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12 cbse/hindi/antara/ghananand ke  kavitta/ vyakhya /MCQ /घनानंद के कवित्त  / घनानंद

January 15, 2026
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12 cbse/hindi/antara/ghananand ke  kavitta/ vyakhya /MCQ /घनानंद के कवित्त  / घनानंद

घनानंद के प्रथम कवित्त का प्रतिपाद्य

 घनानंद के कवित्त – सप्रसंग व्याख्या

(ii) बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

**प्रश्न 1.** प्रस्तुत कवित्त के रचयिता कौन हैं?

(क) बिहारी

(ख) देव

(ग) घनानंद

(घ) मतिराम

**सही उत्तर :** (ग) घनानंद

**प्रश्न 2.** कवि किसके दर्शन की कामना करता है?

(क) किसी देवी के

(ख) मित्र के

(ग) गुरु के

(घ) अपनी प्रेयसी सुजान के

**सही उत्तर :** (घ) अपनी प्रेयसी सुजान के

**प्रश्न 3.** कवि को ऐसा क्यों लगता है कि उसके प्राण निकलने वाले हैं?

(क) बीमारी के कारण

(ख) युद्ध के कारण

(ग) प्रेमिका के दर्शन न मिलने के कारण

(घ) वृद्धावस्था के कारण

**सही उत्तर :** (ग) प्रेमिका के दर्शन न मिलने के कारण

**प्रश्न 4.** प्रेमिका सुजान कवि के संदेशों के साथ क्या व्यवहार करती है?

(क) उन्हें ठुकरा देती है

(ख) उन्हें नष्ट कर देती है

(ग) सम्मानपूर्वक रख लेती है

(घ) तुरंत दर्शन देने आ जाती है

**सही उत्तर :** (ग) सम्मानपूर्वक रख लेती है

**प्रश्न 5.** इस कवित्त में प्रमुख रस कौन-सा है?

(क) शृंगार (संयोग)

(ख) वीर

(ग) करुण

(घ) शांत

**सही उत्तर :** (ग) करुण

घनानंद के द्वितीय कवित्त का प्रतिपाद्य-

सप्रसंग व्याख्या –

प्रसंग :-प्रस्तुत कवित्त **रीतिकाल के विख्यात कवि घनानंद** द्वारा रचित है। इस कवित्त में कवि ने अपनी प्रेयसी **सुजान** से मिलने की करुण प्रार्थना की है। कवि आशा करता है कि उसकी निरंतर पुकार एक न एक दिन प्रेमिका तक अवश्य पहुँचेगी और वह अपनी उपेक्षा तथा आनाकानी त्याग कर उससे मिलने आएगी। यह कवित्त प्रेम-वियोग की व्याकुलता, प्रतीक्षा और आशा के भाव को सशक्त रूप में व्यक्त करता है।

व्याख्या :-इन पंक्तियों में कवि घनानंद अपनी प्रियतमा सुजान से उसकी बेरुखी त्याग कर दर्शन देने का अनुरोध करता है। वह प्रश्नात्मक शैली में कहता है कि तुम कब तक मेरी पुकार को अनसुना करती रहोगी और स्वयं को अपनी अँगूठी में लगे दर्पण में निहारती रहोगी? क्या मेरी इस व्याकुल, पीड़ित और असहाय दशा को देखकर भी तुम्हारी दृष्टि तनिक भी विचलित नहीं होगी?

कवि आगे पूछता है कि तुम मौन रहकर और अपने संकल्पों पर अडिग रहकर कब तक इस उपेक्षा को निभाओगी? उसे पूर्ण विश्वास है कि उसकी मौन और करुण पुकार अंततः प्रेमिका के हृदय को अवश्य स्पर्श करेगी और वह बोल उठेगी। कवि कहता है कि उसकी और प्रेमिका की मानो एक होड़-सी लग गई है—वह जानना चाहता है कि प्रेमिका की यह कठोरता और उदासीनता आखिर कब तक चलेगी।

अंत में कवि अत्यंत मार्मिक ढंग से कहता है कि तुम अपने आप को बहरा बनाकर कब तक अपने कानों में रूई डाले रखोगी? किसी न किसी क्षण मेरी पुकार तुम्हारे कानों को खोल ही देगी। इस प्रकार कवि की विरह-वेदना, आशा और प्रेम में अडिग विश्वास इस कवित्त में प्रभावशाली रूप से अभिव्यक्त हुआ है।

विशेष :-

* कवि की **विरह-वेदना, प्रतीक्षा और आशा** का सजीव चित्रण है।

* **ब्रजभाषा** की कोमलकांत पदावली का सहज एवं भावपूर्ण प्रयोग किया गया है।

* **अनुप्रास और प्रश्न अलंकार** के प्रयोग से भावों में तीव्रता आई है।

* काव्य में **शृंगार रस के विरह पक्ष** का मार्मिक और प्रभावशाली वर्णन है।

* प्रश्नात्मक शैली ने कवित्त को संवादात्मक और भावोत्तेजक बना दिया है।

 (ii) बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

**प्रश्न 1.** प्रस्तुत कवित्त के रचयिता कौन हैं?

(क) बिहारी

(ख) देव

(ग) घनानंद

(घ) मतिराम

**सही उत्तर :** (ग) घनानंद

**प्रश्न 2.** कवि किससे मिलने का अनुरोध कर रहा है?

(क) मित्र से

(ख) गुरु से

(ग) अपनी प्रेयसी सुजान से

(घ) किसी देवी से

**सही उत्तर :** (ग) अपनी प्रेयसी सुजान से

**प्रश्न 3.** कवि के अनुसार प्रेमिका कब तक अपने कानों में “रूई डाले” रहेगी?

(क) सदा के लिए

(ख) जब तक कवि जीवित है

(ग) कुछ समय तक ही, अंततः पुकार सुन लेगी

(घ) जब तक कोई और न बुलाए

**सही उत्तर :** (ग) कुछ समय तक ही, अंततः पुकार सुन लेगी

**प्रश्न 4.** कवि को किस बात का दृढ़ विश्वास है?

(क) प्रेमिका कभी नहीं आएगी

(ख) उसकी पुकार व्यर्थ है

(ग) उसकी पुकार एक दिन प्रेमिका तक पहुँचेगी

(घ) प्रेम समाप्त हो चुका है

**सही उत्तर :** (ग) उसकी पुकार एक दिन प्रेमिका तक पहुँचेगी

**प्रश्न 5.** इस कवित्त में प्रधान रस कौन-सा है?

(क) वीर

(ख) करुण

(ग) शृंगार (विरह पक्ष)

(घ) शांत

**सही उत्तर :** (ग) शृंगार (विरह पक्ष)

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