12cbse/hindi/antra /pad-vidyapati/vyakhya -MCQ/ पद/ विद्यापति
विद्यापति द्वारा रचित पदों का प्रतिपाद्य
पाठ्यक्रम में संकलित विद्यापति द्वारा रचित पद विरह, प्रेम और नायिका की अंतःपीड़ा के भावपूर्ण चित्र प्रस्तुत करते हैं। इन पदों में कवि ने विशेष रूप से नायिका के हृदय में व्याप्त वियोग-वेदना को अत्यंत कोमल और संवेदनशील ढंग से अभिव्यक्त किया है।
प्रथम पद में कवि उस नायिका की मनःस्थिति का वर्णन करता है, जो अपने प्रियतम के वियोग में अत्यंत संतप्त है। नायक गोकुल छोड़कर मथुरा में निवास करने लगा है, जिससे नायिका का हृदय विरह से भर गया है। श्रावण मास के आगमन के साथ ही उसकी व्याकुलता और अधिक तीव्र हो उठती है, क्योंकि यह ऋतु प्रेम और मिलन की स्मृतियों को और गहरा कर देती है। नायिका की पीड़ा इतनी गहन है कि उसे समझने वाला कोई नहीं दिखाई देता।
नायिका अपने मन की व्यथा को पत्र के माध्यम से अपने प्रियतम तक पहुँचाना चाहती है, ताकि उसके हृदय की पीड़ा कम हो सके। किंतु उसे कोई ऐसा विश्वासपात्र व्यक्ति नहीं मिलता, जो उसका संदेश उसके प्रियतम तक पहुँचा सके। इस प्रकार यह पद नायिका के एकाकीपन, असहायता और विरह की तीव्रता को मार्मिक रूप में प्रस्तुत करता है तथा प्रेम-वियोग की करुण अनुभूति को पाठक के मन में गहराई तक उतार देता है।
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सप्रसंग व्याख्या-
1.
के पतिआ लए जाएत रे मोरा पिअतम पास।
हिए नहि सहए असह दुख रे भेल साओन मास॥
एकसिर भवन पिआ बिनु रे मोहि रहलो न जाए।
सखि अनकर दुख दारुन रे जग के पतिआए।
मोर मन हरि हर लए गेल रे अपनो मन गेल।
गोकुल तेजि मधुपुर बस रे कन अपजस लेल॥
विद्यापति कवि गाओल रे धनि धरु मन आस।
आओत तोर मन भावन रे एहि कातिक मास॥
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प्रसंग :-प्रस्तुत पद मध्यकालीन भक्तिकाल के प्रसिद्ध कवि **विद्यापति** द्वारा रचित है। इस पद में **नायिका राधा** की विरहावस्था का मार्मिक चित्रण किया गया है। श्रीकृष्ण राधा को छोड़कर मथुरा चले गए हैं और उनके वियोग में राधा अत्यंत व्यथित है। वर्षा ऋतु का **श्रावण मास**, जो सामान्यतः प्रेम-मिलन को उद्दीप्त करने वाला माना जाता है, राधा के लिए विरह को और भी असह्य बना देता है। राधा अपने प्रिय तक पत्र द्वारा अपनी व्यथा पहुँचाना चाहती है, किंतु पत्र ले जाने वाला कोई दूत न मिलने के कारण उसकी विवशता और पीड़ा और बढ़ जाती है।
व्याख्या :-इन पंक्तियों में नायिका राधा अपनी सखी से अपनी दयनीय विरह-दशा का वर्णन करती हुई कहती है कि ऐसा कौन है, जो उसके प्रियतम श्रीकृष्ण के पास उसका पत्र पहुँचा सके। उसका हृदय विरह के इस असहनीय दुःख को सहन करने में असमर्थ हो गया है। श्रावण मास का आगमन हो चुका है—यह वह समय है जब प्रिय-मिलन की आकांक्षा स्वाभाविक रूप से और अधिक प्रबल हो जाती है, किंतु प्रिय के अभाव में राधा को अपना ही घर सूना और असह्य लगने लगता है।
राधा सखी से कहती है कि इस संसार में दूसरे के गहरे दुःख पर कौन विश्वास करता है। इसी कारण उसके विरह की पीड़ा को वही जान सकती है; उसके अतिरिक्त कोई और उसका अनुमान नहीं लगा सकता। वह कहती है कि श्रीकृष्ण उसका मन अपने साथ हरण कर ले गए हैं और गोकुल छोड़कर मथुरा में जा बसे हैं। इसी कारण उसका मन आज भी पूरी तरह कृष्ण में ही रमा हुआ है।
राधा के हृदय में यह वेदना भी है कि गोकुल को छोड़कर मथुरा में बसकर श्रीकृष्ण ने अपने लिए अपयश ही अर्जित किया है। इस प्रकार राधा का प्रेम, विरह और शिकायत—तीनों भाव एक साथ प्रकट होते हैं।
अंत में कवि विद्यापति स्वयं नायिका को सांत्वना देते हुए कहते हैं कि हे सुंदरी! अपने प्रिय के आगमन की आशा मन में बनाए रखो। तुम्हारा मनभावन प्रिय **कार्तिक मास** में अवश्य लौट आएगा। इस आश्वासन के साथ पद का अंत होता है, जिससे विरह-वेदना के बीच आशा की एक क्षीण किंतु मधुर किरण झलक उठती है।
विशेष :-
* नायिका राधा की **विरह-वेदना, विवशता और आशा** का मार्मिक चित्रण हुआ है।
* **अनुप्रास, यमक तथा अप्रस्तुत प्रशंसा** अलंकारों का प्रभावी प्रयोग हुआ है।
* काव्य-रूढ़ि के अनुसार **श्रावण मास** को विरह बढ़ाने वाला माना गया है।
* भाषा **मैथिली** है, जिसका प्रयोग सहज, मधुर और भावानुकूल है।
* **करुण रस** की प्रधानता तथा **प्रसाद गुण** का सुंदर निर्वाह हुआ है।
* **स्वरमैत्री** के कारण पद में लयात्मकता और गीतात्मकता उत्पन्न हुई है।
काव्यांश से बहु-विकल्पीय प्रश्न (MCQs)
**प्रश्न 1.** यह पद किस कवि द्वारा रचित है?
(क) सूरदास
(ख) विद्यापति
(ग) जायसी
(घ) तुलसीदास
**सही उत्तर :** (ख) विद्यापति
—
**प्रश्न 2.** इस पद में नायिका कौन है?
(क) पद्मिनी
(ख) मीरा
(ग) राधा
(घ) उर्मिला
**सही उत्तर :** (ग) राधा
—
**प्रश्न 3.** राधा किस मास को विरह-वेदना बढ़ाने वाला मानती है?
(क) चैत्र
(ख) फाल्गुन
(ग) श्रावण
(घ) कार्तिक
**सही उत्तर :** (ग) श्रावण
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**प्रश्न 4.** राधा पत्र क्यों नहीं भेज पा रही है?
(क) पत्र लिखना नहीं जानती
(ख) कृष्ण का पता नहीं है
(ग) कोई पत्रवाहक नहीं मिलता
(घ) सखी मना करती है
**सही उत्तर :** (ग) कोई पत्रवाहक नहीं मिलता
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**प्रश्न 5.** कवि विद्यापति राधा को किस बात से सांत्वना देते हैं?
(क) कृष्ण ने उसे भुला दिया है
(ख) विरह सदा बना रहेगा
(ग) कृष्ण कार्तिक मास में लौट आएँगे
(घ) उसे गोकुल छोड़ देना चाहिए
**सही उत्तर :** (ग) कृष्ण कार्तिक मास में लौट आएँगे
पद का प्रतिपाद्य –
द्वितीय पद में विद्यापति ने प्रेम की उस अवस्था का सूक्ष्म और भावात्मक चित्रण किया है, जहाँ नायिका जन्म-जन्मांतर से अपने प्रियतम के रूप-सौंदर्य का रसपान करते हुए भी स्वयं को पूर्णतः तृप्त अनुभव नहीं करती। प्रियतम के दर्शन और सान्निध्य से उसे संतोष नहीं, बल्कि प्रेम की अनुभूति निरंतर नई और नवोन्मेषपूर्ण प्रतीत होती है।
नायिका के लिए प्रेम कोई स्थिर या सीमित अनुभव नहीं है, बल्कि वह निरंतर विस्तार पाने वाली अनुभूति है। प्रेम-क्रीड़ाओं का सुख उसकी अतृप्ति को समाप्त नहीं करता, बल्कि उसे और अधिक प्रगाढ़ बना देता है। जितना अधिक वह प्रेमानंद का आस्वादन करती है, उतनी ही उसके प्राणों में और अधिक प्रेम पाने की तीव्र आकांक्षा जाग्रत हो उठती है। इस प्रकार यह पद प्रेम की अनंतता, उसकी नव्यता और आत्मिक गहराई को प्रभावशाली रूप में अभिव्यक्त करता है।
सप्रसंग व्याख्या –
2.
सरिल हे, कि पुछसि अनुभव मोए।
सेह पिरिति अनुराग बखानिअ तिल तिल नूतन होए॥
जनम अबधि हम रूप निहारल नयन न तिरपित भेल ॥
सेहो मधुर बोल स्तवनहि सूनल सुति पथ परस न गेल॥
कत मधु-जामिनि रभस गमाओलि न बूझल कइसन केलि॥
लाख लाख जुग हिख हिअ राखत तइओ हिओ जरनि न गेल।।
कत बिदगध जन रस अनुमोदए अनुभव काहु न पेख॥
विद्यापति कठ प्रान जुड़ाइते लाखे न मीलल एक।।
प्रसंग :-
प्रस्तुत पद भक्तिकाल के प्रसिद्ध कवि **विद्यापति** द्वारा रचित है। इस पद में नायिका अपने प्रियतम के प्रति अपने **अनन्य, गहन और अतृप्त प्रेम** को अपनी सखी के समक्ष व्यक्त करती है। वह कहती है कि जन्म-जन्मांतर तक प्रिय को देखने, सुनने और पाने के बाद भी उसका मन तृप्त नहीं हुआ। इस पद में प्रेम की **अनिर्वचनीयता और नित-नवीनता** का अत्यंत सूक्ष्म और भावपूर्ण चित्रण है।
व्याख्या :-इन पंक्तियों में नायिका अपनी सखी को संबोधित करते हुए कहती है कि वह प्रेम करने की कला में पूर्णतः निपुण है और बहुत समय से अपने प्रियतम से प्रेम करती आ रही है। उसकी सखी उसके प्रेम-व्यवहार से भली-भाँति परिचित है और उत्सुकतावश उसकी प्रेमानुभूति के विषय में जानना चाहती है। नायिका सखी को समझाते हुए कहती है कि वह उससे प्रेम के अनुभव के बारे में क्यों पूछती है, क्योंकि प्रेम का अनुभव तो प्रत्येक क्षण नया और बदलता हुआ होता है।
नायिका के अनुसार प्रेम क्षण-क्षण रूप बदलने वाला होता है, इसलिए उसका संपूर्ण वर्णन संभव नहीं है। वह कहती है कि उसने जीवन भर प्रिय के रूप का दर्शन किया, फिर भी उसकी आँखें कभी तृप्त नहीं हुईं। उसने प्रिय की मधुर वाणी को निरंतर सुना, किंतु उसके कानों को भी संतोष प्राप्त नहीं हुआ।
नायिका आगे कहती है कि उसने न जाने कितनी मिलन-रात्रियाँ प्रियतम के साथ रति-क्रीड़ा में व्यतीत की हैं, फिर भी वह यह समझ नहीं पाई कि केलि वास्तव में क्या और कैसी होती है। उसने लाखों युगों तक प्रिय को अपने हृदय में धारण किए रखा, किंतु फिर भी हृदय में स्थित प्रेम की जलन शांत नहीं हुई।
नायिका निष्कर्ष रूप में कहती है कि प्रेमानुभूति प्रतिक्षण रूप बदलने वाली, अतृप्ति को बढ़ाने वाली तथा पूर्णतः अवर्णनीय और अकथनीय होती है। प्रेम-रस का पान करके विद्ध होने वाले अनेक व्यक्तियों ने इसका अनुभव तो किया है, परंतु कोई भी इसका पूर्ण और सच्चा अनुभव नहीं कर सका। कवि विद्यापति कहते हैं कि ऐसा प्रेम, जो प्राणों को पूर्ण शांति प्रदान कर दे, वह लाखों में एक को ही प्राप्त होता है।
विशेष :-
* नायिका के **अनन्य, अतृप्त और गहन प्रेम** का सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक चित्रण है।
* **अतिशयोक्ति, वीप्सा, विरोधाभास, अनुप्रास और विशेषोक्ति** अलंकारों का प्रभावी प्रयोग हुआ है।
* **मैथिली भाषा** का माधुर्यपूर्ण, सरस और भावानुकूल प्रयोग किया गया है।
* **स्वरमैत्री, माधुर्य और गेयता** के गुण विद्यमान हैं।
* **अभिधात्मकता** के कारण कथन सहज, स्पष्ट और प्रभावशाली बन पड़ा है।
काव्यांश से बहु-विकल्पीय प्रश्न (MCQs)
**प्रश्न 1.** यह पद किस कवि द्वारा रचित है?
(क) सूरदास
(ख) तुलसीदास
(ग) विद्यापति
(घ) जायसी
**सही उत्तर :** (ग) विद्यापति
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**प्रश्न 2.** नायिका किससे अपने प्रेम की अनुभूति व्यक्त करती है?
(क) प्रियतम से
(ख) माता से
(ग) सखी से
(घ) स्वयं से
**सही उत्तर :** (ग) सखी से
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**प्रश्न 3.** नायिका के अनुसार प्रेम की प्रमुख विशेषता क्या है?
(क) स्थिर और सीमित होना
(ख) प्रतिक्षण नया और रूप बदलने वाला होना
(ग) शीघ्र तृप्त हो जाना
(घ) केवल शारीरिक होना
**सही उत्तर :** (ख) प्रतिक्षण नया और रूप बदलने वाला होना
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**प्रश्न 4.** नायिका किस कारण से प्रिय को देखकर भी तृप्त नहीं होती?
(क) क्योंकि वह प्रिय से दूर रहती है
(ख) क्योंकि प्रेम अतृप्त और अनिर्वचनीय होता है
(ग) क्योंकि प्रिय बदलता रहता है
(घ) क्योंकि सखी बीच में बाधा डालती है
**सही उत्तर :** (ख) क्योंकि प्रेम अतृप्त और अनिर्वचनीय होता है
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**प्रश्न 5.** इस पद का मुख्य भाव क्या है?
(क) विरह-वेदना
(ख) सामाजिक आलोचना
(ग) प्रेम की अनिर्वचनीयता और अतृप्ति
(घ) नायक की प्रशंसा
**सही उत्तर :** (ग) प्रेम की अनिर्वचनीयता और अतृप्ति
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विद्यापति द्वारा रचित तृतीय पद का प्रतिपाद्य
तृतीय पद में विद्यापति ने नायक-वियोग से व्यथित एक ऐसी विरहिणी नायिका का अत्यंत करुण और संवेदनशील चित्रण किया है, जिसके लिए प्रियतम के अभाव में संसार का समस्त सौंदर्य भी पीड़ा का कारण बन जाता है। नायक से बिछुड़ जाने के बाद प्रकृति के वे दृश्य, जो सामान्यतः आनंद और उल्लास प्रदान करते हैं, नायिका को कष्टदायक प्रतीत होते हैं।
वियोग की तीव्रता उसके जीवन पर इस प्रकार छा जाती है कि प्रकृति का सौंदर्य भी उसके दुःख को कम करने के बजाय और अधिक बढ़ा देता है। प्रियतम के अभाव में वह प्रतिदिन शारीरिक और मानसिक रूप से दुर्बल होती जा रही है। इस प्रकार यह पद विरह की चरम अवस्था को अभिव्यक्त करता है, जहाँ प्रेमी के लिए जीवन का प्रत्येक क्षण पीड़ा से भर जाता है और समस्त जगत नीरस एवं वेदनामय प्रतीत होता है।
सप्रसंग व्याख्या –
3.
कुसुमित कानन हेरि कमलमुखि,
मूँदि रहल दु नयान।
कोकिल-कलरख, मधुकर-धुनि सुनि,
कर देइ झाँपड कान।।
माधय, सुन-सुन बचन हमारा।
तुअ गुन सुंदरि अति भेल दूषरि-
गुनि-गुनि प्रेम तोहारा ॥
धरनी धरि धनि कत बेरि बइसइ,
पुनि तहि उठइ न पारा।
कातर दिठि करि, चौदिस हेरि-हेरि
नयन गरए जल-धारा ॥
तोहर बिरह दिन छन-छन तनु छिन-
चौदसि-चाँंद समान।
भनड विद्यापति सिथसिंह नर-पति
लिखिमादेइ-रमान ॥
प्रसंग:-प्रस्तुत पद भक्तिकाल के प्रसिद्ध मैथिली कवि **विद्यापति** द्वारा रचित है। इस पद में कवि ने नायक **कृष्ण (माधव)** के वियोग में संतप्त **नायिका राधा** की करुण और दयनीय अवस्था का चित्रण किया है। राधा के दिन-प्रतिदिन दुर्बल होते जाने तथा ऋतु-परिवर्तन से उद्दीप्त विरह-वेदना का वर्णन करते हुए, कवि ने नायिका की **सखी** को माध्यम बनाकर नायक को उसकी स्थिति से अवगत कराया है, जिससे वह द्रवित होकर नायिका से मिलने के लिए प्रेरित हो सके।
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व्याख्या :-इन पंक्तियों में नायिका की सखी नायक माधव को संबोधित करते हुए राधा की विरहावस्था का मार्मिक वर्णन करती है। वह कहती है कि हे माधव! कमल के समान सुंदर मुख वाली राधा जब पुष्पों से भरे वन को देखती है, तो अपने दोनों नेत्र बंद कर लेती है, क्योंकि ये दृश्य उसके हृदय में तुम्हारे साथ बिताए गए सुखद क्षणों की स्मृति को जगा देते हैं और उसका विरह और तीव्र हो जाता है। इसी प्रकार जब वह कोयल का मधुर कलरव सुनती है या भौंरों की गुंजार सुनाई देती है, तो वह हाथों की उँगलियों से अपने कान बंद कर लेती है, क्योंकि ये सभी प्रकृति-प्रदत्त उद्दीपक तत्व उसके विरह-दुख को असह्य बना देते हैं।
सखी आगे कहती है कि तुम्हारी वह सर्वगुण-संपन्न प्रेयसी तुम्हारे वियोग में अत्यंत दुर्बल हो चुकी है और निरंतर तुम्हारे प्रेम का स्मरण करती रहती है। विरह से पीड़ित राधा, यद्यपि प्रकृति के आनंददायक रूपों की उपेक्षा करती है, फिर भी वह पूरी तरह तुम्हारी स्मृतियों में डूबी रहती है। उसकी दुर्बलता इतनी बढ़ गई है कि यदि वह एक बार भूमि पर बैठ जाती है, तो फिर बार-बार भूमि को पकड़कर ही बैठी रहती है और उठने का प्रयास करने पर भी उठ नहीं पाती।
वह बैठी-बैठी चारों ओर कातर दृष्टि से देखती रहती है, मानो कहीं से तुम आ जाओ। तुम्हारे न आने पर उसकी आँखों से निरंतर अश्रुधारा बहने लगती है। सखी बताती है कि तुम्हारे वियोग में उसका शरीर प्रतिदिन और प्रत्येक क्षण उसी प्रकार क्षीण होता जा रहा है, जैसे चतुर्दशी का चंद्रमा क्रमशः क्षीण हो जाता है। कवि विद्यापति अंत में कहते हैं कि राजा **शिवसिंह**, जो लखिमा देवी को प्रसन्न करने वाले हैं, राधा की इस विरह-दशा से भली-भाँति परिचित हैं।इस प्रकार इस पद में नायिका की विरह-वेदना, शारीरिक दुर्बलता और मानसिक व्याकुलता का अत्यंत करुण और सजीव चित्रण हुआ है।
विशेष :-
* नायिका की **विरह-दशा, शारीरिक क्षीणता और मानसिक व्याकुलता** का मार्मिक चित्रण है।
* **अनुप्रास, अतिशयोक्ति, रूपक, पुनरुक्तिप्रकाश, परिकर और उपमा** अलंकारों का प्रभावशाली प्रयोग हुआ है।
* **मैथिली भाषा** का सहज, स्वाभाविक एवं भावानुकूल प्रयोग किया गया है।
* **माधुर्य एवं गेयात्मकता** का गुण पद को संगीतात्मक बनाता है।
* **तत्सम एवं तद्भव शब्दावली** का संतुलित और सहज-समन्वित प्रयोग दृष्टिगोचर होता है।
(ii) बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)**
**प्रश्न 1.** प्रस्तुत पद के रचयिता कौन हैं?
(क) सूरदास
(ख) विद्यापति
(ग) तुलसीदास
(घ) जायसी
**सही उत्तर :** (ख) विद्यापति
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**प्रश्न 2.** नायिका की दशा का वर्णन नायक तक कौन पहुँचाता है?
(क) स्वयं नायिका
(ख) माता
(ग) सखी
(घ) दासी
**सही उत्तर :** (ग) सखी
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**प्रश्न 3.** राधा पुष्पों से भरे वन और कोयल-भौंरों की ध्वनि से क्यों बचती है?
(क) उसे प्रकृति पसंद नहीं
(ख) वे दृश्य उसे भयभीत करते हैं
(ग) वे उसके विरह-दुख को और बढ़ा देते हैं
(घ) वह बीमार है
**सही उत्तर :** (ग) वे उसके विरह-दुख को और बढ़ा देते हैं
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**प्रश्न 4.** नायिका की दुर्बलता की तुलना किससे की गई है?
(क) अमावस्या के चंद्रमा से
(ख) पूर्णिमा के चंद्रमा से
(ग) चतुर्दशी के चंद्रमा से
(घ) उगते सूर्य से
**सही उत्तर :** (ग) चतुर्दशी के चंद्रमा से
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**प्रश्न 5.** इस पद का प्रमुख रस कौन-सा है?
(क) शृंगार (संयोग)
(ख) करुण
(ग) वीर
(घ) शांत
**सही उत्तर :** (ख) करुण




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