deepawali – मेरे मन के दीपक hindi poems

दीपावली की हार्दिक शुभ कामना
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सुरेश सुमन की ओर से
एवं
:
दीपक का सन्देश
मेरे मन के दीपक तू जलता चल
मेरे मन के दीपक तू बन जा उसका उजाला
मेरी दिवाली की सारी खुशियाँ
उसके अँधेरे मन का तू बन जा उजाला
हे मेरे मन के दीपक तू
उसके होठों पे खुशियां बन मुस्काना
उसके अँधेरे मन का तू बन जा उजाला
उसके अँधेरे मन का तू बन जा उजाला
उसकी खुशियों का दिया
क्यों नहीं है इसके अपने
मेरे मन के दीपक तू जलता चल ,
उसके जीवन का अँधेरा मिटाता चल
जब -जब दीपक जलता है
जब -जब दीपक जलता है ,
अंधकार को हरता है ,हराता है
उजियारा भर जाता है
तम नहीं कही रह पाता है
जब -जब दीपक जलता है
जलकर भी
खुद अंधकार में रहता है
किन्तु
औरो को पथ दिखलाता है
मुख से कुछ ना कहता है ,
दुःख सारे खुद सहता है
जब -जब दीपक जलता है
छोटा है ,
लेकिन सीना फौलादी रखता है
हौसला तूफानों से
आज़माता है
आँधियों से भी ना शरमाता है
आंधी हो या तूफ़ान
सामने उनके
मंद मंद मुस्काता है
तूफानों से भी टक्कर लेता है
सीख सभी को देता है
ताक़त बाजुओं में नहीं ,
सीने में होती है
जीत सदा लड़ने वाले की होती है
जब -जब दीपक जलता है
सुरेश सुमन
असतो मा सद्गमय
तमसो मा ज्योतिर्गमय
मृत्योर्मा अमृतम गमय
ॐ शांति: शांति:शांति
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