quotes today

chanakya neeti -8

November 21, 2016
Spread the love

chanakya neeti -8

Hindi Hindustani

chanakya neeti -8

चाणक्य -नीति -8 

Hindi Hindustani
 

चाणक्य -नीति -८ 
Hindi Hindustaniकेवल  धन  प्राप्ति  की  कामना  अधम  मनुष्य  रखते  है ,अधम  केवल और  केवल  धन  की  कामना  करते  है , श्रेष्ठ  जन  केवल और केवल  मान  चाहते है किन्तु जो न  अधम  हो और न श्रेष्ठ  वे  धन और मान दोनों  की  कामना  रखते  है।

Hindi Hindustaniसामान्य  नियम  है  कि  स्नानं  इत्यादि  के बाद ही अन्न – जल  ग्रहण  किया  जाना चाहिए ,किन्तु  रुग्ण अवस्था  में  इस  नियम के साथ  समझौता कर लेना अनुचित नहीं है।

Hindi Hindustaniदीपक  अंधकार  का भक्षण  करता  है , इससे  काजल रूपी  संतान उत्पन्न   होती है , यही बात मनुष्य  पर भी लागू  होती है, मनुष्य  जैसा अन्य  का सेवन  करेगा , वैसी ही  संतान प्राप्त  होगी।

Hindi Hindustaniधन  की  महत्ता   सजन्नों   के उपयोग  से  ही है क्योकि  सज्जन  धन  का उपयोग  परमार्थ  के लिए  करते  है , धन  की  प्राप्ति सजन्नो  को ही  होनी चाहिए।  जैसे समुंद्र  का खरा पानी  बदलो  के साथ मीठे  पानी  के रूप बरसते है ,  सभी जीव – जंतु  वनस्पति  को जीवन  देते है , और  फिर समुंद्र  मे  मिल  जाते है।

Hindi Hindustaniतेल  मालिश , चिता के धुएं  के स्पर्श  , स्त्री  प्रसंग  एवं  केश  कर्तन   के पश्चात  स्नानं  न  करने तक  वह  चाण्डाल  अर्थात  अपवित्र  बना रहता  है।

Hindi Hindustaniअपच होने पर  जल औषधीय  तुल्य  है ,भोजन  के  पश्चात  के जल  शरीर  का बल  बढ़ाने  वाला  होता  है ,भोजन  के दौरान जल  अम्रत  तुल्य  है  किन्तु  भोजन के अन्त  मे  जल विषतुल्य  है।

Hindi Hindustaniज्ञान  का व्यवहारिक  जीवन  मे   उपयोग  नहीं  तो  ज्ञान  व्यर्थ  है। ज्ञान  के  बिना  जीवन  की सारी  क्रियाएं  व्यर्थ  है , ज्ञान  के बिना  मनुष्य  जीवन  की सार्थकता  वैसे  ही  नष्ट  हो जाती  है  , जैसे  बिना  सेनापति के  अभाव में  सेना  नष्ट  हो जाती है  और  पति  के बिना स्त्री  का जीवन   नष्ट  हो जाता है।



Hindi Hindustaniतीन बाते  मनुष्य  के लिए  मृत्यु  सामान  है –

 

वृद्धवस्था  मे  अर्धांगिनी  की  मृत्यु हो जाना।
धन -सम्पति  का  हाथ  से निकल  जाना।
दूसरो  पर आश्रित  हो  जाना।

 

Hindi Hindustaniअग्निहोत्र  के बिना  वेदों  का अध्धयन  व्यर्थ  है  ,  दान  किये  बिना  यज्ञ  आदि  की  कियाए  व्यर्थ  है। भाव  के बिना  कोई सिद्धि  नहीं  होती  अर्थात  प्रेम  भाव  ही  सब सिद्धियों  का मूल  है।


Hindi Hindustaniमूर्ति चाहे  धातु  की  हो ,पत्थर  की हो अथवा  लकड़ी  की  किन्तु भावना पवित्र होनी चाहिए । आप  जिस  भावना  से ईश्वर  का स्मरण  करेगे , वैसे  ही सिद्धि   की प्राप्ति होगी।ईश्वर मूर्ति  में नहीं मनुष्य की भावना  में व्याप्त रहता है।



Hindi Hindustaniशांति के समान  कोई अन्य तप  नहीं ,संतोष से बढ़कर सुख नहीं ,इसके विपरीत तृष्णा से बढ़कर अन्य कोई व्याधि नहीं और दया से बढ़कर कोई धर्म नहीं।


Hindi Hindustaniगुण मनुष्य का भूषण ,शील मनुष्य का अलंकार है। कार्य सिद्धि से विद्या भूषित होती है और धन के सार्थक उपभोग से धन सुशोभित होता है।


Hindi Hindustaniमनुष्य कितना ही सुंदर  क्यों न हो किन्तु उसका वह सौंदर्य व्यर्थ है यदि उसमे कोई गुण  न हो। उस मनुष्य का कुल निंदनीय है जिसके आचरण में शीलता न हो। ऐसे मनुष्य की विद्या भी व्यर्थ है जिससे कार्य सिद्धि न हो और वह धन भी व्यर्थ है ,जिस धन का सार्थक उपभोग न हो।


Hindi Hindustaniभूमिगत जल ,पतिव्रता स्त्री ,कल्याण करने वाला शासक तथा संतोषी ब्राह्मण पवित्र होता है।
जैसे असंतोषी ब्राह्मण निंदित होता है वैसे ही संतोषी शासक ,लज्जाहीन स्त्री निंदनीय है।


Hindi Hindustaniउस मनुष्य का उच्च कुल में जन्म लेना भी व्यर्थ है जो उच्च कुल में जन्म लेकर भी विद्या हीन है ,इसके विपरीत वह मनुष्य निम्न कुल में जन्म लेकर भी देव-तुल्य पूजनीय है जो निम्न कुल में जन्म लेकर विद्या गुण से परिपूर्ण है।सुंदर  ,तरुण और उच्च कुल में उत्पन्न पुरुष वैसे ही शोभा रहित होता है जैसे बिना गंध वाला पलाश का फूल।



Hindi Hindustaniविद्या गुण  से युक्त मनुष्य सर्वत्र प्रशंसा पाता है ,सम्मान पाता है ,धन-धन्य प्राप्त करता है। विद्या द्वारा प्रत्येक वस्तु की प्राप्ति संभव है


Hindi Hindustaniमाँस भक्षण करनेवाला ,मदिरा पान करने वाला ,मूर्ख और अज्ञानी इस धरती पर भार स्वरुप है। धरती इनके भार से व्यथित रहती है।



 

 

No Comments

    Leave a Reply

    error: Content is protected !!
    error: Alert: Content is protected !!