Hindi Hindustani
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hindi poem

April 19, 2016
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Hindi Hindustaniग़मों के बोझ तले  दब गयी है ज़िन्दगी
मौत को गले लगाने  निकल पड़ी है ज़िन्दगी 
खुदा की रज़ा  से पहले 
मौत से ज़िन्दगी को मिलने न दूंगा 
खुदा की अमानत है ज़िन्दगी 
अमानत में खयानत होने ना दूंगा 


Hindi Hindustani

 हालात अपने बदलने आये थे 
 इस  शहर में
खोली दुकान कफ़न की
 तो लोगों ने मरना 
 छोड़ दिया 
खोली दूकान शराब की 
तो लोगों ने पीना  छोड़ दिया 
दुनिया के समन्दर में 
ज़िन्दगी की कश्ती को हमने  भी 

 

 खुदा  के भरोसे 

बे-पतवार  ही छोड़ दिया  

Hindi Hindustaniबेवफा लोगों से वफ़ा की उम्मीद मत रखना 
देखो लुट जाओगे ,दरवाज़ा खुला  मत रखना 
खुदगर्जों की इस दुनिया में अपने को 
खुदा से खुद को  जुदा मत रखना 
दुनिया धोखा है ,खुदा  हक़ीक़त है 
अलावा खुदा के किसी पे यकी  मत रखना 

Hindi Hindustani
जुल्मोसितम  दुनिया के सह जाउगा 
 ज़हर नफ़रत का सारा पी जाउगा 
ऐ खुदा  मेरे 
जो  सर पर तू   हाथ अपना रख  दे
हर गम को हॅंस -हॅंस के सह जाऊँगा 

 

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