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deepawali – मेरे मन के दीपक hindi poems

October 29, 2016
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deepawali – मेरे मन के दीपक hindi poems

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deepawali - मेरे मन के दीपक hindi poems 10

दीपावली की हार्दिक शुभ कामना 

Hindi Hindustaniआप सभी वासी /प्रवासी प्रियजनों को –
ssuman-mujhe kuchh kahana hai.blogspot.com
सुरेश सुमन की ओर से 
Hindi Hindustaniदीपावली की हार्दिक शुभ कामना 
Hindi Hindustaniदीपकों की पवित्र ज्योति आपको और आपके परिवार को खुशिओं से आलोकित करती रहे 
एवं
Hindi Hindustaniमाँ लक्ष्मी  धन वर्षा कर  सुख सम्रद्धि से अभिसिंचित करती रहें  …. 

 


:

दीपक का सन्देश 

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मेरे मन के दीपक तू जलता चल
 
मेरे मन के दीपक तू जलता चल ,जलता चल
 
रूठा    है   जिससे   ऊपरवाला ,      नीचेवाला
 
महंगाई   और गरीबी   ने      छिना निवाला
 
न भगवान    न धनवान है     जिसका   रखवाला
 
ज़िन्दगी  बन  गई   है     जिसकी    हाला
 
मिटा उसके जीवन के   अँधेरेपन  का   काला 

मेरे मन के दीपक   तू बन जा उसका  उजाला
 
मन के दीपक तू जलता      चल ,जलता चल

 

 

 

 
 


मेरी        दिवाली      की सारी खुशियाँ
 
उस   गरीब    का    हिस्सा   बन जाये
 
मेरी   भावना ,मेरी  कामना   बन   जाये
 
मेरी  कामना ,मेरी  प्रार्थना   बन    जाये
 
इस बार दिवाली मेरा सारा आलोक ले जाये ,
 
मगर  दिवाली  उनकी  जगमग  हो  जाये

उसके अँधेरे मन का तू  बन जा   उजाला

 

 
 
मेरे मन के दीपक तू जलता चल ,जलता चल

 

 

 

 
 
 
न मन का कोना , न घर का   कोना 
 
रह  जाये    ना  कहीं   कोई   सूना

हे     मेरे   मन के    दीपक    तू 

उसके होठों पे खुशियां   बन  मुस्काना 

उसके अँधेरे मन का तू बन जा  उजाला

 

मन के दीपक तू जलता चल ,जलता चल

 

 

 

 

 



 
ज़िन्दगी है किसी की अमावस्या सी काली
 
जेब    है  जिसकी    पैसों से    खाली
 
दीपक    है जिसके    तेल से    खाली 
 
मै  क्यों  और   कैसे   मनाऊ   दिवाली
 
मेरी    देहरी    के    दीपों  की  माला 
 
बन जाये गरीब की झोपड़ी  का उजियाला  

 उसके अँधेरे मन का तू  बन जा उजाला
 
मेरे मन के दीपक तू जलता चल,जलता चल
 
 
 
 
 
बुझा  दिया    किसी    ने 
                       
उसकी     खुशियों का  दिया 
 
गर एक जलाता हुआ दिया
 
उस गरीब को    न  दिया
 
तो तेरा जलना निरर्थक है
 
सब मनाये दिवाली ,वे क्यों तरसे
 
उनके घर में भी वैभव बरसे
 
दिवाली मेरी तभी सार्थक है

 

 

 

आतिशों   के रंग बिरंगे सपने

क्यों नहीं है  इसके अपने  


मेरे मन के दीपक तू जलता चल ,


उसके जीवन का अँधेरा मिटाता चल
 


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जब -जब  दीपक जलता  है 

जब -जब  दीपक जलता  है ,
 अंधकार को हरता है ,हराता है 
 उजियारा  भर जाता है
तम  नहीं कही रह पाता  है 
जब -जब  दीपक जलता  है

जलकर भी 

खुद अंधकार में रहता है 
किन्तु
 औरो को पथ दिखलाता है
मुख से कुछ ना कहता है ,
दुःख सारे खुद सहता है 
जब -जब  दीपक जलता  है


छोटा है  ,

लेकिन सीना फौलादी रखता है 
हौसला तूफानों से 
आज़माता है  
आँधियों से  भी ना शरमाता है 
आंधी हो या  तूफ़ान 
सामने उनके 
 मंद मंद  मुस्काता है 
 तूफानों से भी टक्कर लेता है  
सीख सभी को देता है
ताक़त बाजुओं में नहीं ,
सीने में होती है 
जीत सदा लड़ने वाले की होती है 
जब -जब  दीपक जलता  है
सुरेश सुमन


 

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असतो मा सद्गमय
 तमसो मा ज्योतिर्गमय 
मृत्योर्मा अमृतम गमय 

 

ॐ शांति: शांति:शांति




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