12 up board hindi,hum aur hamara aadarsh,

12 up board hindi,hum aur hamara aadarsh,apj abdul kalaam
हम और हमारा आदर्श,डॉ. अब्दुल कलाम
हम और हमारा आदर्श ,डॉ. अब्दुल कलाम
संकेत-1 मैं खास तौर से ………………………… नागरिक कैसे बन सकेंगे
मैं खासतौर से युवा छात्रों से ही क्यों मिलता हूँ? इस सवाल का जवाब तलाशते हुए मैं अपने छात्र जीवन के दिनों के बारे में सोचने लगा। रामेश्वरम् के द्वीप से बाहर निकलकर यह कितनी लंबी यात्रा रही। पीछे मुड़कर देखता हूँ तो विश्वास नहीं होता। आखिर वह क्या था जिसके कारण यह संभव हो सका? महत्त्वाकांक्षा? कई बातें मेरे दिमाग में आती हैं। मेरा ख्याल है कि सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह रही कि मैंने अपने योगदान के मुताबिक ही अपना मूल्य आँका। बुनियादी बात जो आपको समझनी चाहिए वह यह है कि आप जीवन की अच्छी चीजों को पाने का हक रखते हैं, उनका जो ईश्वर की दी हुई हैं। जब तक हमारे विद्यार्थियों और युवाओं को यह भरोसा नहीं होगा कि वे विकसित भारत के नागरिक बनने के योग्य हैं तब तक वे जिम्मेदार और ज्ञानवान् नागरिक भी कैसे बन सकेंगे।
प्रश्न-1 महत्त्वाकांक्षा के सम्बन्ध में कलाम साहब ने क्या कहा?
उत्तर महत्त्वाकांक्षा के सम्बन्ध में कलाम साहब का मानना था कि महत्त्वाकांक्षा से सब कुछ संभव है।
प्रश्न-2 कलाम साहब ने छात्रों को कौनसी बुनियादी बात समझने की सलाह दी है?
उत्तर कलाम साहब ने यह बुनियादी बात समझने की सलाह दी कि हर मनुष्य जीवन की अच्छी चीजें पाने का हक रखता है, जो ईश्वर प्रदत्त है
प्रश्न-3 कलाम साहब के अनुसार जिम्मेदार और ज्ञानवान नागरिक कैसे बन सकेंगे ?
उत्तर जब विद्यार्थियों और युवाओं को यह भरोसा होगा कि वे विकसित भारत के नागरिक बनने के योग्य है, तभी वह जिम्मेदार और ज्ञानवान नागरिक बन सकेंगे।
प्रश्न-4 कलाम साहब ने अपना मूल्य कैसे आँका?
उत्तर कलाम साहब ने अपना मूल्य अपने योगदान के मुताबिक आँका।
प्रश्न-5 पाठ और पाठ के लेखक का नाम बतलाइए।
उत्तर पाठ का नाम है – हम और हमारा आदर्श और लेखक है – डॉ. अब्दुल कलाम
12 up board hindi,hum aur hamara aadarsh,apj abdul kalaam,हम और हमारा आदर्श,डॉ. अब्दुल कलाम
संकेत-2 ;पद्ध विकसित देशों की ………………आकांक्षाओं के अनुरूप ढ़ल गई ।
विकसित देशों की समृद्धि के पीछे कोई रहस्य नहीं छिपा है। ऐतिहासिक तथ्य बस इतना है कि इन राष्ट्रों – जिन्हें जी-8 के नाम से पुकारा जाता है – के लोगों ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस विश्वास को पुख्ता किया कि मजबूत और समृद्ध देश में उन्हें अच्छा जीवन बिताना है। तब सच्चाई उनकी आकांक्षाओं के अनुरूप ढल गई।
;पपद्ध मैं यह नहीं मानता ……………………….. यकीन से भी परे।
मैं यह नहीं मानता कि समृद्धि और अध्यात्म एक-दूसरे के विरोधी हैं या भौतिक वस्तुओं की इच्छा रखना कोई गलत सोच है। उदाहरण के तौर पर, मैं खुद न्यूनतम वस्तुओं का भोग करते हुए जीवन बिता रहा हूँ, लेकिन मैं सर्वत्र समृद्धि की कद्र करता हूँ, क्यांेकि समृद्धि अपने साथ सुरक्षा तथा विश्वास लाती है, जो अंततः हमारी आजादी को बनाए रखने में सहायक हैं। आप अपने आस-पास देखंेगे तो पाएँगे कि खुद प्रकृति भी कोई काम आधे-अधूरे मन से नहीं करती। किसी बगीचे में जाइए। मौसम में आपको फूलों की बहरा देखने को मिलेगी अथवा ऊपर की तरफ ही देखें, यह ब्रह्याण्ड आपको अनंत तक फैला दिखाई देगा, आपके यकीन से भी परे।
प्रश्न-1 कलाम साहब ने विकसित देशों की समृद्धि का क्या कारण बतलाया ?
अथवा
सच्चाई आकांक्षाओं के अनुकूल कैसे ढल सकती है।
उत्तर विकसित देशों की समृद्धि के पीछे कारण यह रहा कि वहाँ के लोगों ने इस विश्वास को पुख्ता किया कि मजबूत और समृद्ध देश में उन्हे अच्छा जीवन बिताना है, तब सच्चाई उनकी आकांक्षाओं के अनुरूप ढल गई।
प्रश्न-2 कलाम साहब ने समृद्धि और अध्यात्म के संबंध में क्या कहा ?
उत्तर समृद्धि और अध्यात्म के संबंध में कलाम साहब का मानना था कि समृद्धि एवं अध्यात्म एक दूसरे के विरोधी नहीं है अर्थात् भौतिक वस्तुओं की इच्छा रखना कोई गलत सोच नहीं है।
प्रश्न-3 कलाम साहब समृद्धि की कद्र क्यों करते थे?
उत्तर कलाम साहब समृद्धि की कद्र इसलिये करते थे क्योंकि उनका मानना था कि समृद्धि अपने साथ सुरक्षा तथा विश्वास लाती है, जो हमारी आजादी को बनाए रखने में सहायक है।
प्रश्न-4 प्रकृति भी कोई भी काम आधे अधूरे मन से नही करती, यह कहकर कलाम साहब ने क्या सन्देश देना चाहा है?
उत्तर कलाम साहब का आशय है कि मनुष्य को अपना कार्य पूरे मनोयोग लगन एवं तत्परता से करना चाहिए ठीक वैसे ही जैसे प्रकृति अपना कार्य पूरे मन से करती है।
प्रश्न-5 पाठ और पाठ के लेखक का नाम बतलाइए।
उत्तर पाठ का नाम है – हम और हमारा आदर्श और लेखक है – डॉ. अब्दुल कलाम
12 up board hindi,hum aur hamara aadarsh,apj abdul kalaam,हम और हमारा आदर्श,डॉ. अब्दुल कलाम
संकेत-3 जो कुछ भी हम ………………………… आध्यात्मिक बात नहीं।
जो कुछ भी हम इस संसार में देखते हैं वह ऊर्जा का ही स्वरूप है। जैसा कि महर्षि अरविंद ने कहा है कि हम भी ऊर्जा के ही अंश है। इसलिए जब हमने यह जान लिया है कि आत्मा और पदार्थ दोनों ही अस्तित्व का हिस्सा हैं, वे एक-दूसरे से पूरा तादात्म्य रखे हुए हैं तो हमें यह एहसास भी होगा कि भौतिक पदार्थांे की इच्छा रखना किसी भी दृष्टिकोण से शर्मनाक या गैर-आध्यात्मिक बात नहीं है।
प्रश्न-1 कलाम साहब ने महर्षि अरविन्द की किस बात का समर्थन किया ?
उत्तर कलाम साहब ने महर्षि अरविन्द की इस बात का समर्थन किया कि संसार में जो कुछ भी है, वह ऊर्जा का ही स्वरूप है और हम ऊर्जा के ही अंश है।
प्रश्न-2 आत्मा और पदार्थ के संबंध में कलाम साहब ने क्या कहा ?
उत्तर कलाम साहब का मानना है कि आत्मा और पदार्थ दोनों ही अस्तित्व का हिस्सा है, वे एक दूसरे से तादात्म्य रखे हुए है।
प्रश्न-3 भौतिक पदार्थ की इच्छा रखने के संबंध में कलाम साहब ने क्या कहा?
उत्तर कलाम साहब के अनुसार आत्मा एवं पदार्थ में तादात्म्य होने के कारण भौतिक पदार्थों की इच्छा रखना न तो शर्मनाक है और न गैर आध्यात्मिक।
प्रश्न-4 पाठ और पाठ के लेखक का नाम बतलाइए।
उत्तर पाठ का नाम है – हम और हमारा आदर्श और लेखक है – डॉ. अब्दुल कलाम
12 up board hindi,hum aur hamara aadarsh,apj abdul kalaam,
हम और हमारा आदर्श,डॉ. अब्दुल कलाम
संकेत-4 इसके बावजूद अकसर ………………………… प्रसार कर सकेंगे।
इसके बावजूद अकसर हमें यही विश्वास दिलाया जाता है। न्यूनतम में गुजारा करने और जीवन बिताने में भी निश्चित रूप से कोई हर्ज नहीं है। महात्मा गाँधी ने ऐसा ही जीवन जिया था, लेकिन जैसा के उनके साथ था, आपके मामले में भी यह आपकी पसंद पर निर्भर करता है। आपकी ऐसी जीवन-शैली इसलिए है क्योंकि इससे वे तमाम जरूरतें पूरी होती हैं जो आपके भीतर की गहराइयों से उपजी होती हैं। लेकिन त्याग की प्रतिमूर्ति बनना और जोर-जबरदस्ती से चुनना-सहने का गुणगान करना-अलग बातें हैं। हमारी युवा शक्ति से सम्पर्क कायम करने के मेरे फैसले का आधार भी यही रहा है। उनके सपनों को जानना और उन्हें बताना आप जो कुछ भी करें वह आपके हृदय से किया गया हो, अपनी आत्मा को अभिव्यक्ति दें और इस तरह आप अपने आस-पास प्यार तथा खुशियों का प्रसार कर सकेंगे।
प्रश्न-1 कलाम साहब ने किस बात में हर्ज नहीं माना? इसके लिए उन्होंने किसका उदाहरण दिया?
उत्तर कलाम साहब के अनुसार न्यूनतम में गुजारा करने और जीवन बीताने में भी कोई हर्ज नहीं, इसके लिए कलाम साहब ने गाँधीजी और स्वयं के जीवन का उदाहरण दिया।
प्रश्न-2 कलाम साहब ने युवाओं से मिलने का क्या उद्धेश्य बतलाया?
उत्तर कलाम साहब ने युवाओं से मिलने का उद्धेश्य यह बतलाया कि वे उनके सपनों को जान सके और उन्हे बता सके कि अच्छे भरे पूरे और सुख सुविधा से पूर्ण जीवन के सपने देखना तथा उस स्वर्णिम युग के लिए काम करना सही है।
प्रश्न-3 कलाम साहब के अनुसार प्यार और खुशियों का प्रसार कैसें किया जा सकता है?
उत्तर कलाम साहब के अनुसार आप जो कुछ भी करे वह आपके हृदय से किया गया हो। हम अपनी आत्मा को अभिव्यक्ति करें, इस तरह हम प्यार और खुशियों का प्रसार कर सकेंगे
प्रश्न-4 किस प्रकार का जीवन व्यतीत करना है, यह किस बात पर निर्भर है?
उत्तर किस प्रकार जीवन जीना है, यह मनुष्य की पसन्द पर निर्भर करता है। आपकी जीवन शैली जैसी है वह इसलिए है कि वो हमारे भीतर उपजी जरूरतों को पूरा करती है।
प्रश्न-5 कलाम साहब ने किन दो बातों को अलग-अलग बतलाया?
उत्तर कलाम साहब के अनुसार त्याग की मूर्ति बनना और जोर जबरदस्ती से चुनने-सहने का गुण गान करना अलग-अलग बातें है।
प्रश्न-6 पाठ और पाठ के लेखक का नाम बतलाइए।
उत्तर पाठ का नाम है – हम और हमारा आदर्श और लेखक है – डॉ. अब्दुल कलाम





No Comments