12th UP

12,up board,hindi,laati ,katha saar,लाटी-शिवानी

September 14, 2023
Spread the love

12,up board,hindi,laati ,katha saar,लाटी-शिवानी

कथा सार

ताऊ तथा पिता द्वारा दसवीं पास बानो के साथ कप्तान जोशी का विवाह करवा दिया जाता है ,इसी कारण  वह उनसे नाराज रहता है, किन्तु जब  कप्तान जोशी बानो को देखता है और उससे बातचीत करता है  तो बानो के भोलेपन से प्रभावित होकर अपनासारा गुस्सा भूलकर  हो जाता है बानो से  प्रेम करने लगता है।

युद्ध शुरू हो जाने के कारण कप्तान जोशी को विवाह के तीसरे ही दिन बानो को छोड़कर बसरा जाना पड़ा । उस समय बानो की आयु सोलह वर्ष थी। जब कप्तान युद्ध पर जाने के लिए बानो से विदा लेने जाता है, तो बानो  भावुक हो उठती है।

जाने के बाद कप्तान जोशी वापस नहीं लौटता , बानो को ससुराल के लोगों द्वारा बताया जाता है कि उसका पति जापानियों द्वारा कैद कर लिया गया है, वह अब कभी नहीं लौटेगा।

दो साल बीत जाते है –

इन  दो सालों  में ससुरालवालों द्वारा उसे मानसिक प्रताडनाएँ भी दी गई ,बानो ने सात-सात ननदों के ताने सुने, भतीजों के कपड़े धोए, ससुर के होज बिने, पहाड़ की नुकीली छतों पर पाँच-पाँच सेर उड़द पीसकर बड़ियाँ आदि तोड़ी। सास और चचिया सास व ननदों के व्यंग्य-बाण भीतर से बनोके ह्रदय को छलनी कर देते है , बानो भीतर ही भीतर  घुलती चली गई और क्षय रोग से ग्रसित हो गई। क्षय रोग के कारण  ससुरालवालों ने बानो को सैनेटोरियम भेज दिया ।

दो साल बीत बाद घर लौटता है , तो उसे पता चलता है कि घरवालों द्वारा बानो को टी. बी. सैनेटोरियम भेज दिया गया है।

कप्तान जोशी बानो को देखने के लिए गोठिया सैनेटोरियम जाता है, वहाँ के एक- प्राइवेट वार्ड के बरामदे में लेटी बानो को देखकर कप्तान जोशी हतप्रभ रह जाता है।

इन दो सालों  में बानो क्षय रोग के कारण सूखकर काँटा हो गई थी। कप्तान को देखकर बानो की आँखों से  आँसू बहने लगते हैं। बानो के बहते आँसुओं ने इन दो सालों का हिसाब-किताब  खोलकर रख  दिया।

कप्तान जोशी तीन नम्बर के बंगले का दोगुना किराया देकर क्षय रोग से ग्रसित  पत्नी बानो के साथ रहने लगता  है। वह दिनभर बानो के पलंग के समीप कुर्सी पर  बैठा रहता है , टेम्परेचर नोट करता है , चिकित्सकीय सलाहानुसार उसे दवाई देता है ।

मृत्यु की आशंका  ने बानो के स्वाभाव को चिड़चिड़ा बना दिया था, परन्तु कप्तान एक  हँसकर उसकी हर जिद पूरी करता है । परिजनों को क्षय रोग के रोगी से  दूर रहने की हिदायत दी जाती है किन्तु  कप्तान जोशी  डॉक्टर व माता-पिता समझाये जाने के बावजूद   बिना किसी हिदायत की परवाह किये बानो की सेवा में लगा  रहता है ।

बानो की मृत्यु की सम्भावित  मृत्यु के बारे में परिजनों और डॉक्टर द्वारा  कप्तान को समझाया जाता है, कप्तान जोशी  यथार्थ को झुठलाकर सहज व्यावहारिक चेष्टाओं से बानों के प्रति प्रेम को ज्यों का त्यों बनाए रखता है।

 नेपाली भाभी ,जिसका व्यावसायी पति गुमानसिंह क्षय रोग से ग्रसित पत्नी  को इलाज के लिए सैनेटोरियम में छोड़कर चला जाता है ।

नेपाली भाभी बाह्य रूप से हृष्ट-पुष्ट  दिखाई  देती है ,किन्तु भीतर से खोखली हो चुकी होती है ,एक दिन नेपाली भाभी की मौत हो जाती है , नेपाली भाभी की मौत से कप्तान तथा बानो को सत्य का आभास हो जाता है, सत्य  जानकर भी कप्तान जोशी अनजान बना रहता है। वह सोचता है कि जब हँसती-खेलती नेपाली भाभी को मौत खींच ले गई तो हड्डियों का ढाँचा मात्र रह गई बानो का क्या होगा ? यह विचार कप्तान और बानो को जीवन की क्षणिकता से साक्षात्कार करा देता है।

सैनेटोरियम में एक नियम था, रोगियों को उनकी अन्तिम अवस्था जानकर उन्हें घर भेज दिया जाता था। बानो को दिन-भर दस्त आना, बानो का मृत्यु के बिलकुल करीब पहुँचने का संकेत था , इसलिए डॉक्टर दयाल द्वारा कप्तान जोशी को कमरा खाली कर बानो को घर जाने का नोटिस दे दिया जाता है।

कप्तान जोशी बनावटी बात कहकर बानो से यह जगह छोड़कर अन्यत्र चलने की बात  कहता है। बानो अनुमान लगा लेती है कि  उसका भी अन्तिम समय निकट आ गया है।

कप्तान देर रात तक बानो के समीप ही  रहा और फिर जब बानो को नींद आ गई, तो कप्तान भी अपने पलंग पर जाकर सो गया।

सुबह होते ही बानो के गुम होने की खबर चारों ओर फैल जाती है।

दूसरे दिन बड़ी दूर रथी घाट पर बानो की साड़ी मिलती है जो इस बात की ओर इशारा कर रही थी कि  बानो मौतसे पहले ही मौत से  मिलने चली गई। बानो की साड़ी का नदी के घाट से मिलने को बानो द्वारा  आत्महत्या कर लेना समझ लिया गया  ।

कप्तान जोशी ने भी मान लिया कि  बानो अब इस दुनिया में नहीं है  । घरवाले दूसरा विवाह कर लेने का भावात्मक दबाव बनाने लगे लगे थे , घरवालों के जोर देने पर मेजर की बेटी प्रभा  से  दूसरा विवाह कर लिया ।

वक़्त गुजरता गया ,दूसरी पत्नी प्रभा से उसे दो बेटे एवं एक बेटी पैदा हुई है , कप्तान जोशी ,कप्तान जोशी से मेजर जोशी  बन गया  ।

 16 साल बाद मेजर जोशी अपनी पत्नी प्रभा के साथ नैनीताल जा रहा था ,रास्ते में एक रेस्टोरेंट में  वैष्णवियों के दल में मेंजर जोशी को  बानो  दिखाई देती है , मेजर बानो को  पहचान लेता है।कल की बानो अपना अतीत भूलकर आज लाटी बन चुकी थी ,जिसे न अतीत याद आता है और न सामने खड़े अपने अतीत अर्थात कप्तान जोशी से कुछ कह पाती है ,बानो अपनी याददाश्त के साथ-साथ वाकशक्ति भी खो चुकी थी  ।

बानो के बारे में पूछताछ करने पर पता  चलता है कि गुरु महाराज को नदी किनारे बेहोशी की हालत में मिली थी ,जिसे गुरु महाराज  ने अपनी औषधियों से उसका क्षय रोग ठीक कर दिया था, लेकिन उसकी स्मरण शक्ति और आवाज दोनों चली गईं।

वर्तंमान मेजर जोशी , अतीत का कप्तान जोशी बनकर अपने अतीत की बानो के पास जाना चाहकर भी जा नहीं पाता,प्रभा का वर्तमान उसे जकड लेता है   ।

लाटी वैष्णवियों के दल के साथ चली जाती है और मेजर स्वयं को पहले से अधिक बूढ़ा एवं खोखला महसूस करने लगता है।

No Comments

    Leave a Reply

    error: Content is protected !!
    error: Alert: Content is protected !!