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12 cbse hindi-namak-razia sajjad zaheer-lesson summary-नमक-रजिया सज्जाद ज़हीर-पाठ सार

August 15, 2023
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 कहानी  मे लेखिका ने स्वयं को कथा नायिका साफिया के रूप मे प्रस्तुत किया है ।

साफिया अपने एक सिख पड़ोसी के घर कीर्तन में आई हुई  थी। जहां वो  सिख बीवी को देखकर हैरान रह जाती है ,  क्योंकि  सिख बीबी का चेहराबहुत कुछ  उसकी मां से मिलता जुलता हुआ था. सिख बीवी ने भी वैसा ही सफेद बारीक मलमल का दुपट्टा ओढ़ा हुआ था जैसे सफिया की अम्मा मुहर्रम के वक्त औढ़ा करती थी।

सिख बीवी ने अपनी बहू से सफिया के बारे में पूछा । बहू ने बतलाया कि  सफिया एक मुस्लिम  है और कल ही अपने भाइयों और परिजनों से मिलने लाहौर जा रही हैं।

लाहौर का नाम सुनते ही सिख बीबी उठकर सफिया के पास आ बैठी और फिर उसे लाहौर और वहां के लोगों के बारे में बतलाती है । सिख बीवी बतलाती है कि लाहौर एक खूबसूरत शहर हैं और वहां के लोग जिंदादिल , उम्दा खाने-पीने , अच्छे कपड़े पहनने व सैर सपाटा के शौकीन होते हैं।

घर में कीर्तन चल  रहा था । सिख बीबी ने सफिया को बताया कि जब हिंदुस्तान बना था , तभी वो यहां आ गई थी। आज उनके पास अपनी कोठी  हैं अच्छा खासा बिजनेस है।

लेकिन लाहौर आज भी बहुत याद आता है। हमारा  वतन तो लाहौर ही हैं । कहते –कहते सिख बीवी की आंखों से आंसू निकलकर आंचल में समा जाते हैं।

11 बजेके लगभग  कीर्तन खत्म होने के बाद जब सफिया  प्रसाद लेकर  जाने लगी तो उसने जाते-जाते सिख बीबी से पूछ लिया कि  लाहौर से सौगात के रूप में क्या ल्रकर आये । सिख बीबी ने कहा कि हो सके तो वहां से थोडा सा  लाहौरी नमक लेकर आना ।

अगले दिन सफिया लाहौर चली गई। लाहौर पहुंचकर अपने परिजनों व दोस्तों के बीच रहते हुए साफिया के पंद्रह दिन  बीत  गए। कल साफिया को वापस  भारत लौटना है .कल दिन व्यस्त रहेगा इसलिए आज रात को उसने सामानों की पैकिंग शुरू कर दी .सारा सामान पैक हो गया ,बस रह गई नमक की पुडिया जिसे उसे भारत लौटकर सिख बीवी को देना था .किन्तु  समस्या यह थी कि नमक अपने साथ भारत कैसे ले जाए, क्योंकि लाहौर से भारत नमक लाना गैरकानूनी था।

 सफिया का भाई पुलिस ऑफिसर था। सफिया ने उससे सलाह ली ।  सफिया के  भाई ने सफिया को समझाया कि पाकिस्तान से भारत नमक ले जाना गैर कानूनी है ,नमक साथ ले जाने पर वह कस्टम अधिकारियों के द्वारा पकड़ी जा सकती हैं।

 सफिया भाई से कहती है  कि मैं सोना – चांदी या ब्लैक मार्केट का कोई सामान अपने साथ नहीं  ले जा रही हूं। उपहार में देने के लिए थोड़ा सा नमक है ।

कुछ देर तक दोनों के बीच तर्क-वितर्क  होता है ,कुछ देर बाद साफिया का भाई  वहां से चला जाता है ।

सफिया को अगले दिन दोपहर दो बजे लाहौर से भारत के लिए रवाना होना था, इसीलिए उसने  पैकिंग का  रात को ही निपटा लिया  ।  दो ही सामान शेष रह गए थे –एक कीनू की टोकरी और दूसरी नमक की पुडिया .

कीनू जिसे संतरे और माल्टा को मिलाकर पैदा किया जाता  हैं.   उसके एक मित्र  ने कीनू  भेंट करते हुए इसे  हिंदुस्तान पाकिस्तान की एकता का मेवा बतलाया था ।

नमक की पुडिया को लेकर साफिया के जहाँ में अंतर्द्वन्द्व चल रहा था .

अनायास उसे याद कि जब वह भारत से पाकिस्तान आ रही थी बहुत से पैसेंजर फलों की टोकरी लेकर आ रहे थे,किसी भी कस्टम वाले ने फलों की टोकरी की जांच नहीं की थी .  सफिया को उपाय मिल गया ,उसने तुरंत  फैसला किया कि वह नमक की पुड़िया को कीनू की टोकरी में छिपाकर ले जाएगी।

उसने कीनू की टोकरी खाली की और टोकरी  में नमक की पुड़िया रखकर , ऊपर कीनू रख  दिये।

साफिया ने आत्मा के विरूद्ध फैसला किया था इसलिए उसे नींद नहीं आ रही थी ।

पिछले पंद्रह दिनों की बातें चलचित्र की तरह उसकी आँखों के सामने घूम रही थी. उसके तीन सगे भाई पाकिस्तान में रहते  थे। उसके पिता की कब्र भी यही थी। उसके भतीजे – भतीजियों अक्सर उससे पूछते थे कि वह हिंदुस्तान में क्यों रहती हैं। जहां वो लोग आ – जा नहीं सकते हैं।

साफिया को इकबाल का मकबरा याद आया .साफिया को याद आया कि उसके एक मित्र ने पूछा था –फिर कब आओगी

साफिया ने कहा था –शायद अगले साल ….शायद कभी नहीं

सोचते –सोचते कब नींद लग गई ,पता नहीं चला .

अगले दिन सफिया दिल्ली जाने के लिए लाहौर  स्टेशन आ गई । जब वह ट्रेन की प्रतीक्षा कर रही थी ,तभी कीनू की टोकरी में रखी नमक की पुडिया का विचार आ गया ।अनायास उसने  नमक को चोरी से भारत नहीं ले जाने का फैसला करते हुए नमक की पुड़िया को कीनू की टोकरी से निकाल कर अपने हैंडबैग में रख लिया  ।

सामने से एक कस्टम ऑफिसर को आता देखकर साफिया ने उसे रोककर उसे सिख बीवी और नमक के बारे में बताया ।

साफिया की बात सुनने के बाद कस्टम अधिकारी ने साफिया को  बताया कि उसका वतन  दिल्ली है . जब भारत पाकिस्तान के विभाजन के समय  वह पाकिस्तान आ गया था। लेकिन आज भी वह अपना वतन दिल्ली  को ही मानता है।

सफिया ने अपने हैंडबैग से नमक की पुड़िया निकाल कर  कस्टम अधिकारी को देना चाहा, कस्टम अधिकारी ने  नमक की पुड़िया को सफिया के हैंडबैग में डालते हुए कहा  “मोहब्बत तो कस्टम से इस तरह गुजर जाती है कि कानून भी हैरान रह जाता है”।

इसके बाद  कस्टम अधिकारी ने साफिया से  कहा कि जब दिल्ली जाओ तो जामा मस्जिद की सीढ़ियों को मेरा सलाम कहिएगा और उन सिख बीवी से कहिएगा कि लाहौर अभी भी उनका वतन है और देहली मेरा। रफ्ता  – रफ्ता  सब ठीक हो जाएगा।

ट्रेन लाहौर से रवाना का समय हुआ तो साफिया अपने परिजनों  से विदा लेकर ट्रेन में सवार हो गई।

कुछ देर बाद अटारी स्टेशन आया .

अटारी स्टेशन पर पाकिस्तानी पुलिस उतर गई और हिंदुस्तानी पुलिस सवार हो गई।

साफिया को पता ही नहीं चला कि कब लाहौर खत्म हुआ और कब अमृतसर शुरू हो गया। साफिया सोचने लगी – जमीन , जुबान , सूरत , लिबास , अंदाज सब कुछ तो एक जैसा है । बस मुश्किल है तो यह कि दोनों के हाथों में बंदूकें थमी है ।

अटारी के बाद अमृतसर आया .

अमृतसर में कस्टम वाले फर्स्ट क्लास वालों के सामान की जांच उनके डिब्बे के सामने ही कर रहे थे। जो कस्टम अधिकारी सामानों की जांच कर रहा –उसका नाम था – सुनील दास गुप्त.

साफिया ने  कस्टम अधिकारी  सुनील दास गुप्त को बताया कि उसके पास थोड़ा सा नमक है और फिर अपना हैंडबैग खोलकर नमक की पुड़िया उसके सामने रखकर , उसे सारी बातें  बता दी।

कस्टम अधिकारी सुनील दास गुप्त साफिया को अपने साथ अपने साथ प्लेटफार्म के किनारे बने एक कमरे में लेकर गया।

थोड़ी देर की बात- चीत के बाद सुनील दास गुप्त  ने अलमारी से एक किताब बाहर निकाली,जिसके पहले पन्ने के दाहिनी तरफ  “शमसुलइस्लाम की तरफ से सुनील दास गुप्त को प्यार के साथ , ढाका 1946 लिखा था। सुनील दास गुप्त ने बतलाया कि यह किताब उसके    बचपन के दोस्त शमसुलइस्लाम ने उनकी सालगिरह के मौके पर तोहफे में दी  थी।

सुनील दास गुप्त यह भी बतलाता है कि  उस वक्त  उन्होनें  नजरुल और टैगोर को एक ही  किताब में  पढ़ा है ।  सुनील दास गुप्त ने बतलाया कि विभाजन के बाद ढाका से कलकत्ता  आ गये थे। वें आज भी ढाका आते-जाते है .पाकिस्तानी कस्टम अधिकारी की तरह सुनील दास गुप्त ढाका को अपना वतन बतलाते है .

ट्रेन के रवाना होने का समय हुआ तो सुनील दास गुप्त ने  नमक की वह पुड़िया सफिया के बैग में रख दी और फिर  बैग को लेकर साफिया के आगे-आगे  चलने लगे। पुल पर उन्होंने वो बैग सफिया को दे दिया  दिया।

पुल पार करते समय सफिया यही सोच रही थी कि किसका वतन कहाँ हैं ? कस्टम के इस तरफ या उस तरफ।

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