क) धूमिल
(ख) केदारनाथ सिंह
(ग) नागार्जुन
(घ) अज्ञेय
**सही उत्तर :** (ख)
—
**प्रश्न 2.** संध्या-काल में बनारस किस प्रकाश में झिलमिलाता दिखाई देता है?
(क) सूर्यास्त के प्रकाश में
(ख) चंद्र-प्रकाश में
(ग) आरती के प्रकाश में
(घ) दीपावली के प्रकाश में
**सही उत्तर :** (ग)
—
**प्रश्न 3.** संध्या के समय बनारस में कौन-कौन सी क्रियाएँ साथ-साथ दिखाई देती हैं?
(क) व्यापार और मनोरंजन
(ख) पूजा-पाठ और शव-विसर्जन
(ग) उत्सव और राजनीति
(घ) शिक्षा और श्रम
**सही उत्तर :** (ख)
—
**प्रश्न 4.** ‘आधा नींद में, आधा आरती करता हुआ शहर’ से कवि क्या व्यक्त करता है?
(क) शहर की अव्यवस्था
(ख) शिथिलता
(ग) जीवन और आध्यात्मिकता का समन्वय
(घ) आधुनिकता का प्रभाव
**सही उत्तर :** (ग)
—
**प्रश्न 5.** ‘आधा होते हुए भी आधा नहीं लगता’ कथन का आशय क्या है?
(क) बनारस अधूरा शहर है
(ख) शहर भ्रम उत्पन्न करता है
(ग) विरोधी तत्वों में भी पूर्णता का भाव
(घ) शहर सोया हुआ है
**सही उत्तर :** (ग)
व्याख्या –बनारस’-केदारनाथ सिंह
जो है वह खडा है
बिना किसी स्तंभ के
जो नहीं है उसे थामे है
राख और रोशनी के ऊँचे-ऊँचे स्तंभ
आग के स्तंभ
और पानी के स्तभ
भुएँ के
खुशाू के
आदमी के उठे हुए हाथों के स्तंभ
किसी अलक्षित सूर्य को
देता हुआ अर्ध्य
शताबिद्यों से इसी तरह
गंगा के जल में
अपनी एक टांग पर खड़ा है यह शहर
अपनी दूसरी टाँग से
बिलकुल बेखबर।
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**प्रसंग :**
प्रस्तुत पंक्तियाँ समकालीन हिंदी कविता के प्रमुख कवि **केदारनाथ सिंह** द्वारा रचित कविता *‘बनारस’* से ली गई हैं। इस कविता में कवि ने बनारस के सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक जीवन का अत्यंत सजीव तथा आत्मीय चित्र प्रस्तुत किया है। बनारस को यहाँ आस्था, श्रद्धा और भक्ति की निरंतर चलती परंपरा के प्रतीक रूप में चित्रित किया गया है।
**व्याख्या –
इन पंक्तियों में कवि बनारस की विशिष्ट पहचान को रेखांकित करते हुए कहता है कि यह नगर सभी को सहारा देने वाला है। जो भी व्यक्ति यहाँ आता है, वह किसी न किसी रूप में अपनी आस्था से बँधा हुआ आता है और वही आस्था उसे आश्रय प्रदान करती है। बनारस में मनुष्य बाहरी साधनों से अधिक अपने विश्वास और श्रद्धा के सहारे जीवन जीता है।
कवि गंगा-आरती के दृश्य का वर्णन करते हुए बताता है कि आरती के पात्र से उठने वाली ज्योति की लपटें और धुएँ की रेखाएँ गंगा-जल में मानो प्रकाश-स्तंभों का रूप ले लेती हैं। चारों ओर आरती की सुगंध फैल जाती है और वातावरण आध्यात्मिक अनुभूति से भर उठता है। आरती के समय भक्तों के उठे हुए हाथ ऐसे प्रतीत होते हैं, मानो वे किसी अदृश्य सूर्य को जलांजलि अर्पित कर रहे हों।
कवि यह भी स्पष्ट करता है कि यह आस्था, श्रद्धा और भक्ति का आयोजन कोई नया नहीं है, बल्कि सदियों से इसी रूप में निरंतर चलता आ रहा है। बनारस इसी आस्था के सहारे अपने में मग्न रहता है और उसे बाहरी संसार की किसी चिंता की आवश्यकता नहीं होती। इस प्रकार बनारस एक ऐसा नगर बनकर उभरता है, जो अपनी आध्यात्मिक चेतना में स्थित होकर स्वयं में पूर्ण है।
विशेष –
* कवि ने बनारस को **श्रद्धा, भक्ति और आस्था का नगर** माना है।
* भाषा सहज, सरल, प्रवाहमयी तथा भावपूर्ण है।
* पुनरुक्ति-प्रकाश अलंकार का प्रभावी और स्वाभाविक प्रयोग हुआ है।
* कविता मुक्त छंद में रचित है।
* गंगा-आरती का दृश्य आध्यात्मिक सौंदर्य और सांस्कृतिक निरंतरता का सशक्त प्रतीक है।
—
**प्रश्न 1.** कविता *‘बनारस’* के रचयिता कौन हैं?
(क) अज्ञेय
(ख) नागार्जुन
(ग) केदारनाथ सिंह
(घ) धूमिल
**सही उत्तर :** (ग)
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**प्रश्न 2.** कवि के अनुसार बनारस में लोगों को किसका सहारा प्राप्त होता है?
(क) धन का
(ख) सत्ता का
(ग) आस्था और श्रद्धा का
(घ) परंपरा का विरोध
**सही उत्तर :** (ग)
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**प्रश्न 3.** गंगा-आरती के समय ज्योति और धुएँ से क्या बनता हुआ प्रतीत होता है?
(क) मेघ
(ख) प्रकाश-स्तंभ
(ग) धुंध
(घ) इंद्रधनुष
**सही उत्तर :** (ख)
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**प्रश्न 4.** भक्तों के उठे हुए हाथ किस क्रिया के प्रतीक हैं?
(क) अभिवादन
(ख) शोक
(ग) अदृश्य सूर्य को जलांजलि
(घ) आह्वान
**सही उत्तर :** (ग)
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**प्रश्न 5.** ‘यह शहर अपनी इसी आस्था के सहारे अपने में मग्न है’—इस कथन का आशय क्या है?
(क) बनारस बाहरी संसार से कट चुका है
(ख) बनारस को किसी सहारे की आवश्यकता नहीं
(ग) बनारस अपनी आध्यात्मिक चेतना में संतुष्ट और पूर्ण है
(घ) बनारस आधुनिकता से दूर है
**सही उत्तर :** (ग)





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