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October 11, 2022
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पतंग,आलोक धन्वा,प्रश्न-उत्तर

आलोक धन्वा ,पतंग

प्रश्न – शरद ऋतु के  आगमन कैसे कवि ने किस रूप में चित्रित किया है ?

उत्तर –  शरद ऋतु जैसे किसी बच्चे के समान अपनी नयी चमकीली साइकिल को तेज चलाते हुए पुलों को पार करते हुए आ रहा है । वह अपनी नई साइकिल की घंटी जोर-जोर से बजाकर पतंग उड़ाने वाले बच्चों को इशारों से बुला रहा है।

प्रश्न-पतंग  को  कवि ने किन –किन उपमानों से उपमित किया  हैं?

उत्तर –कवि ने पतंग को  संसार की सबसे हलकी, रंगीन  व पतले  कागज और बाँस की पतली कमानी से उपमित किया है ।

प्रश्न-  पतंग उड़ाते बच्चों को कवि ने किस रूप में चित्रित किया है ?

उत्तर – कवि ने बच्चों को बेहताशा भागते-दौड़ते ,छतों पर पतंग उड़ाते ,दौड़ते  ,शरीर को पेड़ की डालियों की तरह झुकाते ,चोट लगाने से  बेपरवाह और गिरने पर चोट लगाने से बचने पर अति उत्साहित होकर दौड़ते हुए चित्रित किया है .

 प्रश्न – पृथ्वी बच्चों के बैचेन पैरों के पास कैसे आती हैं?

उत्तर –  पृथ्वी बच्चों के बेचैन पैरों के पास घूमती हुई  आती है.

प्रश्न- छतों को नरम बनाने से कवि का क्या आशय हैं?

उत्तर – छतों को नरम बनाने से कवि का आशय यह है कि बच्चे कठोरछत पर ऐसे  दौड़ते

 मानो किसी  मुलायम स्थान पर दौड़ रहे हों अर्थात छत कठोर न होकर उनके पैरों की तरह ही कोमल हो .

प्रश्न-  सुनहले सूरज के सामने आने से कवि का क्या आशय हैं?

उत्तर –  सुनहले सूरज  के सामने आने से कवि का  आशय है यह कि पतंग उड़ाते हुए यें बच्चे गिर जाए और इन्हें  चोट न लगे तो यें बच्चें और भी अधिक उत्साहित हो जाते है और इनका  चेहरा ऐसे चमकने लगता है जैसे सूरज के सामने आ गए हो

 प्रश्न- पैरों को बेचैन कहने से कवि का क्या आशय है ?

उत्तर – पैरों को बेचैन इसलिए कहा गया है क्योंकि यें बच्चे इतनी तेज़ गति से भागते है ,जैसे इनके पैर एक स्थान पर स्थिर रहना नहीं चाहते .

प्रश्न – ‘पतगों के साथ-साथ वे भी उड़ रहे हैं”-इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – (घ) ‘पतंगों के साथ-साथ वे भी उड़ रहे हैं’ का आशय है बच्चे पतंगों की तरह डोर से बंधकर आकाश की उचाईयों तक उड जाना चाहते हो ।

प्रश्न- शरद का उदित होता सूर्य कैसा जान पड़ता है ?

उत्तर- शरद का उदित होता सूर्य खरगोश की आँखों जैसा लाल-लाल दिखाई देता है।

प्रश्न:जन्म से ही वे अपने साथ लाते हैं कपास – से कवि का क्या आशय है

उत्तर – कवि ने बच्चों के शरीर की तुलना कपास से करते हुए कहा कि जैसे यें बच्चें जन्म से अपने शरीर में कपास लेकर पैदा हुए हो .जैसे कपास पर प्रहार करने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं होती वैसे ही  यें बच्चें पतंग उड़ाते हुए गिर जाए तो चोट लगाने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं करते.

प्रश्न :पतगों के साथ-साथ वे भी उड़ रहे हैं- उक्त पंक्ति में निहित भाव स्पष्ट कीजिये  ?

उत्तर –आकाश में उड़ती हुई पतंग बच्चों की बाल कल्पना  का  परिचायक  है। जब पतंग आकाश उड़ती है तोपतंगों के साथ –साथ  बच्चों का मन भी उड़ता रहता है।

प्रश्न- छतों को भी नरम बनाते हुए

दिशाओं की मृदंग की तरह बजाते हुए

उक्त पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिये

उत्तर- बच्चें छतों पर ऐसे दौड़ते है जैसे बच्चों ने दौड़-दौड़कर कठोर छतों को भी अपने पैरों को कोमल बना दिया है .छतों पर भागते-दौड़ते बच्चों की पग-ध्वनि से वातावरण ऐसा हो जाता है जैसे चारों ओर में मृदंग बज रहे हो .

प्रश्न-  और बच जाते हैं तब तो

और भी निडर होकर सुनहले सूरज के सामने आते हैं।

उक्त पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिये

दिशाओं को मृदंग की तरह बजाने का क्या तात्पर्य हैं?

उत्तर –खतरनाक स्थिति का सामना करने के बाद ये बच्चें  जैसे और भी नई  चुनौतियों का सामना करने  में स्वयं को सक्षम मानने लगते  हैं। इनमें और भी साहस व निडरता का भाव आ जाता है।  भय को दूर हो जाता  हैं।

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