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Bihar board class 12 ,hindi book solution,pyare nanhe bete ko,vinod kumar shukla,प्यारे नन्हें बेटे को,विनोद कुमार शुक्ल

November 12, 2022
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प्यारे नन्हें बेटे को,विनोद कुमार शुक्ल

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विनोद कुमार शुक्ल

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अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न .रघुवीर सहाय स्मृति पुरस्कार विनोद कुमार शुक्ल को 1992 ई. मे मिला

प्रश्न .विनोद कुमार शुक्ल को साहित्य अकादमी पुरस्कार 1999 ई. में मिला

प्रश्न .“प्यारे नन्हें बेटे को’ कविता में लोहा मेहनत  का प्रतीक है

प्रश्न .‘प्यारे नन्हें बेटे को’ कविता वार्तालाप शैली में लिखी गई है

प्रश्न .विनोद कुमार शुक्ल निराला सृजन पीठ में जून 1994 से जून 1996 तक अतिथि साहित्यकार के पद पर रहे

प्रश्न 1.‘बिटिया’ से क्या सवाल किया गया है

उत्तर- पिता द्वारा बिटिया से  सवाल किया गया है कि  आसपास लोहा कहाँ है।

प्रश्न .“बिटिया’ कहाँ- कहाँ लोहा पहचान पाती है

उत्तर-बिटिया ने दैनिक जीवन में काम में आनेवाली वस्तुएं यथा – चिमटा, करछुल, अँगीठी, सँडासी, दरवाजे की साँकल आदि में  लोहे को पहचानती है।

प्रश्न –लोहा क्या है ?इसकी खोज क्यों की जा रही है ?

उत्तर- कवि यह तलाशना चाहता है कि मानव समाज में भी लोहा अर्थात परिश्रमी लोग कहाँ –कहाँ है .दैनिक व्यवहार में लोहा एक धातु है ,जो कठोर और मज़बूत होता है ,जिससे फावड़ा, कुदाली, टॅगिया, बसूला, खुरपी, बैलगाड़ी के पहिए पर चढ़ा पट्टा, बैलों के गले में बँधी घंटी के अन्दर की गोली, बाल्टी, कुएँ की घिरनी, छाते की डंडी, उसके पुर्जे, हँसिया और चाकू इत्यादि वस्तुएं बनाई जाती हैं,किन्तु कवि उन सब मनुष्यों को भी लोहा मानता है जो लोहे की तरह ही कठोरता , मज़बूती और दृढ़ता से संघर्षपूर्ण  परिश्रम करते हुए जीवन से जूझ रहे है .

प्रश्न .“इस घटना से उस घटना तक” यहाँ किन घटनाओं की चर्चा है

उत्तर-.“इस घटना से उस घटना तक”का काव्यार्थ है वर्त्तमान से लेकर भविष्य तक .वर्त्तमान में  ही भविष्य छुपा होता है जैसे कविता में पिता बिटिया से लोहा के बारे में पूछता है और फिर लोहे के गूढ़ अर्थ को समझाते है, फिर  अनायास कवि भविष्य में चला जाता है  ,कल्पना करता  है किउसकी बिटिया बड़ी हो गई है, वह बिटिया के विवाह के लिए एक प्यारे से  सा दूल्हे के बारे में  सोचने लगता है। कवि वर्त्तमान में  भविष्य की कल्पना करने लगता है .

प्रश्न .मेहनतकश आदमी और दबी सतायी बोझ उठाने वाली औरत में कवि द्वारा लोहे की खोज का क्या आशय है ?

उत्तर- दैनिक व्यवहार में लोहा एक धातु है ,जो कठोर और मज़बूत होता है ,जिससे फावड़ा, कुदाली, टॅगिया, बसूला, खुरपी, बैलगाड़ी के पहिए पर चढ़ा पट्टा, बैलों के गले में बँधी घंटी के अन्दर की गोली, बाल्टी, कुएँ की घिरनी, छाते की डंडी, उसके पुर्जे, हँसिया और चाकू इत्यादि वस्तुएं बनाई जाती हैं,किन्तु कवि मेहनतकश आदमी और दबी सतायी बोझ उठाने वाली औरत को भी लोहा मानता है जो लोहे की तरह ही कठोरता , मज़बूती और दृढ़ता से संघर्षपूर्ण जीवन को  परिश्रम करते हुए जी रहे है .

प्रश्न-मेहनतकश  आदमी और दबी सताई बोझ उठानेवाली औरत में कवि द्वारा लोहे की खोज का क्या आशय है ?

उत्तर- लोहा पहले धरती के गर्भ में दबे होने की  यातना सहता हैं फिर धरती के गर्भ बाहर आकरआग में  तपता है ,गलता है ,ढलता है और फिर आकार पाता है। कवि मेहनतकश आदमी और दबी सतायी, बोझ उठानेवाली औरत के जीवन को लोहे के समान मानता  है। कवि को लोहे और मेहनतकश आदमी और दबी सतायी, बोझ उठानेवाली औरत में  साम्य  बोध होता है।

प्रश्न .बिटिया को पिता ‘सिखलाते हैं तो माँ ‘समझाती’ है, ऐसा क्यों

उत्तर- बिटिया को पिता ‘सिखलाते हैं तो माँ ‘समझाती’ है ,ऐसा इसलिए कि जो आज बच्चा है ,कल  बड़ा होकर उसे पारिवारिक और सामाजिक  दायित्व का निर्वहन करना होगा ,बच्चें का भविष्य तैयार करने में माता-पिता की भूमिका सामान्तर होती है .जैसा कि कविता में पहले पिता लोहा के बारे  में बिटिया को सिखलाते हैं ,सिखलाने में जो कुछ छूट गया माँ उसे समझकर पूर्ण कर देती है .पिता की सीख व्यावहारिक होती है और माँ की सीख भावनात्मक होती है .

11 प्यारे नन्हें बेटे को

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न .रघुवीर सहाय स्मृति पुरस्कार विनोद कुमार शुक्ल को 1992 ई. मे मिला

प्रश्न .विनोद कुमार शुक्ल को साहित्य अकादमी पुरस्कार 1999 ई. में मिला

प्रश्न .“प्यारे नन्हें बेटे को’ कविता में लोहा मेहनत  का प्रतीक है

प्रश्न .‘प्यारे नन्हें बेटे को’ कविता वार्तालाप शैली में लिखी गई है

प्रश्न .विनोद कुमार शुक्ल निराला सृजन पीठ में जून 1994 से जून 1996 तक अतिथि साहित्यकार के पद पर रहे

प्रश्न 1.‘बिटिया’ से क्या सवाल किया गया है

उत्तर- पिता द्वारा बिटिया से  सवाल किया गया है कि  आसपास लोहा कहाँ है।

प्रश्न .“बिटिया’ कहाँ- कहाँ लोहा पहचान पाती है

उत्तर-बिटिया ने दैनिक जीवन में काम में आनेवाली वस्तुएं यथा – चिमटा, करछुल, अँगीठी, सँडासी, दरवाजे की साँकल आदि में  लोहे को पहचानती है।

प्रश्न –लोहा क्या है ?इसकी खोज क्यों की जा रही है ?

उत्तर- कवि यह तलाशना चाहता है कि मानव समाज में भी लोहा अर्थात परिश्रमी लोग कहाँ –कहाँ है .दैनिक व्यवहार में लोहा एक धातु है ,जो कठोर और मज़बूत होता है ,जिससे फावड़ा, कुदाली, टॅगिया, बसूला, खुरपी, बैलगाड़ी के पहिए पर चढ़ा पट्टा, बैलों के गले में बँधी घंटी के अन्दर की गोली, बाल्टी, कुएँ की घिरनी, छाते की डंडी, उसके पुर्जे, हँसिया और चाकू इत्यादि वस्तुएं बनाई जाती हैं,किन्तु कवि उन सब मनुष्यों को भी लोहा मानता है जो लोहे की तरह ही कठोरता , मज़बूती और दृढ़ता से संघर्षपूर्ण  परिश्रम करते हुए जीवन से जूझ रहे है .

प्रश्न .“इस घटना से उस घटना तक” यहाँ किन घटनाओं की चर्चा है

उत्तर-.“इस घटना से उस घटना तक”का काव्यार्थ है वर्त्तमान से लेकर भविष्य तक .वर्त्तमान में  ही भविष्य छुपा होता है जैसे कविता में पिता बिटिया से लोहा के बारे में पूछता है और फिर लोहे के गूढ़ अर्थ को समझाते है, फिर  अनायास कवि भविष्य में चला जाता है  ,कल्पना करता  है किउसकी बिटिया बड़ी हो गई है, वह बिटिया के विवाह के लिए एक प्यारे से  सा दूल्हे के बारे में  सोचने लगता है। कवि वर्त्तमान में  भविष्य की कल्पना करने लगता है .

प्रश्न .मेहनतकश आदमी और दबी सतायी बोझ उठाने वाली औरत में कवि द्वारा लोहे की खोज का क्या आशय है ?

उत्तर- दैनिक व्यवहार में लोहा एक धातु है ,जो कठोर और मज़बूत होता है ,जिससे फावड़ा, कुदाली, टॅगिया, बसूला, खुरपी, बैलगाड़ी के पहिए पर चढ़ा पट्टा, बैलों के गले में बँधी घंटी के अन्दर की गोली, बाल्टी, कुएँ की घिरनी, छाते की डंडी, उसके पुर्जे, हँसिया और चाकू इत्यादि वस्तुएं बनाई जाती हैं,किन्तु कवि मेहनतकश आदमी और दबी सतायी बोझ उठाने वाली औरत को भी लोहा मानता है जो लोहे की तरह ही कठोरता , मज़बूती और दृढ़ता से संघर्षपूर्ण जीवन को  परिश्रम करते हुए जी रहे है .

प्रश्न-मेहनतकश  आदमी और दबी सताई बोझ उठानेवाली औरत में कवि द्वारा लोहे की खोज का क्या आशय है ?

उत्तर- लोहा पहले धरती के गर्भ में दबे होने की  यातना सहता हैं फिर धरती के गर्भ बाहर आकरआग में  तपता है ,गलता है ,ढलता है और फिर आकार पाता है। कवि मेहनतकश आदमी और दबी सतायी, बोझ उठानेवाली औरत के जीवन को लोहे के समान मानता  है। कवि को लोहे और मेहनतकश आदमी और दबी सतायी, बोझ उठानेवाली औरत में  साम्य  बोध होता है।

प्रश्न .बिटिया को पिता ‘सिखलाते हैं तो माँ ‘समझाती’ है, ऐसा क्यों

उत्तर- बिटिया को पिता ‘सिखलाते हैं तो माँ ‘समझाती’ है ,ऐसा इसलिए कि जो आज बच्चा है ,कल  बड़ा होकर उसे पारिवारिक और सामाजिक  दायित्व का निर्वहन करना होगा ,बच्चें का भविष्य तैयार करने में माता-पिता की भूमिका सामान्तर होती है .जैसा कि कविता में पहले पिता लोहा के बारे  में बिटिया को सिखलाते हैं ,सिखलाने में जो कुछ छूट गया माँ उसे समझकर पूर्ण कर देती है .पिता की सीख व्यावहारिक होती है और माँ की सीख भावनात्मक होती है .

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