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लोकोक्तियाँ,proverb

November 12, 2022
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लोकोक्तियाँ,proverb

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लोकोक्तियाँ

लोकोक्तियाँ
1- छछुंदर के सिर में चमेली का तेल
अर्थ -अयोग्य व्यक्ति के पास अच्छी वस्तु

2- जल में रहकर मगरमच्छ से वैर
अर्थ -आश्रयदाता से बैर उचित नहीं

3- जंगल में मोर नाचा किसने देखा
अर्थ – दूसरों के सामने उपस्थित होने पर ही गुणों की कद्र होती है

4- जिसकी लाठी उसकी भैंस
अर्थ- शक्तिशाली की ही जीत होती है

5- ढाक के तीन पात
अर्थ- सदा एक सी स्थिति बने रहना
6- तेली का तेल जले, मशालची का दिल जले
अर्थ – खर्च कोई और करे, बुरा किसी अन्य को लगे
7- थोथा चना, बाजे घना
अर्थ – गुणहीन व्यक्ति अधिक आडम्बर करता है
8- दान की बछिया के दाँत नहीं गिने जाते
अर्थ- मुफ्त वस्तु के गुण नहीं देखे जाते
9ण् दाल भात में मूसल चन्द
अर्थ किसी के कार्य में व्यर्थ दखल देना
10ण् दुविधा में दोनांे गये माया मिली न राम
अर्थ संदेह की स्थिति में कुछ भी हाथ नहीं लगा
11ण् दूर के ढोल सुहाने लगते है
अर्थ दूरवर्ती वस्तु दूर से अच्छी लगती है किन्तु निकट आने पर वास्तविकता का पता चल जाता है
12ण् धोबी का कुत्ता घर का न घाट का
अर्थ किधर का भी न रहना
13ण् न नौ मन तेल होगा और न राधा नाचेगी
अर्थ अन होनी शर्त रखना
14ण् न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसूरी
अर्थ झगडे़ का कारण नष्ट करना
15ण् नक्कार खाने में तूव्ती की आवाज
अर्थ बड़ों के समक्ष छोटो का महत्वहीन होना
16ण् न सावन सूखा, न भादो हरा
अर्थ सदैव एक सी तंग स्थिति रहना
17ण् नाच न जाने आंगन टेढा
अर्थ अपनी अयोग्यता को छिपाने के लिए माध्यम को दोष देना
18ण् नेकी कर कुएँ मे डाल
अर्थ भला कर भूल जाना चाहिए
19ण् नौ दिन चले ढाई कौस
अर्थ बहुत धीमी गति से कार्य
20ण् नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली
अर्थ पाप करके पश्चाताप का होना
21ण् प्यादे से फरजी भयो टेढो-टेढो जाए
अर्थ छोटा आदमी बडा पद पाकर पूर्व प्रवृति का त्याग नहीं करता है
22ण् बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद
अर्थ मूर्ख को गुण की परख नहीं
23ण् बद अच्छा, बदनाम बुरा
अर्थ कंलकित होना बुरा होने से भी बुरा है
24ण् बाप न मारी मेढ़की, बेटा तीरन्दाज
अर्थ बहुत अधिक गप्प मारना
25ण् बांबी में हाथ तू डाल, मैं मंत्र पढू
अर्थ स्वयं को सुरक्षित रखते हुए दूसरों को खतरे में डालना
26ण् बिल्ली के भाग्य से छीकां टूटा
अर्थ अप्रत्याशित लाभ होना
27ण् भई गति सांप छछंूदर जैसी
अर्थ दुविधा की स्थिति
28ण् भैस के आगे बीन बजाये, भैस खडी पुगराय
अर्थ मूर्ख को उपदेश देना व्यर्थ
29ण् बिच्छू का मंत्र न जाने, सांप के बिल में हाथ डाले
अर्थ अयोग्य द्वारा उपदेश देना व्यर्थ
30ण् मन चंगा तो काठौती में गंगा
अर्थ मन पवित्र तो घर में तीर्थ है
31ण् मुख में राम, बगल में छुरी
अर्थ ऊपर से मित्रता, भीतर से शत्रुता
32ण् यथा राजा तथा प्रजा
अर्थ जैसा स्वामी, वैसा सेवक
33ण् मुफ्त का चंदन, घिस मेरे नंदन
अर्थ मुफ्त की वस्तु का दुरूपयोग
34ण् शबरी के बेर
अर्थ मूल्यहीन किन्तु प्रेममय भेंट
35ण् सब धान बाईस पंसेरी
अर्थ अज्ञानी की दृष्टि में गुणी एव मूर्ख सभी बराबर
36ण् सांप मर जाए और लाठी भी न टूटे
अर्थ बिना नुकसान हुए कार्य सम्पन्न
37ण् सावन के अंधे को हरा ही हरा सूझता है
अर्थ बिना नुकसान हुए कार्य सम्पन्न
38ण् सिर मुंडते ही ओले पडे़
अर्थ कार्य प्रारम्भ करते ही बाधा आना
39ण् सौ सुनार की एक लुहार की
अर्थ सैकडों छोटे उपाय से एक बडा उपाय अच्छा
40ण् सूप बोले तो बोले, छलनी भी बोले
अर्थ दोषी का बोलना उचित नहीं
41ण् हल्दी लगे न फिटकरी, रंग चोखा आए
अर्थ कम खर्च में अच्छा कार्य
42ण् हाथ कंगन को आरसी क्या
अर्थ प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं
43ण् हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और
अर्थ कथनी करनी में अन्तर होना
44ण् होनहार बिखान के होत चिकने पात
अर्थ प्रतिभा बचपन में लक्षण प्रकट कर देती है
45ण् हाथ सुमरिनी बगल कतरनी
अर्थ कपट पूर्ण व्यवहार करना
46ण् प्रभुता पाहि काहि मदनाहि
अर्थ अधिकार प्राप्त
47ण् शठे शाठ्य समाचरेत
अर्थ दुष्ट के साथ दुष्टता का व्यवहार करना चाहिए।
48ण् अब पछताये होत क्या जब चिडिया चुग गई खेत
अर्थ अवसर निकलने के पश्चात प्रायशित करने से कोई लाभ नही
49ण् का वर्षा जब ड्डषि सुखानी
अर्थ अवसर के पश्चात साधन की प्राप्ति व्यर्थ है
50ण् कभी नाव गाड़ी पर, कभी गाड़ी नाव पर
अर्थ परिस्थितियाँ बदलती रहती है।
51ण् कोऊ नृप होउ, हमें का हानि
अर्थ राजा कोई भी हो, गरीब को तो परिश्रम करना ही है
52ण् गुरू कीजै जान, पानी पीवै छान
अर्थ सोच समझकर निर्णय करना चाहिएद्ध
53ण् चंदन की चुटकी भली, गाड़ी भरा न काठ
अर्थ व्यर्थ की अधिक वस्तु की तुलना में कम किंतु गुणयुक्त वस्तु अच्छी
54ण् जननी जन्म भूमिश्च स्वर्गदपि गरीयसी
अर्थ मातृभूमि स्वर्ग से भी बढकर है
55ण् जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि
अर्थ कवि दूर तक की बात को सोच लेता है
56ण् जाके पैर न फटी बिवाई वो कसा जाने पीर पराई
अर्थ जिसने स्वयं दुख न देखे हो, वह दूसरे का दुख क्या जाने
57ण् जाकी रही भावना जैसी, हरि मूरत देखी तिन तैसी
अर्थ जो जैसी भावना रखता है उसे प्रभु वैसे ही दिखाई देते है
58ण् अपनी करनी, पार उतरनी
अर्थ स्वयं का परिश्रम ही सार्थक होता है।
59ण् अकेला चना भाड़ नहीं फोड सकता
अर्थ अकेला शक्तिहीन होता है।
60ण् अधजल गगरी, छलकत जाए
अर्थ ओछा आदमी अधिक इतराता है
61ण् अंधों में काना राजा
अर्थ मूर्खो में थोडा ज्ञानी
62ण् अंधा पीसे, कुत्ता खाए
अर्थ मूर्ख की मेहनत का लाभ अन्य को होता है
63ण् अंधे के आगे रोवे, अपनी भी खोवे
अर्थ अयोग्य व्यक्ति से सहायता की अपेक्षा व्यर्थ
64ण् अक्ल बड़ी या भैस
अर्थ शारीरिक बल से बुद्धि बल श्रेष्ठ होता है
65ण् अपनी-अपनी डफली, अपना-अपना राग
अर्थ तालमेल का अभाव
66ण् अंधा बंाटे रेवडी, अपने अपने को देय
अर्थ स्वार्थी अधिकार प्राप्त व्यक्ति अपने लोगो की सहायता करता है
67ण् आ बैल मुझे मार
अर्थ जान बूझकर मुसीबत लेना
68ण् आम के आम, गुठलियों के दाम
अर्थ दोहरा लाभ
69ण् आँख का अंधा, नाम नयन सुख
अर्थ गुणों के विपरीत नाम
70ण् आये थे हरि भजन को ओटन लगे कपास
अर्थ उद्देश्य से भटक जाना
71ण् आधा तीतर, आधा बटेर
अर्थ अनमेल मिश्रण
72ण् आठ कनौजिए, नौ चूल्हे
अर्थ आपसी फूट
73ण् उल्टा चोर कोतवाल डाटे
अर्थ दोषी द्वारा निर्दोष पर ही आरोप लगाना
74ण् उल्टे बाँस बरेली को
अर्थ विपरीत कार्य अथवा आचरण
75ण् ऊँची दुकान फीका पकवान
अर्थ वास्तविकता से अधिक दिखावा
76ण् न ऊधो का लेना, न माधो का देना
अर्थ किसी से मतलब नहीं
77ण् गाल बजाना
अर्थ आत्म प्रशंसा करना
78ण् ऊँट के मुँह मे जीरा
अर्थ अधिक के स्थान कम पूर्ति
79ण् ओखली मे सिर दिया तो मूसल से क्या डर
अर्थ जब दृढ निश्चय कर लिया तो बाँधाओं से क्या धबराना
80ण् एक पंथ दो काज
अर्थ एक साधन से दो कार्य
81ण् एक अनार सौ बीमार
अर्थ बस्तु कम, चाहने वाले अघिक
82ण् एक ता करेला, दूजा नीम चढ़ा
अर्थ एक बुराई के साथ दूसरी बुराई जुड़ जाना
83ण् काला अक्षर भैस बराबर
अर्थ बिल्कुल अनपढ़
84ण् कंगाली में आटा गीला
अर्थ संकट पर संकट आना
85ण् काबुल में क्या गधे नहीं होते
अर्थ मूर्ख सब जगह होते है
86ण् खोदा पहाड़ निकली चुहिया
अर्थ अधिक परिश्रम, कम लाभ
87ण् खिसयानी बिल्ली संभा नीचे
अर्थ वश न चलने पर क्रोध प्रकट करना
88ण् घर का जोगी जोगना, आव गांव का सिद्ध
अर्थ अपने स्थान पर सम्मान नहीं मिलता
89ण् गंगा गये गंगादास, युमुना गये यमुना दास
अर्थ अवसरवादी होना
90ण् घर का भेदी लंका ढहाये
अर्थ घर के शत्रु से नुकसान
91ण् घर की मुर्गी दाल बराबर
अर्थ धरेलू साधनों का मूल्य कम होता है
92ण् घर में नहीं दाने, बुढिया चली भुनाने
अर्थ झूठा दिखावा करना
93ण् घर आये नाग न पूजै, बामी पूजन जाए
अर्थ अवसर का लाभ न उठा कर उसकी खोज में जाना
94ण् चिकने घडे पर पानी नहीं ठहरता
अर्थ निर्लज्ज पर किसी बात का असर नहीं
95ण् चिराग तले अंधेरा
अर्थ स्वयं अज्ञानी किन्तु दूसरों को उपदेश देना
96ण् चोर की दाढी में तिनका
अर्थ अपराधी अपने दोष का संकेत स्वयं दे देता है
97ण् चोर-चोर मौसेरे भाई
अर्थ समान स्वभाव के लोग

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