संधि,sandhi

संधि
संधि
परिभाषा:- दो वर्णों के परस्पर मेल से उत्पन्न विकार को संधि कहते हैं।
संधि के भेद:- ;1- स्वर संधि ;2- व्यंजन संधि ;3- विसर्ग संधि
स्वर संधि – दो स्वरों के मेल से उत्पन्न विकार को स्वर संधि कहते हैं।
स्वर संधि के भेद – 1 – दीर्घ ; 2- गुण ; 3- वृद्धि ; 4- यण ; 5- अयादि
दीर्घ संधि – जब एक ही स्वर के दो रूप हृस्व ;अ, इ, उ और दीर्घ ;आ, ई, ऊ एक दूसरे के बाद आ जाए तो दोनों मिलकर दीर्घ ;आ, ई, ऊ हो जाता है।
अ/आ+अ/आ = आ इ/ई+इ/ई = ई उ/ऊ+उ/ऊ = ऊ
अ+अ = आ – दिवस+अन्त = दिवसांत
इ+ई = ई – रवि+इन्द्र = रवीन्द्र
उ+ऊ=ऊ- लघु+उत्तम = लघूत्तम
आ+अ = आ – निशा+अन्त = निशान्त
इ+ई = ई – हरि+ईश = हरीश
उ+ऊ=ऊ- लघु+उर्मि = लघूर्मि
अ+आ = आ – भय+आकुल = भयाकुल
ई+ई = ई – रजनी+ईश = रजनीश
ऊ+ऊ=ऊ- वधू+उत्सव = वधूत्सव
आ+आ = आ – वार्ता+आलाप = वार्तालाप
ई+इ = ई – मही+इन्द्र = महीन्द्र
ऊ+उ=ऊ- सरयू+ऊर्मि = सरयूर्मि
गुण संधि – अ/आ के बाद इ/ई आए तो ‘ए’, अ/आ के बाद उ/ऊ, तो ‘ओ’ तथा अ/आ के बाद ) आए तो ‘अर्’ हो जाता है –
अ+इ = ए – स्व+इच्छा = स्वेच्छा
अ+उ = ओ – पुरुष+उत्तम = पुरुषोत्तम
अ+ई = ए – नर+ईश = नरेश
अ+उ = ओ – महा+उदय = महोदय
आ+इ = ए – महा+इन्द्र = महेन्द्र
अ+ऊ = ओ – जल+उर्मि = जलोर्मि
आ+ई = ए – रमा+ईश = रमेश
आ+ऊ = ओ – गंगा+ऊर्मि = गंगोर्मि
अ+ऋ = अर्-देव+ऋषि = देवर्षि
आ+ऋ = अर्-महा+ऋषि = महर्षि
वृद्धि संधि – यदि अ/आ के बाद ए/ऐ आए तो ‘ऐ’ हो जाता है तथा अ/आ के बाद ओ/औ आए तो ‘औ’ हो जाता है।
अ+ए = ऐ – एक+एक = एकैक
अ+ओ = औ – परम+ओजस्वी = परमौजस्वी
आ+ए = ऐ – सदा+एव = सदैव
अ+औ = औ – वन+औषध = वनौषध
अ+ऐ = ऐ – स्व+ऐच्छिक = स्वैच्छिक
आ+औ = औ – महा+ओज = महौज
आ+ऐ = ऐ – महा+ऐश्वर्य = महैश्वर्य
आ+औ = औ – महा+औषध = महौषध
यण संधि – यदि हृस्व या दीर्घ स्वर इ/ई/उ/ऊ/ऋ के बाद कोई असमान स्वर आए तो क्रमशः य् व् र् में बदल जाते हैं।
इ+अ = य – यदि+अपि = यद्यपि
उ+अ = व – अनु+अय = अन्वय
ई+अ = य – नदी+अर्पण = नद्यपर्ण
उ+आ = वा – सु+आगत = स्वागत
इ+आ = या – इति+आदि = इत्यादि
ऊ+आ = वा – वधू+आगमन = वध्वागमन
ई+आ = या – देवी+आगमन = देव्यागमन
उ+इ = वि – अनु+इति = अन्विति
इ+उ = यु – उपरि+उक्त = उपर्युक्त
उ+ई = वी – अनु+ईक्षण = अन्वीक्षण
ई+ऊ = यू – नि+ऊन = न्यून
उ+ए = वे – अनु+एषण = अन्वेषण
ई+ऊ = यू – नदी+ऊर्मि = नद्यूर्मि
ऋ+अ = र – पितृ+अनुमति = पि=नुमति
इ+ए = ये – प्रति+एक = प्रत्येक
ऋ+इ = री – मातृ+इच्छा = मात्रिच्छा
ई+ऐ = यै – देवी+ऐश्वर्य = देव्यैश्वर्य
अयादि संधि – ए/ऐ/ओ/औ के बाद असमान वर्ण आए तो वह क्रमशः अय्/आय्/अव्/आव् में बदल जाता है।
ए+अ = अय – ने+अन = नयन
औ+अ = आव – पौ+अक = पावक
ऐ+अ = आय – नै+अक = नायक
औ+इ = आवि – नौ+इक = नाविक
ऐ+इ = आयि – नै+इका = नायिका
औ+उ = आवु – भौ+उक = भावुक
व्यंजन संधि – एक व्यंजन का किसी दूसरे व्यंजन अथवा स्वर से मेल होने पर उत्पन्न ध्वनि विकार को व्यंजन संधि कहते है।
1- घोष व्यंजन संधि
(1) क्, च्, ट्, त्, प् के पश्चात यदि किसी वर्ग का तीसरा या चौथा वर्ग ;ग,घ/ज, झ/ड, ढ/द, ध/ ब, भ/ य, र, ल, व, ह या कोई स्वर आ जाए, तो अपने वर्ग का तीसरा वर्ण हो जाता है।
वर्ग प्रथम द्वितीय तृतीय चतुर्थ पंचम प्रथम ≥ तृतीय उदाहरण
क (वर्ग) क् ख् ग् घ् ड्. क् ≥ ग् दिक् + अम्बर = दिगम्बर
च (वर्ग) च् छ् ज् झ् ञ च् ≥ ज् अच् + अन्त = अजन्त
ट (वर्ग) ट् ठ् ड् ढ् ण् ट् ≥ ड् षट् + अक्षर = षडक्षर
त (वग) त् थ् द् ध् न् त् ≥ द् सत् + आनन्द = सदानन्द
प (वर्ग) प् फ् ब् भ् म् प् ≥ ब् अप् (पानी) + द = अब्द (बादल)
अन्तःस्थ य् र् ल् व्
ऊष्म श ष स त
अन्य उदाहरण:-
क + द = ग्द = वाक् + देवी = वाग्देवी
क् + ग = ग्ग = दिक् + गज = दिग्गज
त् + अ = द = जगत् + अम्बा = जगदम्बा
ट् + आ = डा = षट् + आनन = षडानन
त् + उ = दु = सत् + उपयोग = सदुपयोग
त् + ई = दी = जगत् + ईश = जगदीश
त् + ब = द्ब = सत् + बुद्धि = सद्बुद्धि
त् + ग = द्ग = सत् + गति = सद्गति
(2 ) (घोष) व्यंजन ‘द’ के बाद यदि (अघोष) व्यंजन क, त, थ, प, स आदि आए तो पहले वाला (घोष व्यंजन)
द् (अघोष रूप) त् में बदल जाता है।
द् + क = त्क = तद् + काल = तत्काल
द् + क = त्क = शरद् + काल = शरत् काल
द् + त = त्त = उद् + तर = उत्तर
द् + त = त्त = उद् + तम = उत्तम
द् + प = त्प = उद् + पन्न = उत्पन्न
द् + प = त्प = तद् + पर = तत्पर
द् + स = त्स = उद् + सव = उत्सव
द् + स = त्स = संसद् + सदस्य = संसत्सदस्य
किसी वर्ग के पहले या तीसरे व्यंजन के बाद कोई नासिक्य व्यंजन अर्थात पंचम वर्ण ;ड्./´ञ/ण्/न्/ म् आ जाता है, तो पहले/तीसरे व्यंजन के स्थान पर अपने ही वर्ग का पंचम वर्ण अर्थात नासिक्य व्यंजन आ जाता है। अर्थात् क ≥ ड्. में, च ≥ ञ में, ट् ≥ -में, त् ≥ न् में, प् ≥ म् में बदल जाता है।
वर्ग प्रथम द्वितीय तृतीय चतुर्थ पंचम प्रथम झ तृतीय
क (वर्ग) क् ख् ग् घ् ड्. क् ≥ ड्.
ग् ≥ ड्.
च (वर्ग) च् छ् ज् झ् ञ च् ≥ ञ
ज् ≥ ञ
ट (वर्ग) ट् ठ् ड् ढ् ण् ट् ≥ – ण्
ड् ≥ ण्
त (वर्ग) त् थ् द् ध् न् त् ≥ न्
द् ≥ न्
प (वर्ग) प् फ् ब् भ् म् प् ≥ म्
ब् ≥ म्
– य् र् ल् व् –
– श् ष् स् ह् –
‘त’ सम्बन्धी नियम:-
(1) ‘त’ व्यंजन के बाद च/छ हो तो पूर्व का ‘त्’ ≥ च् में, ज/झ हो पूर्व का ‘त्’ ‘ज’ में, ट/ठ हो तो पूर्व को ‘त् ≥ ट् में, ड् /ढ़ हो तो पूर्व का त् ≥ ‘ड’ में और ‘ल’ हो तो पूर्व का ‘त्’ ≥ ल् में बदल जाता है।
उत् + चारण = उच्चारण
उत् + ज्वल = उज्ज्वल
वृहत् + टीका = वृहट्टीका
उत् + डयन = उड्डयन
उत् + लेख = उल्लेख
(2 ) यदि ‘त्’ के बाद ‘श’ आए तो त् ≥ च् में बदल जाता है तथा श का छ हो जाता है।
उत् + श्वास = उच्छ्वास
उत् + शिष्ट = उच्छिष्ठ
(3 ) यदि ‘त’ के बाद ‘ह’ व्यंजन आए तो ‘त्’ का ‘द्’ हो जाता है तथा ‘ह’ का ‘ध’ हो जाता है।
उत् + हार = उद्धार
पद् + हति = पद्धति
उत् + हरण = उद्धरण
उद् + हृत = उद्धृत
‘छ’ सम्बन्धी नियम:- यदि किसी स्वर के बाद ‘छ’ वर्ण आता है ‘छ’ से पहले ‘च्’ वर्ण जुड़ जाता है
वि + छेद = विच्छेद
परि + छेद = परिच्छेद
अनु + छेद = अनुच्छेद
आ + छादन = आच्छादन
स्व + छंद = स्वच्छंद
छ=+ छाया = छ=च्छाया
मातृ + छाया = मातृच्छाया
पितृ + छाया = पितृच्छाया
‘म’ सम्बन्धी नियम:-
(1) यदि ‘म्’ के बाद जिस वर्ग का व्यंजन आता है, तब ‘म्’ उसी वर्ग का पंचम वर्ण अर्थात् नासिक्य ङ्/ञ/ण्/न्/म्) अथवा अनुस्वार बन जाता है-
अहम् + कार = अंहकार
सम् + भव = संभव
सम् + कल्प = संकल्प
सम् + ताप = संताप
सम् + जय = संजय
किम + चित् = किंचित
सम् + पूर्ण = संपूर्ण
सम् + बन्ध = संबंध
सम् + तोष = संतोष
किम् + तु = किन्तु
सम् + गम = संगम
(2) यदि ‘म्’ के बाद य, र, ल, व, स, श, ह, तो ‘म्’ अनुस्वार में बदल जाता है-
सम् + हार = संहार
सम् + यम = संयम
सम् + रक्षण = संरक्षण
सम् + योग = संयोग
सम् + वत = संवत
सम् + विधान = संविधान
सम् + वाद = संवाद
सम् + शोधन = संशोधन
सम् + युक्त= संयुक्त
सम् + सार = संसार
सम् + लाप = संलाप
सम् + स्मरण = संस्मरण
(3) ‘म्’ के बाद म आए तो ‘म्’ का द्वित्व हो जाता है –
सम् + मान = सम्मान
सम् + मोहन = सम्मोहन
सम् + मति = सम्मति
सम् + मिश्रण = सम्मिश्रण
सम् + मुख = सम्मुख
सम् + मानित = सम्मानित
यदि ‘सम्’ उपसर्ग के बाद ‘कृ’ धातु से बने शब्द ड्डत/कार/कृति/करण/कर्ता आए तो ‘स्’ का आगम हो जाता है तथा ‘म्’ अनुस्वार में बदल जाता है।
सम् + कृति = संस्कृति
सम् + करण = संस्करण
सम् + कृत = संस्कृत
सम् + कार = संस्कार
यदि ऋ/र तथा ष के बाद ‘न’ व्यंजन आता है तो उसका ‘ण’ में परिवर्तन हो जाता है।
(नोटः-बीच में क-वर्ग/प-वर्ग/अनुस्वार/य/व/ह आदि में से कोई भी वर्ण आने पर भी यही नियम लागू रहता है।)
परि + मान = परिणाम
शोष् + अन = शोषण
तृष + ना = तृष्णा
भर + न = भरण
ड्डष + न = ड्डष्ण
विष् + नु = विष्णु
भूष + अन = भूषण
प्र + मान = प्रमाण
परि + मान = परिमाण
हर + न = हरण
ऋ + न = ऋण
राम + अयन = रामायण
यदि ‘स’ व्यंजन से पूर्व अ/आ से भिन्न अन्य कोई स्वर आ जाता है, तो ‘स’ का ‘ष’ हो जाता है।
अभि + सेक = अभिषेक
अभि + सिक्त = अभिषिक्त
वि + सम = विषम
वि + साद = विषाद
नि + सिद्ध = निषिद्ध
सु + सुप्ति = सुषुप्ति
अनु + संगी = अनुषंगी
नि + सेध = निषेध
‘दुस्’ अथवा ‘निस्’ के बाद यदि ‘क’ आए तो ‘स्’ को ‘ष्’ (स् ≥ ष्) में बदल देते है।
दुस् + कर्म = दुष्कर्म
निस् + कर्ष = निष्कर्ष
दुस् + कर = दुष्कर
निस् + कलंक = निष्कलंक
दुस् + काल = दुष्काल
निस् + कपट = निष्कपट
‘दुस् या ‘निस्’ के बाद ‘प’/‘फ’ आए तो ‘स्’ का ‘ष्’ हो जाता है।
दुस् + फल = दुष्फल
निस् + पाप = निष्पाप
दुस् + प्रहार = दुष्प्रहार
निस् + फल = निष्फल
दुस् + प्रचार = दुष्प्रचार
निस् + पादन = निष्पादन
दुस् + परिणाम = दुष्परिणाम
निस् + प्राण = निष्प्राण
विसर्ग
यदि पहले शब्द के अन्त में विसर्ग ध्वनि आती है, तो इसके बाद आने वाले शब्द के स्वर या व्यंजन के साथ मेल होने पर जो ध्वनि विकार होता है, विसर्ग ध्वनि कहलाती है।
(1 ) विसर्ग के साथ ‘च’ या ‘छ’ के मेल पर विसर्ग के स्थान पर ‘श्’ बन जाता है।
निः + चय = निश्चय
हरिः + चन्द्र = हरिश्चन्द्र
दुः + चरि== दुश्चरि=
निः + छल = निश्छल
अन्तः + चेतना = अन्तश्चेतना
(2 ) विसर्ग के बाद ‘श’ आए तो विसर्ग ;रूद्ध के स्थान पर ‘श्’ हो जाता हैै।
दुः + शासन = दुश्शासन
निः + शुल्क = निश्शुल्क
निः + श्वास = निश्श्वास
निः + शंक = निश्शंक
(3 ) विसर्ग के पहले वाले वर्ण अ/आ के अतिरिक्त अन्य कोई स्वर हो तथा विसर्ग के बाद मिलने वाले शब्द का प्रथम वर्ण क/ख/प/फ में से कोई भी हो तो विसर्ग के स्थान पर ‘ष्’ हो जाता है।
निः + कलंक = निष्कलंक
निः + प्रयोजन = निष्प्रयोजन
आविः + कार = आविष्कार
बहिः + कार = बहिष्कार
चतुः + पथ = चतुष्पद
निः + कपट = निष्कपट
निः + काम = निष्काम
(4 ) विसर्ग के साथ ट/ठ का मेल होने पर विसर्ग के स्थान पर ‘ष्’ हो जाता है।
धनु + टंकार = धनुष्टंकार
(5 )(अ) विसर्ग के बाद त/थ आने पर विसर्ग (:) स् में बदल जाता है।
निः + तेज = निस्तेज
अन्तः + तल = अन्तस्तल
नमः + ते = नमस्ते
निः + तारण = निस्तारण
मनः + ताप = मनस्ताप
दुः + तर = दुस्तर
(ब ) विसर्ग के साथ ‘स’ के मेल होने पर विसर्ग के स्थान पर ‘स’ में बदल जाता है।
निः + सन्देह = निस्सन्देह
निः + स्वार्थ = निस्स्वार्थ
दुः + साहस = दुस्साहस
निः + संतान = निस्संतान
दुः + साध्य = दुस्साध्य
यदि विसर्ग से पूर्व वाले वर्ण में ‘इ’ व ‘उ’ का स्वर हो तथा विसर्ग (:) के बाद ‘र’ हो तो संधि करने पर विसर्ग (:) का लोप कर दिया जाता है तथा ‘इ’ व ‘उ’ की मात्रा ई व ‘ऊ’ ( ि ≥ ी / ु ≥ ू ) हो जाती है।
निः + रस = नीरस
निः + रव = नीरवी
दुः + रम्य = दूरम्य
निः + रोग = नीरोग
दुः + राज = दूराज
निः + रंध्र = नीरंध्र
यदि विसर्ग से पूर्व ‘अ’ स्वर हो तथा विसर्ग ;रूद्ध के साथ/ग/घ/ङ/झ/ज/ड/ढ/ण/द/ध/न/ष /भ/म/य/र/ल/व/ह/श में से कोई वर्ण आ जाए तो विसर्ग ;रूद्ध के स्थान पर ‘ओ’ हो जाता है।
सरः + ज = सरोज
मनः + रंजन = मनोरंजन
वयः + वृद्ध = वयोवृद्ध
मनः + अनुकूल = मनोनुकूल
यशः + धरा = यशोधरा
तपः + भूमि = तपोभूमि
मनः + योग = मनोयोग
पुरः + हित = पुरोहित
अधः + भाग = अधोभाग
यशः + दा = यशोदा
तपः + बल = तपोबल
अधः वस्त्र = अधोवस्त्र
मनः + हर = मनोहर
मनः + रथ = मनोरथ
रजः + गुण = रजोगुण
पयः + द = पयोद
यदि विसर्ग से पूर्व वाले वर्ण में अ/आ के अतिरिक्त अन्य कोई स्वर हो तथा विसर्ग ;रूद्ध के साथ कोई भी स्वर या ग/घ/ङ/ज/झ/ड/ढ/ण/द/ध/न/ब/भ/म/य/र/ल/व/ह में से कोई वर्ण आ जाए तो विसर्ग ;रूद्ध के स्थान पर ‘र्’ हो जाता है।
(विशेष – स्वर के मेल पर स्वर की मात्रा ‘र’ में लग जाती है किन्तु व्यंजन के मेल पर ‘र’ रेफ र्; द्ध बन जाता है तथा मिलने वाले व्यंजन पर लग जाता है।)
नि: + आहार = निराहार
निः + आमिष = निराामिष
दुः + अवस्था = दुरवस्था
दुः + गुण = दुर्गुण
निः + आशा = निराशा
निः + ईह = निरीह
निः + धन = निर्धन
निः + जन = निर्जन
दुः + बुद्धि = दुर्बुद्धि
आशी: वाद = आशीर्वाद
निः + अक्षर = निरक्षर
निः + ईक्षण = निरीक्षण
निः + अर्थक = निरर्थक
निः + उपमा = निरूपमा
(1 ) अपवाद – पुनरवलोकरन/पुनरीक्षण/पुनरुद्धार/पुनर्निर्माण/अन्तर्द्वन्द्व/अन्तर्देशीय/अन्तर्यामी आदि इसी रूप में लिखे जाते है।)
विसर्ग (:) के बाद क/ख/प/फ आए तो कोई परिवर्तन नहीं होता है। यथा –
रजः + कण = रजःकण
प्रातः + काल = प्रातःकाल
अन्तः + करण = अन्तःकरण
कुछ शब्दों में विसर्ग ;रूद्ध का ‘स्’ में परिवर्तन हो जाता है-
नमः + कार = नमस्कार
भाः + कर = भास्कर
पुरः + कार = पुरस्कार
संधि (तीन संधि प्रश्न पूछे जाएंगे)
1-नयनाभिराम=नयन + अभिराम = दीर्घ संधि
2-देवालय =देव + आलय = दीर्घ संधि
3-सत्याग्रह =सत्य + आग्रह = दीर्घ संधि
4-रत्नाकर =रत्न + आकर = दीर्घ संधि
5-कुशासन =कुश + आसन = दीर्घ संधि
6-रवीन्द्र =रवि + इन्द्र = दीर्घ संधि
7-अभीष्ट =अभि + इष्ट = दीर्घ संधि
8-महीन्द्र =मही + इन्द्र = दीर्घ संधि
9-लक्ष्मीच्छा =लक्ष्मी + इच्छा = दीर्घ संधि
10-नारीश्वर =नारी + ईश्वर = दीर्घ संधि
11-जानकीश =जानकी + ईश = दीर्घ संधि
12-भूर्ध्व =भू + ऊर्ध्व = दीर्घ संधि
13-भूष्मा =भू + ऊष्मा = दीर्घ संधि
13-राकेश =राका + ईश = गुण संधि
14-द्वारकेश =द्वारका + ईश = गुण संधि
15-रमेश =रमा + ईश = गुण संधि
16-मिथिलेश =मिथिला + ईश = गुण संधि
17-गंगोर्मि =गंगा + ऊर्मि = गुण संधि
18-महोर्जा =महा + ऊर्जा = गुण संधि
19-यमुनोर्मि =यमुना + ऊर्मि = गुण संधि
20-महोरू =महा + ऊरू = गुण संधि
21-देवर्षि =देव + ऋषि = गुण संधि
22-शीतर्तु =शीत + ऋतु = गुण संधि
23-गंगेश्वर्य =गंगा + ऐश्वर्य = वृद्धि संधि
24-दूधौदन =दूध + ओदन = वृद्धि संधि
25-जलौघ =जल + ओघ = वृद्धि संधि
26-परमौज =परम + ओज = वृद्धि संधि
27-घृतौदन =घृत + ओदन = वृद्धि संधि
28-अत्यल्प =अति + अल्प = यण संधि
29-अध्यक्ष =अधि + अक्ष = यण संधि
30-गत्यवरोध =गति + अवरोध = यण संधि
31-व्यवहार =वि + अवहार = यण संधि
32-यद्यपि =यदि + अपि = यण संधि
33-नद्यर्पण =नदी + अर्पण = यण संधि
34-देव्यर्पण =देवी + अर्पण = यण संधि
35-गुर्वाज्ञा =गुरू + आज्ञा = यण संधि
36-भान्वागमन=भानु + आगमन = यण संधि
37-अन्वीक्षण =अनु + ईक्षण = यण संधि
38-पावन =पौ + अन = अयादि संधि
39ण्नाविक =नौ + इक = अयादि संधि
40ण्भावुक =भौ + उक = अयादि संधि
41ण्दिगम्बर =दिक् + अम्बर = व्यंजन संधि
42ण्वागीश =वाक् + ईश = व्यंजन संधि
43ण्दिग्दर्शन =दिक् + दर्शन = व्यंजन संधि
44ण्प्रागैतिहासिक =प्राक् + ऐतिहासिक= व्यंजन संधि
45-दिग्विजय =दिक् + विजय = व्यंजन संधि
46-षडानन =षट् + आनन = व्यंजन संधि
47-षड्यन्त्र =षट् + यं= = व्यंजन संधि
48-सदाचार =सत् + आचार = व्यंजन संधि
49-उद्यान =उत् + यान = व्यंजन संधि
50-तदुपरान्त =तत् + उपरान्त = व्यंजन संधि
51-सदाशय =सत् + आशय = व्यंजन संधि
52-उद्घाटन =उत् + घाटन = व्यंजन संधि
53-जगदम्बा =जगत् + अम्बा = व्यंजन संधि
54-अब्द =अप् + द = व्यंजन संधि
55-तदनन्तर =तद् + अनन्तर = व्यंजन संधि
56-विषम =वि + सम = व्यंजन संधि
57-अनुषंग =अनु + संग = व्यंजन संधि
58-अभिषिक्त =अभि + सिक्त = व्यंजन संधि
59-अभिषेक =अभि + सेक = व्यंजन संधि
60-सुषुप्त =सु + सुप्त = व्यंजन संधि
61-निषेध =नि + सेध = व्यंजन संधि
62-विषाद =वि + साद = व्यंजन संधि
63-पुनरवलोकन =पुनः + अवलोकन = विसर्ग संधि
64-निस्तेज =निः + तेज = विसर्ग संधि
65-नमस्ते =नमः + ते = विसर्ग संधि
66-मनस्ताप =मनः + ताप = विसर्ग संधि
67-निस्सन्देह =निः + सन्देह = विसर्ग संधि
68-दुस्साहस =दुः + साहस = विसर्ग संधि
69-निस्स्वार्थ =निः + स्वार्थ = विसर्ग संधि
70-दुस्स्वप्न =दुः + स्वप्न = विसर्ग संधि
71-नीरज =निः + रज = विसर्ग संधि
72-दूरम्य =दुः + रम्य = विसर्ग संधि
73-अतएव =अतः + एव = विसर्ग संधि
74-सरोज =सरः + ज = विसर्ग संधि
75-वयोवृद्ध =वयः + वृद्ध = विसर्ग संधि
76-यशोधरा =यशः + धरा = विसर्ग संधि
77-मनोरंजन =मनः + रंजन = विसर्ग संधि
78-मनोहर =मनः + हर = विसर्ग संधि
79-दुरवस्था =दुः + अवस्था = विसर्ग संधि
80-दुर्गुण =दुः + गुण = विसर्ग संधि
81-परमार्थ =परम + अर्थ = दीर्घ संधि
82-चरणामृत =चरण + अमृत = दीर्घ संधि
83-गीताजंलि =गीत + अजंलि = दीर्घ संधि
84-सूर्यास्त =सूर्य + अस्त = दीर्घ संधि
85-मुरारि =मुर + अरि = दीर्घ संधि
86-कक्षाध्यापक =कक्षा + अध्यापक = दीर्घ संधि
87-श्रद्धांजलि =श्रद्धा + अजंलि = दीर्घ संधि
88-सभाध्यक्ष =सभा + अध्यक्ष = दीर्घ संधि
89-द्वारकाधीश =द्वारका + अधीश = दीर्घ संधि
90-गिरीन्द्र =गिरि + इन्द्र = दीर्घ संधि
91-अधीन =अधि + इन = दीर्घ संधि
92-फणीन्द्र =फणी + इन्द्र = दीर्घ संधि
93-श्रीन्दु =श्री + इन्दु = दीर्घ संधि
94-महेन्द्र =महा + इन्द्र = गुण संधि
95-यथेच्छा =यथा + इच्छा = गुण संधि
96-राजेन्द्र =राजा + इन्द्र = गुण संधि
97-यथेष्ट =यथा + इष्ट = गुण संधि
98-महोदय =महा + उदय = गुण संधि
99-यथोचित =यथा + उचित = गुण संधि
100-शरदोपसाक =शारदा + उपासक = गुण संधि
101-महोत्सव =महा + उत्सव = गुण संधि
102-सदैव =सदा + एव = वृद्धि संधि
103-वसुधैव =वसुधा + एव = वृद्धि संधि
104-महैषणा =महा + एषणा = वृद्धि संधि
105-तथैव =तथा + एव = वृद्धि संधि
106-महौजस्वी =महा + ओजस्वी = वृद्धि संधि
107-महौषध =महा + औषध = वृद्धि संधि
108-यथौचित्य =यथा + औचित्य = वृद्धि संधि
109-महौत्सुक्य =महा + औत्सुक्य = वृद्धि संधि
110-महौदार्य =महा + औदार्य = वृद्धि संधि
111-इत्यादि =इति + आदि = यण संधि
112-पर्यावरण =परि + आवरण = यण संधि
113-अभ्यागत =अभि + आगत = यण संधि
114-व्यायाम =वि + आयाम = यण संधि
115-पर्याप्त =परि + आप्त = यण संधि
116-नद्युत्पन्न =नदी + उत्पन्न = यण संधि
117-देव्युपासना =देवी + उपासना = यण संधि
118-अन्वय =अनु + अय = यण संधि
119-मध्वरि =मधु + अरि = यण संधि
120-तन्वगी =तनु + अंगी = यण संधि
121-स्वल्प =सु + अल्प = यण संधि
122-विनय =विने + अ = अयादि संधि
123-चयन =चे + अन = अयादि संधि
124-नायक =नै + अक = अयादि संधि
125-विधायक =विधै + अक = अयादि संधि
126-गयिका =गै + इका = अयादि संधि
127-भवन =भो + अन = अयादि संधि
128-हविष्य =हो + इष्य = अयादि संधि
129-गवेषणा =गो + एषणा = अयादि संधि
130-वाङ्मय =वाक् + मय = व्यंजन संधि
131-उन्नति =उत् + नति = व्यंजन संधि
132-जगन्नाथ =जगत + नाथ = व्यंजन संधि
133-उन्मूलन =उत् + मूलन = व्यंजन संधि
134-जगन्माता =जगत + माता = व्यंजन संधि
135-उन्नायक =उत् + नायक = व्यंजन संधि
136-अम्मय =अप् + मय = व्यंजन संधि
137-षण्मुख =षट् + मुख = व्यंजन संधि
138-ससत्सदस्य =संसद + सदस्य = व्यंजन संधि
139-सत्कार =सद् + कार = विसर्ग व्यंजन
140-निरक्षर =निः + अक्षर = विसर्ग संधि
141-दुरात्मा =दुः + आत्मा = विसर्ग संधि
142-निष्पाप =निः + पाप = विसर्ग संधि
143-निश्चय =निः + चय = विसर्ग संधि
144-दुश्चरि= =दुः + चरि= = विसर्ग संधि
145-निश्छल =निः + छल = विसर्ग संधि
146-अन्तश्चेतना =अन्तः + चेतना = विसर्ग संधि
147-हरिश्चन्द्र =हरिः + चन्द्र = विसर्ग संधि
148-तपश्चर्या =तपः + चर्या = विसर्ग संधि
149-दुश्शासन =दुः + शासन = विसर्ग संधि
150-निश्शुल्क =निः + शंक = विसर्ग संधि
151-निश्श्वास =निः + श्वास = विसर्ग संधि
152-निश्शंक =निः + शंक = विसर्ग संधि
153-धनुष्टंकार =धनुः + टंकार = विसर्ग संधि
154-निष्कलंक =निः + कलंक = विसर्ग संधि
155-आविष्कार =आविः + कार = विसर्ग संधि
156-निष्काम =निः + काम = विसर्ग संधि
157-निष्प्रयोजन =निः + प्रयोजन = विसग संर्धि
158-बहिष्कार =बहिः + कार = विसर्ग संधि
159-निष्कपट =निः + कपट = विसर्ग संधि
160-निष्फल =निः + फल = विसर्ग संधि
161-सावाधान =स + अवधान = दीर्घ संधि
162-सेनाध्यक्ष =सेना + अध्यक्ष = दीर्घ संधि
163-विद्यार्थी =विद्या + अर्थी = दीर्घ संधि
164-तदापि =तथा + अपि = दीर्घ संधि
165-युवावस्था =युवा + अवस्था = दीर्घ संधि
166-विद्यालय =विद्या + आलय = दीर्घ संधि
167-महाशय =महा + आशय = दीर्घ संधि
168-प्रतीक्षालय =प्रतीक्षा + आलय = दीर्घ संधि
169- श्रृद्धालु =श्रृद्धा + आलु = दीर्घ संधि
170-अभीप्सा =अभि + ईप्सा = दीर्घ संधि
171-अधीक्षक =अधि + ईक्षक = दीर्घ संधि
172-रजनीश =रजनी + ईश = दीर्घ संधि
173-नदीश =नदी + ईश = दीर्घ संधि
174-लघूत्तर =लघु + उत्तर = दीर्घ संधि
175-कटूक्ति =कटु + उक्ति = दीर्घ संधि
176-सुरेन्द्र =सुर + इन्द्र = गुर्ण संधि
177-स्वेच्छा =स्व + इच्छा = गुण संधि
178-नेति =न + इति = गुण संधि
179-भारतेन्दु =भारत + इन्दु = गुण संधि
180-परोपकार =पर + उपकार = गुण संधि
181-सूर्याेदय =सूर्य + उदय = गुण संधि
182-प्रोज्ज्वल =प्र + उज्ज्वल = गुण संधि
183-सोदाहरण =स + उदाहरण = गुण संधि
184-अन्त्योदय =अन्त्य + उदय = गुण संधि
185-सप्तर्षि =सप्त + ऋषि = गुण संधि
186-उत्तमर्ण =उत्तम + ऋण = गुण संधि
187-महर्षि =महा + ऋषि = गुण संधि
188-राजर्षि =राजा + ऋषि = गुण संधि
189-ज्ञानैश्वर्य =ज्ञान + ऐश्वर्य = वृद्धि संधि
190-स्वैच्छिक =स्व + ऐच्छिक = वृद्धि संधि
191-मतैक्य =मत + ऐक्य = वृद्धि संधि
192-देवैश्वर्य =देव + ऐश्वर्य = वृद्धि संधि
193-महौज =महा + ओज = वृद्धि संधि
194-गंगोध =गंगा + ओध = वृद्धि संधि
195-अत्याचार=अति + आचार = यण संधि
196-अन्वीक्षण =अनु + ईक्षण = यण संधि
197-मात्रानुमति =मातृ + अनुमति = यण संधि
198-न्यून =निः + ऊन = यण संधि
199-अध्यूढा =अधि + ऊढा = यण संधि
200-अन्वेषण =अनु + ऐषण = यण संधि
201-अन्वेषी =अनु + ऐषी = यण संधि
202-वध्वागमन =वध् + आगमन = यण संधि
203-अध्यूढा =अधि + ऊढा = यण संधि
204-विलय =विले + अ = अयादि संधि
205-विनायक =विनै + अक = अयादि संधि
206-पवि= = पो + इ= = अयादि संधि
207-भावुक =भौ + उक = अयादि संधि
208-संकल्प =सम् + कल्प = व्यंजन संधि
209-संगम =सम् + गम = व्यंजन संधि
210-अलंकार =अलम़् + कार = व्यंजन संधि
211-संस्करण =सम् + करण = व्यंजन संधि
212-संस्कृत =सम् + कृत = व्यंजन संधि
213-संस्कृति =सम् + कृति = व्यंजन संधि
214-संस्कार =सम् + कार = व्यंजन संधि
215-संचय =सम् + चय = व्यंजन संधि
216-किंचित =किम् + चित = व्यंजन संधि
217-मृत्युजय =मृत्युम् + जय = व्यंजन संधि
218-दंड =दम् + ड = व्यंजन संधि
219-खंड =खम् + ड = व्यंजन संधि
220-संतोष =सम् + तोष = व्यंजन संधि
221-संदेह =सम् + देह = व्यंजन संधि
222-संताप =सम् + ताप = व्यंजन संधि
223-सम्पूर्ण =सम् + पूर्ण = व्यंजन संधि
224-सम्भव =सम् + भव = व्यंजन संधि
225-विश्वम्भर =विश्वम् + भर = व्यंजन संधि
226-संयोग =सम् + योग = व्यंजन संधि
227-संहार =सम् + हार = व्यंजन संधि
228-संवत =सम् + वत = व्यंजन संधि
229-संविधान =सम् + विधान = व्यंजन संधि
230-संश्लेषण =सम् + श्लेषण = व्यंजन संधि
231-रामायण =राम + अयन = व्यंजन संधि
232-परिणाम =परि + नाम = व्यंजन संधि
233-नारायण =नार + अयन = व्यंजन संधि
234-प्रसारण =प्रसार + न = व्यंजन संधि
235-उत्तरायण =उत्तर + अयन = व्यंजन संधि
236-मृण्मय =मृत् + मय = व्यंजन संधि
237-क्रीडांगण =क्रीडा + अंगन = व्यंजन संधि
238-अन्तर्द्वन्द्व =अन्तः + द्वन्द्व = विसर्ग संधि
239-भास्कर =भाः + कर = विसर्ग संधि
240-नमस्कार =नमः + कार = विसर्ग संधि
241-पुरस्कार =पुरः + कार = विसर्ग संधि
242-पुरस्कृत =पुरः + कृत = विसर्ग संधि
243-तिरस्कार =तिरः + कार = विसर्ग संधि
244-निस्ताप =निः + ताप = विसर्ग संधि
245-निस्तारण =निः + तारण = विसर्ग संधि
246-निरीह =निः + ईह = विसर्ग संधि
247-पुनरूद्धार =पुनः + उद्धार = विसर्ग संधि
248-रमानुज =रमा + अनुज = दीर्घ संधि
249-छात्रावास =छात्र + आवास = दीर्घ संधि
250-देवानन्द =देव + आनन्द = दीर्घ संधि
251-प्रारंभ =प्र + आरम्भ = दीर्घ संधि
252-चिकित्सालय =चिकित्सा + आलय = दीर्घ संधि
253-कृपा कांक्षी =कृपा + आकांक्षी = दीर्घ संधि
254-मायाचरण =माया + आचरण = दीर्घ संधि
255-दयानन्द =दया + आनन्द = दीर्घ संधि
256-हरीश =हरि + ईश = दीर्घ संधि
257-परीक्षा =परि + ईक्षा = दीर्घ संधि
258-भानूदय =भानू + उदय = दीर्घ संधि
259-गुरूपदेश =गुरू + उपदेश = दीर्घ संधि
260-नरेश =नर + ईश = गुण संधि
261-सर्वेक्षण =सर्व + ईक्षण = गुण संधि
262-गणेश =गण + ईश = गुण संधि
263-प्रेक्षा =प्र + ईक्षा = गुण संधि
264-जलोर्मि =जल + ऊर्मि = गुण संधि
265-नवोढ़ा =नव + ऊढ़ा = गुण संधि
266-समुद्रोमी =समुद्र + ऊर्मि = गुण संधि
267-जलोर्जा =जल + ऊर्जा = गुण संधि
268-मतैकता =मत + एकता = वृद्धि संधि
269-धनैषणा =धन + एषण = वृद्धि संधि
270-एकैक =एक + एक = वृद्धि संधि
271-विश्ववैकता =विश्व + एकता = वृद्धि संधि
272-वनौषध =वन + औषध = वृद्धि संधि
273-तपौदार्य =तप + औदार्य = वृद्धि संधि
274-भावौदार्य =तप + औदार्य = वृद्धि संधि
275-भावौचित्य =भाव + औचित्य = वृद्धि संधि
276-अत्यधिक =अति + अधिक = यण संधि
277-स्वागत =सु + आगत = यण संधि
278-पित्राज्ञा =पितृ + आज्ञा = यण संधि
279-अभ्युदय =अभि + उदय = यण संधि
280-प्रत्युपकार =प्रति + उपकार = यण संधि
281-रव्युदय =रवि + उदय = यण संधि
282-उपर्युक्त =उपरि + उक्त = यण संधि
283-भ्वादि =भू + आदि = यण संधि
284-मात्रानुमति =मातृ + अनुमति = यण संधि
285-पित्राज्ञा =पितृ + आज्ञा = यण संधि
286-मात्रिच्छा =मा= + इच्छा = यण संधि
287-पित्रुपदेश =पितृ + उपदेश = यण संधि
288-जात्येकता =जाति + एकता = यण संधि
289-मह्यर्चन =मही + अर्चन = यण संधि
290-नद्येन्त =नदी + अन्त = यण संधि
291-नयन =ने + अन = अयादि संधि
292-पवन =पो + अन = अयादि संधि
293-गायक =गै + अक = अयादि संधि
294-पावक =पौ + अक = अयादि संधि
295-उच्चारण =उत् + चारण = व्यंजन संधि
296-शरच्चन्द्र =शरत् + चन्द्र = व्यंजन संधि
297-उच्छिन्न =उत् + छिन्न = व्यंजन संधि


No Comments