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mahashivratri -saral poojan vidhi in hindi

February 23, 2017
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mahashivratri -saral poojan vidhi in hindi

महाशिवरात्रि -सरल पूजन विधि

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महाशिवरात्रि -सरल पूजन विधि
हिन्दू परंपरा में त्यौहार मनाये जाने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। प्रत्येक त्यौहार की अपनी महत्ता है। इन त्योहारों में महाशिवरात्रि का विशेष माहात्म्य बतलाया गया है। यह व्रती को मनोवांछित फल ,धन ,सुख -सम्रद्धि ,सौभाग्य ,आरोग्यता प्रदान करने वाला माना गया है। शास्त्रानुसार सृष्टि के आदि में मध्य रात्रि को शिव का आविर्भाव होना माना गया है  । प्रलयकाल में प्रदोष समय शिवजी तांडव करते हुए अपने तीसरे नेत्र की अग्नि से ब्रह्मांड का विनाश करते है। शिवरात्रि को शिव-पार्वती के विवाह की  तिथि भी माना जाता है। धार्मिक मिथक के अनुसार पुरुष और प्रकृति के संयोग से सृष्टि की उत्पत्ति मानी गयी है। शिव पुरुष और पार्वती प्रकृति का प्रतीक है। महाशिवरात्रि को शिव और शक्ति के महामिलन रात्रि  मानी गयी है क्योकि इसी दिन शिव-पार्वती परिणय सूत्र में बंधे थे। ईशान संहिता में महाशिवरात्रि की इस प्रकार प्रतिपादित की गयी है –
शिवरात्रि व्रतं नाम सर्वपाप प्रणाशनं।
आचाण्डाल मनुष्याणं भुक्ति मुक्ति प्रदायकं।।   
 रामचरित मानस और महाभारत में भी शिव महिमा का वर्णन हुआ है। राम एक स्थान पर कहते है -शिव द्रोही मुझे स्वप्न  में भी प्रिय नहीं है। महाभारत में भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को  शिव का महात्मय बतलाया।

Hindi Hindustaniदेवादिदेव शिव देवताओं ,मानवों ,दैत्यों ,नागों ,किन्नरों ,गंधर्वों, पशु-पक्षी आदि  समस्त सचर -अचर के स्वामी है। शिव जहाँ एक ओर संहारक है ,वही दूसरी ओर  कल्याणकारी भी है।देवादिदेव शिव देह पर श्मशान की भस्म का लेप, नीलकंठ में सर्प माला ,मौली पर चंद्र ,वृषभ वहां पर सवार ,डमरू और त्रिशूल से सुशोभित रहते है। शीघ्र प्रसन्न हो जाने की विशेषता से आशुतोष कहलाते है। सत्यम ,शिवम् ,सुंदरम अर्ताथ शिव ही सुंदर  है ,शिव ही सत्य है ,शिव ही नित्य है। शिव पुराण के अनुसार सम्पूर्ण जगत बिंदु नाद स्वरुप है ,बिंदु शक्ति है और नाद ही शिव है। यह सम्पूर्ण जगत ही शिव-शक्ति है। सृष्टि के निर्माण में शिव ही परम है।शिव महापुराण के कोटि रूद्र संहिता के अनुसार बारह ज्योतोर्लिंग का उल्लेख हुआ है -सोमनाथ ,मल्लिकार्जुन ,महाकाल ,ओंकारनाथ ,केदारनाथ ,भीमशंकर ,विश्वनाथ ,तर्यंबक  ,वैद्यनाथ,नागेश ,रामेश्वर और घुमेश्वर। इनके इन स्वरूपों का स्मरण ही समस्त पापों का नाश करनेवाला बताया  गया है।भक्तों की भक्ति से शीघ्र प्रसन्न होनेवाले है –आशुतोष

काल रात्रि (दीपावली ) ,महारात्रि( शिवरात्रि)  और महोरात्रि(नवरात्र की अष्ठमी )अहोरात्रि (होली ) -इन चार  रात्रियों को विशेष रात्रि माना गया। फाल्गुन मास  की कृष्ण पक्ष की त्रयो दशी महाशिवरात्रि के रूप में मनाई जाती है।महाशिवरात्रि के व्रत से भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति और हितकारी माना गया है। महाशिवरात्रि का व्रत सकाम और निष्काम दोनों भावों से किया जा सकता है। वैसे भी व्रत-उपवास इन्द्रियों और मन को नियन्त्रित  कर विषय निवृति का माध्यम भी है। शास्त्रानुसार रात्रि के चारों प्रहर महाशिवरात्रि पूजन का विधान है। रात्रि जागरण का विशेष महत्व  है।यंत्र ,मन्त्र और तंत्र तीनों ही सिध्दि  साधनों को पूर्ण कर अभीष्ट फल देने वाली है -महाशिव रात्रि

पूजन विधि –
पूजन सामग्री –दूध ,दही , शहद ,शक्कर ,घी ,मौली ,यज्ञपवीत ,(जनेऊ)इत्र ,अक्षत (अखंडित चावल ),पुष्प /पुष्पमाला ,बिल्व पत्र ,कुमकुम ,अबीर ,गुलाल ,धूप ,नैवेद्य ,ऋतुफल

 

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पूर्व अथवा उत्तर अभिमुख होकर आसान ग्रहण करें।
पवित्रीकरण –
निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करे
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थाम गतोपि वा।
यः स्मरेत्पुण्डरीकांक्ष ,स बाह्याभ्यन्तरः शुचि: 
ॐ पुनातु पुण्डरीकांक्ष पुनातु पुण्डरीकांक्ष: पुनातु। 
स्वस्ति वाचन करें
स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवा
स्वस्ति न पूषा विश्ववेदा
                                                              स्वस्ति न स्तारक्ष्यो अरिष्टनेमि

संकल्प
 निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करे
ह्येतत -महाफलं 
निर्विघ्नमस्तु से छात्र ,त्वत प्रसादाज्ज्गत्पते 
इसके पश्चात् 
देव देव महादेव नीलकंठ नमोस्तु से कर्तुमिच्छाम्यहं देव शिवरात्रि व्रत 
तव तव प्रसादा द्वेवेश निर्विघ्नेन भवेदिति ,
कामाश शत्रवो मा वै पीड़ा कुर्वन्तु नैवहि
प्रार्थना करें –
हे देवादिदेव महादेव कोटि-कोटि प्रणाम …मै महाशिवरात्रि का व्रत करने की यथाशक्ति इच्छा रखता हूँ  …. आपके  शुभाशीष से व्रत निर्विघ्न पूर्ण हो … 
स्नान 
दूध,दही,घृत, शहद, शक्कर से क्रमशः स्नान कराये –
  निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करे
ॐ शं सद्योजाताय नमः दुग्ध स्नानं समर्पयामि

ॐ वं  वामदेवाय  नमःदधि  स्नानं समर्पयामि
 ॐ यं अघोराय  नमः घृत  स्नानं समर्पयामि
 ॐ नं तत्पुरुषाय  नमः मधु  स्नानं समर्पयामि
 ॐ  मं ईशानंद नमः शर्करा  स्नानं समर्पयामि
पंचामृत से स्नान के पश्चात् शुद्ध जल से स्नान कराये

वस्त्र –
  निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करे
 ॐ श्री सदा शिवाय नमः वस्त्रं  समर्पयामि समर्पित करें
यज्ञपवीतं (जनेऊ )
  निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करे
ॐ श्री सदा शिवाय नमः यज्ञ पवीतं समर्पयामि समर्पित करें 
गंध 
  निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करे
 ॐ श्री सदा शिवाय नमः गंधम विलेपयामि
अक्षत 
  निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करे
 ॐ श्री सदा शिवाय नमःअक्षतान समर्पयामि

 

पुष्प 
  निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करे
 ॐ श्री सदा शिवाय नमःपुष्पाणि  समर्पयामि
बिल्वपत्र 

पांच बिल्वपत्रों पर चन्दन लगाकर कुमकुम -अक्षत रखकर 

  निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करे

ॐ श्री सदा शिवाय नमःबिल्वपत्रम समर्पयामि 
 सौभाग्य द्रव्याणि (कुमकुम ,अबीर ,गुलाल )
  निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करे
 ॐ श्री सदा शिवाय नमःसौभाग्य द्रव्याणि समर्पयामि
धूप –

धूप प्रज्वलित कर धूप  दिखाते हुए इस मन्त्र का उच्चारण करे –
 ॐ श्री सदा शिवाय नमःधूपं आघ्नापयामि
दीप –
 इस मन्त्र का उच्चारण करते हुए दीप दिखाए
 ॐ श्री सदा शिवाय नमःदीपं दर्शयामि
नैवेद्यम 
  ॐ श्री सदा शिवाय नमःनैवेद्यम निवेदयामि

ताम्बूलपूगीफलनि
 ॐ श्री सदा शिवाय नमः ताम्बूलपूगीफलनि समर्पयामि
ऋतुफलं 
 ॐ श्री सदा शिवाय नमः ऋतुफलं  समर्पयामि
दक्षिणा 
 ॐ श्री सदा शिवाय नमः दक्षिणा  समर्पयामि
मन्त्र पुष्पांजलि 
ॐ श्री सदा शिवाय नमः मन्त्र पुष्पांजलि समर्पयामि

 

क्षमा प्रार्थना 
ॐ आवाहनं न जानामि ,नैव जानामि पूजनं
विसर्जन न जानामि ,क्षमस्व परमेश्वर
यद्क्षरपदभ्रष्ट मात्राहीनञ्च यद् भवेत्। तत्सर्व क्षम्यतां देव प्रसीद परमेश्वर।.
अनेन कृतेन अभिषेक कर्मणा श्री भवानीश शंकर महारुद्र :प्रियताम ,न मम

आरती 
 (कपूर से )
ॐ जय शिव ओंकारा ,स्वामी जय शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव ,अर्धांगी धारा
 ॐ जय शिव ओंकारा ,

एकानन चतुरानन पंचानन राजै
हंसानन गरुड़ासन वृष वाहन साजै
ॐ जय शिव ओंकारा ,

 दो भुज चार भुज दस भुज अति सोहै
तीनो रूप निरखते त्रिभुवन मन मोहे
ॐ जय शिव ओंकारा ,

अक्षमाला वनमाला मुंडमाला धारी
चन्दन मृगमद सौहे ,भोले शुभकारी
 ॐ जय शिव ओंकारा ,

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे
सनकादिक ब्रह्मादिक भूतादिक संगे
ॐ जय शिव ओंकारा ,

करके मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूलधर्ता
सुखकारी दुखहारी जगपालन कर्ता
ॐ जय शिव ओंकारा ,

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका
प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका
 ॐ जय शिव ओंकारा ,

त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावै
कहत शिवानंद स्वामी सुख सम्पति पावै
ॐ जय शिव ओंकारा ,
अंत में शाष्टांग प्रणाम करें

शिव है त्रि नेत्री ,  त्रि लोकी , त्रि काली,  त्रि गुणी ,  त्रि अग्नि,  त्रि रुपी ,  त्रि तापी, त्रि विध, त्रि वेदी, त्रि शूली        

 

 

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