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12cbse/hindi/antra /baarahmasa-malik mohammad jayasi/‘बारहमासा’ / मलिक मुहम्मद जायसी / सप्रसंग व्याख्या/MCQ

January 15, 2026
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प्रसंग :-प्रस्तुत पंक्तियाँ सूफी-काव्य परंपरा के महान कवि **मलिक मुहम्मद जायसी** द्वारा रचित महाकाव्य *‘पद्मावत’* के *‘बारहमासा’* प्रसंग से ली गई हैं। इस प्रसंग में कवि ने राजा रत्नसेन के वियोग में संतप्त उनकी पत्नी **रानी नागमती** की करुण और मार्मिक विरह-दशा का चित्रण किया है। ‘बारहमासा’ के अंतर्गत विभिन्न मासों के माध्यम से नायिका की बदलती मानसिक अवस्था को प्रस्तुत किया गया है। यह काव्यांश विशेष रूप से **अगहन मास** की विरह-वेदना को व्यक्त करता है।

व्याख्या :-इन पंक्तियों में कवि अगहन मास के आगमन के साथ विरहिणी नागमती की बढ़ती हुई पीड़ा का सजीव चित्र प्रस्तुत करता है। अगहन के महीने में जब दिन छोटे और रातें लंबी हो जाती हैं, तब नागमती की विरह-वेदना और अधिक तीव्र हो उठती है। वह यह समझ पाने में असमर्थ है कि अपने प्रिय पति के वियोग से उत्पन्न असह्य दुःख को किस प्रकार शांत करे। लंबी-लंबी रातें उसके लिए असहनीय हो जाती हैं।वियोग की तीव्रता के कारण अब उसे दिन भी रात के समान कष्टदायक प्रतीत होते हैं। वह दीपक की बत्ती की भाँति तिल-तिल जलती हुई अपने जीवन को क्षीण होते हुए अनुभव करती है। शीत ऋतु के प्रभाव से उसका हृदय काँपने लगता है, किंतु यह कंपकँपी केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक पीड़ा का भी प्रतीक है। नागमती को विश्वास है कि यह पीड़ा तभी शांत होगी, जब उसका प्रियतम उसके समीप होगा।

कवि आगे बताता है कि जहाँ अन्य घरों की स्त्रियाँ शरद ऋतु के अनुरूप नए-नए वस्त्र बनवा रही हैं, वहीं नागमती इस ओर ध्यान नहीं दे पा रही है। उसका मानना है कि उसके रूप और रंग को तो उसके पति अपने साथ ही ले गए हैं। वह बार-बार यही सोचती है कि उसके पति किसी अशुभ घड़ी में गए थे, तभी एक बार जाने के बाद लौटकर नहीं आए। उसे आशा है कि यदि वे लौट आएँ, तो उसके जीवन में पुनः सुख और सौंदर्य के दिन लौट आएँगे।विरह की अवस्था में शीत ऋतु आग के समान बनकर नागमती के अंतर्मन को निरंतर जलाती रहती है। वह विरहाग्नि में सुलग-सुलगकर मानो राख हो चुकी है। उसके मन में यह टीस गहरी होती जा रही है कि उसका प्रियतम उसकी इस पीड़ा से सर्वथा अनभिज्ञ है और इसी अज्ञानता के कारण उसका यौवन और जीवन दोनों नष्ट होते जा रहे हैं।

अंततः नागमती भँवरों और कौओं को संबोधित करते हुए उनसे करुण निवेदन करती है कि वे उसके प्रियतम के पास जाकर यह संदेश पहुँचा दें कि उनकी प्रियतमा वियोग की अग्नि में जल-जलकर मर चुकी है और उसी अग्नि के धुएँ के कारण उनके शरीर काले पड़ गए हैं। इस प्रकार कवि ने नागमती की विरह-वेदना को अत्यंत मार्मिक और हृदयस्पर्शी रूप में प्रस्तुत किया है।

विशेष :-

* इस काव्यांश में **विरह-वेदना और करुण भाव** की सशक्त अभिव्यक्ति हुई है।

* भाषा **अवधी** है, जिसका प्रयोग स्वाभाविक, प्रवाहपूर्ण और भावानुकूल है।

* **विरोधाभास, उत्प्रेक्षा, अनुप्रास और पुनरुक्तिप्रकाश** अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है।

* **स्वरमैत्री** के कारण काव्य में लयात्मकता और संगीतात्मकता उत्पन्न हुई है।

* ‘दीपक की बत्ती’, ‘शीत का आग बन जाना’ जैसे बिंब विरह की तीव्रता को प्रभावशाली बनाते हैं।

**प्रश्न 1.** यह काव्यांश किस कृति के ‘बारहमासा’ प्रसंग से लिया गया है?

(क) रामचरितमानस

(ख) पद्मावत

(ग) गीतावली

(घ) कवितावली

**सही उत्तर :** (ख) पद्मावत

**प्रश्न 2.** अगहन मास में नागमती की पीड़ा बढ़ने का मुख्य कारण क्या है?

(क) वर्षा ऋतु का आगमन

(ख) उत्सवों की अधिकता

(ग) दिन छोटे और रातें लंबी होना

(घ) समाज का उपेक्षाभाव

**सही उत्तर :** (ग) दिन छोटे और रातें लंबी होना

**प्रश्न 3.** नागमती स्वयं को ‘दीपक की बत्ती’ के समान क्यों मानती है?

(क) प्रकाश फैलाने के कारण

(ख) धीरे-धीरे तिल-तिल जलने के कारण

(ग) अंधकार दूर करने के कारण

(घ) शीत से बचने के कारण

**सही उत्तर :** (ख) धीरे-धीरे तिल-तिल जलने के कारण

**प्रश्न 4.** नागमती नए वस्त्र क्यों नहीं बनवाती है?

(क) निर्धनता के कारण

(ख) ऋतु से अरुचि के कारण

(ग) क्योंकि उसका रूप-रंग प्रियतम के साथ चला गया है

(घ) सामाजिक निषेध के कारण

**सही उत्तर :** (ग) क्योंकि उसका रूप-रंग प्रियतम के साथ चला गया है

**प्रश्न 5.** नागमती भँवरों और कौओं से क्या संदेश भिजवाना चाहती है?

(क) प्रियतम को शीघ्र लौट आने का

(ख) अपने सौंदर्य के क्षय का

(ग) अपने विरहाग्नि में जलकर मर जाने का

(घ) ऋतु परिवर्तन की सूचना का

**सही उत्तर :** (ग) अपने विरहाग्नि में जलकर मर जाने का

व्याख्या –

प्रसंग :-प्रस्तुत पंक्तियाँ सूफ़ी काव्यधारा के महत्त्वपूर्ण कवि **मलिक मुहम्मद जायसी** द्वारा रचित महाकाव्य *‘पद्मावत’* के *‘बारहमासा’* प्रसंग से ली गई हैं। इस प्रसंग में कवि ने राजा **रत्नसेन** के वियोग में संतप्त उनकी पत्नी **रानी नागमती** की मासानुसार बदलती हुई मानसिक अवस्था का करुण चित्रण किया है। प्रस्तुत काव्यांश में विशेष रूप से **पूस मास** में नागमती की तीव्र विरह-वेदना का वर्णन है।

व्याख्या :-इन पंक्तियों में कवि पूस के महीने में नागमती की विरह-संतप्त दशा का अत्यंत मार्मिक वर्णन करता है। पूस मास में शीत इतना बढ़ गया है कि समस्त नर-नारी थर-थर काँपने लगे हैं। यहाँ तक कि सूर्य भी मानो ठंड से पीड़ित होकर उत्तर दिशा को छोड़कर दक्षिण की ओर तापने चला गया है। इस तीव्र शीत के साथ-साथ नागमती की विरह-व्यथा और अधिक बढ़ जाती है और उसे यह ठंड प्राणघातक प्रतीत होने लगती है।

प्रियतम के स्मरण में डूबी नागमती सोचती है कि उनके अभाव में वह काँप-काँपकर मरती जा रही है और यह जाड़ा तभी शांत होगा, जब उसका जीवन ही समाप्त हो जाएगा। वह व्याकुल होकर कह उठती है—हे प्रियतम! आप कहाँ हैं? यदि आप यहाँ होते, तो मैं आपके गले लगकर इस मारक शीत से मुक्ति पा लेती। किंतु प्रियतम से उसकी दूरी इतनी अधिक है कि उसे यह भी समझ में नहीं आता कि वह उन्हें कहाँ जाकर ढूँढ़े।

नागमती को अनुभव होता है कि चाहे वह कितनी ही रजाइयाँ ओढ़ ले, फिर भी ठंड कम नहीं होती। उसकी शैया उसे इतनी शीतल प्रतीत होती है, मानो उसे बर्फ में डुबो दिया गया हो। वह स्वयं की तुलना चकई पक्षी से करते हुए कहती है कि चकई तो सौभाग्यशाली है, जो रात्रि में बिछुड़कर भी प्रातःकाल अपने प्रिय से मिल जाती है, जबकि वह दिन-रात प्रियतम के वियोग में कोयल की भाँति तड़पती रहती है।

रात्रि में वह पूर्णतः अकेली रह जाती है; उसके पास कोई सखी तक नहीं होती। ऐसी स्थिति में वह स्वयं को एक असहाय वियोगिनी पक्षी मानती है। उसे प्रतीत होता है कि विरह-रूपी भयंकर बाज उसके चारों ओर मंडरा रहा है, जो उसे जीवित ही निगल लेना चाहता है और मृत्यु के बाद भी उसे नहीं छोड़ेगा।

अंत में नागमती सारस-सारसी के अटूट प्रेम का स्मरण करते हुए प्रियतम से विनती करती है कि हे प्राणनाथ! मेरे शरीर का सारा रक्त सूख चुका है, मांस गल गया है और मेरी हड्डियाँ शंख के समान निष्प्राण हो गई हैं। मैं आपकी पत्नी सारसी की भाँति आपका नाम जपते-जपते मर रही हूँ। आप पर इतना अनुग्रह अवश्य हो कि मेरी मृत्यु के बाद मेरे पंखों को समेट लीजिएगा। इस प्रकार पूस मास में नागमती की करुण विरह-वेदना अपने चरम पर पहुँच जाती है।

विशेष :-

* पूस मास में **नागमती की विरह-वेदना और करुणा** का अत्यंत मार्मिक चित्रण हुआ है।

* भाषा **अवधी** है, जो सहज, स्वाभाविक और भावानुकूल है।

* **उत्प्रेक्षा, रूपक, अनुप्रास और पुनरुक्तिप्रकाश** अलंकारों का प्रभावी प्रयोग हुआ है।

* करुण रस की प्रधानता है।

* **स्वरमैत्री** के कारण काव्य में लयात्मकता और संगीतात्मकता उत्पन्न हुई है।

* पक्षी-बिंब (चकई, कोयल, सारस-सारसी) विरह की तीव्रता को गहराई प्रदान करते हैं।

**प्रश्न 1.** यह काव्यांश *पद्मावत* के किस प्रसंग से लिया गया है?

(क) नागमती-वर्णन

(ख) युद्ध-प्रसंग

(ग) बारहमासा

(घ) पद्मिनी-विवाह

**सही उत्तर :** (ग) बारहमासा

**प्रश्न 2.** प्रस्तुत काव्यांश में किस मास की विरह-दशा का वर्णन है?

(क) अगहन

(ख) पूस

(ग) माघ

(घ) फाल्गुन

**सही उत्तर :** (ख) पूस

**प्रश्न 3.** पूस मास में नागमती को शीत क्यों अधिक भयानक प्रतीत होता है?

(क) क्योंकि वह बीमार है

(ख) क्योंकि वह अकेली है

(ग) क्योंकि वह प्रियतम के वियोग में है

(घ) क्योंकि उसके पास वस्त्र नहीं हैं

**सही उत्तर :** (ग) क्योंकि वह प्रियतम के वियोग में है

**प्रश्न 4.** नागमती स्वयं की तुलना किन पक्षियों से करती है?

(क) हंस और कबूतर

(ख) चकई, कोयल और सारसी

(ग) मोर और तोता

(घ) कौआ और भँवरा

**सही उत्तर :** (ख) चकई, कोयल और सारसी

**प्रश्न 5.** इस काव्यांश में प्रधान रस कौन-सा है?

(क) श्रृंगार रस

(ख) वीर रस

(ग) करुण रस

(घ) शांत रस

**सही उत्तर :** (ग) करुण रस

व्याख्या –

**प्रश्न 1.** यह काव्यांश *पद्मावत* के किस प्रसंग से लिया गया है?

(क) युद्ध-प्रसंग

(ख) नागमती-वर्णन

(ग) बारहमासा

(घ) विवाह-प्रसंग

**सही उत्तर :** (ग) बारहमासा

**प्रश्न 2.** प्रस्तुत काव्यांश में किस मास की विरह-दशा का वर्णन किया गया है?

(क) अगहन

(ख) पूस

(ग) माघ

(घ) फाल्गुन

**सही उत्तर :** (ग) माघ

**प्रश्न 3.** माघ मास में नागमती को ठंड अधिक कष्टदायक क्यों लगती है?

(क) क्योंकि वह बीमार है

(ख) क्योंकि वह निर्धन है

(ग) क्योंकि वह प्रियतम के वियोग में है

(घ) क्योंकि उसके पास वस्त्र नहीं हैं

**सही उत्तर :** (ग) क्योंकि वह प्रियतम के वियोग में है

**प्रश्न 4.** नागमती प्रियतम को ‘सूर्य’ के समान क्यों मानती है?

(क) उनके तेज के कारण

(ख) उनके राज्य के कारण

(ग) क्योंकि वे शीत दूर कर सकते हैं

(घ) क्योंकि वे प्रकाश फैलाते हैं

**सही उत्तर :** (ग) क्योंकि वे शीत दूर कर सकते हैं

**प्रश्न 5.** इस काव्यांश में नागमती का यौवन किस प्रतीक से व्यक्त हुआ है?

(क) तिनका

(ख) हार

(ग) यौवन-रूपी पुष्प

(घ) शैया

**सही उत्तर :** (ग) यौवन-रूपी पुष्प

**प्रश्न 1.** यह काव्यांश *पद्मावत* के किस प्रसंग से लिया गया है?

(क) युद्ध-प्रसंग

(ख) नागमती-विरह

(ग) बारहमासा

(घ) पद्मिनी-विवाह

**सही उत्तर :** (ग) बारहमासा

**प्रश्न 2.** प्रस्तुत काव्यांश में किस मास की विरह-दशा का वर्णन है?

(क) माघ

(ख) फाल्गुन

(ग) चैत्र

(घ) अगहन

**सही उत्तर :** (ख) फाल्गुन

**प्रश्न 3.** फागुन में नागमती के शरीर की कांति कैसी हो गई है?

(क) पुष्प के समान

(ख) स्वर्ण के समान

(ग) पीले पत्ते के समान

(घ) अग्नि के समान

**सही उत्तर :** (ग) पीले पत्ते के समान

**प्रश्न 4.** सखियों को फाग मनाते देखकर नागमती के मन में क्या भाव उत्पन्न होता है?

(क) हर्ष

(ख) ईर्ष्या

(ग) विरह की आग और तीव्र हो जाना

(घ) शांति

**सही उत्तर :** (ग) विरह की आग और तीव्र हो जाना

**प्रश्न 5.** नागमती की अंतिम अभिलाषा क्या है?

(क) प्रियतम को संदेश भेजना

(ख) सखियों के साथ फाग मनाना

(ग) राख बनकर प्रियतम के चरण-मार्ग में पड़ना

(घ) वसंत का स्वागत करना

**सही उत्तर :** (ग) राख बनकर प्रियतम के चरण-मार्ग में पड़ना

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