भाषा, लिपि व्याकरण
भाषा
भाषा वह साधन है जिसके माध्यम से भावों या विचारों को लिखकर या बोलकर व्यक्त किया जाता है। भाषा के दो रूप होते है।
;1द्ध लिखित ;2द्ध मौखिक
भाषा का प्रयोग तीन रूप में होता है। बोलकर, लिखकर और संकेत द्वारा
14 सितम्बर, को हिंदी को संविधान में संघ की राज भाषा का दर्जा मिला। इसीलिए 14 सितम्बर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है .
विश्व में सबसे अधिक बोली जानेवाली भाषाओ में हिंदी का दूसरा स्थान है।
भाषा का स्वरुप विस्तृत होता है और बोली का संकुचित। भाषा का अपना लिखित व्याकरण होता है जबकि बोली का अपना कोई लिखित व्याकरण नहीं होता।
भारत के विभिन्न भाषा-भाषियों के मध्य संपर्क बनाने हेतु एक भाषा को सेतु रूप में व्यवहृत करने वाली भाषा को संपर्क भाषा कहा जाता है, हिंदी भारत की संपर्क भाषा है।
पूर्णतया व्यकरणानुमोदित भाषा को मानक अथवा परिनिष्ठित हिंदी कहते है।
किसी विशेष प्रयोजन के लिए प्रयोग में लाई जानेवाली भाषा प्रयोजनमूलक भाषा कहलाती है।
प्रांतीय आधार पर बोलियों का वर्गीकरण, जिससे भाषा का रूप निर्मित होता है, विभाषा कहलाती है।
खड़ी बोली चार चरणों से गुजरकर आई है दृ संस्कृत, पालि, प्राकृत और अपभ्रंश
जिस भाषा का देश के अधिकांश नागरिक प्रयोग करते है, राष्ट्र भाषा कहलाती है।
जिस भाषा का प्रयोग देश के शासकीय कार्यालयों में राज-काज में किया जाता है, राजभाषा कहते है।
एक क्षेत्र विशेष में बोल-चाल में व्यवहार में की जानेवाली भाषा बोली कहलाती है।
मुख से निकलने वाली आवाज ध्वनि कहलाती है।
आधुनिक भारतीय आर्य भाषा का सम्बन्ध भारोपीय परिवार से है।
मूल भाषा, विभाषा, बोली, और उपबोली ये भाषा के अन्य रूप है।
उपभाषा अपेक्षाकृत विस्तृत क्षेत्र प्रदेश में बोलचाल में प्रयुक्त होती है। उपभाषा में साहित्य भी रचा जाता है उपभाषा क्षेत्रा की अनेक बोलियाँ हो सकती है .
लिपि
ध्वनि का लिखित रूप लिपि कहलाती है .
ब्राह्मी और खरोष्ठी भारत की प्राचीन लिपियाँ है। इसमे ब्राह्मी सबसे प्राचीन है।
हिंदी की लिपि देवनागरी है।
हिंदी, संस्कृत, प्राकृत, मराठी, कोंकणी और नेपाली देवनागरी लिपि में लिखी जानेवाली भाषाएँ है।
अंग्रेजी, जर्मन, फ्रांसिसी की लिपि रोमन है जबकि सिन्धी, उर्दू और अरबी की लिपि फारसी है। पंजाबी की लिपि गुरुमुखी है।
लिपि भाषा विकास का प्रमुख साधन है।
देवनागरी लिपि का विकास भारत की प्राचीन ब्राह्मी लिपि से हुआ।
व्याकरण
भाषा का शुद्ध रूप सम्बन्धी नियमों का ज्ञान करनेवाला शास्त्र व्याकरण कहलाता है .
व्याकरण के तीन भाग है ;1द्ध वर्ण विचार ;2द्ध शब्द विचार ;3द्ध वाक्य विचार
वर्णों के सार्थक समूह को शब्द कहते है .
वर्ण विचार ,इसके अंतर्गत वर्णों से सम्बंधित उनके आकार, उच्चारण, वर्गीकरण और उनके मेल से शब्द बनाने के नियम आदि का उल्लेख किया जाता है .
शब्द विचार – इसके अंतर्गत शब्द से सम्बंधित भेद, उत्पत्ति, व्युत्पत्ति तथा रचना आदि का उल्लेख किया जाता है .
वाक्य विचार – इसके अंतर्गत वाक्य से सम्बंधित भेद, अन्वय, संश्लेषण, विश्लेषण, रचना, अवयय तथा शब्दों से वाक्य बनाने के नियमों का उल्लेख होता है
भाषा का प्रयोग मौखिक और लिखित दोनों रूपों में हो सकता है, जबकि लिपि का प्रयोग लिखित रूप में ही होता है
Previous Post
पारिभाषिक शब्दावली,paribhashik shabd
Next Post


No Comments