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विशेषण और क्रिया विशेषण

August 26, 2022
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विशेषण और क्रिया विशेषण
विशेषण
जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता (गुण, दोष, संख्या, परिमाण, रंग, आकार, दशा आदि) बतलाए, उसे विशेषण कहते हैं।
जैसे – सुंदर, कुरूप, लंबा, नाटा, अच्छा, बुरा, हलका, भारी, चतुर, मूर्ख, लाल, पीला, कुछ, थोड़ा, दो, चार, गोल, चौड़ा, दुबला, पतला आदि।
विशेषण के निम्नलिखित प्रमुख कार्य हैं
(1) विशेषण संज्ञा/सर्वनाम के गुण-दोष को बतलाता है।
(2) यह संज्ञा/सर्वनाम की निश्चित संख्या या परिमाण बतलाता है। –
(3) कभी-कभी यह संज्ञा/सर्वनाम की अनिश्चित संख्या या परिमाण भी बतलाता है।
(4) यह संज्ञा/सर्वनाम के क्षेत्र को सीमित करता है। जैसे —
(5) यह संज्ञा/सर्वनाम की दशा, अवस्था या आकार को बतलाता है।
विशेषण के भेद
विशेषण के मुख्यतः चार भेद हैं
(1) संख्यावाचक विशेषण (2). परिमाणवाचक विशेषण
(3). गुणवाचक विशेषण (4). सार्वनामिक विशेषण
(1) संख्यावाचक विशेषण – जिस विशेषण से संज्ञा की संख्या (निश्चित या अनिश्चित) का बोध हो, उसे संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। जैसे – दो, चार, पहला, चौथा, दोहरा, चौगुना, आधा, पाव, कुछ, बहुत, सैकड़ों, असंख्य आदि।
(2) परिमाणवाचक विशेषण – जो विशेषण वस्तु के परिमाण या मात्रा (निश्चित या अनिश्चित) का बोध कराए, उसे परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं। जैसे – दो लिटर, तीन मीटर, थोड़ा, बहुत, कुछ, कम, सारा, पूरा, इतना , उतना, जितना , कितना आदि।
(3) गुणवाचक विशेषण – जिस विशेषण से गुण, दोष, रंग, आकार, स्वभाव, दशा, अवस्था आदि का बोध हो उसे गुणवाचक विशेषण कहते हैं। जैसे – अच्छा, बुरा, सच्चा, झूठा, नेक, भला, सुन्दर, कुरूप
(4) सार्वनामिक विशेषण – जो सर्वनाम विशेषण के रूप में प्रयुक्त हो , उसे सार्वनामिक विशेषण कहते हैं। जैसे – यह, वह, कौन, क्या, कोई, कुछ आदि।
उपर्युक्त शब्द सर्वनाम और विशेषण दोनों हैं। यदि ये क्रिया के पहले प्रयुक्त हों, तो सर्वनाम और संज्ञा के पहले प्रयुक्त हों, तो सार्वनामिक विशेषण। जैसे –
प्रविशेषण – विशेषण की विशेषता बतलाने वाले विशेषण को ‘प्रविशेषण’ कहते हैं। यह सामान्यतः विशेषण के गुणों में वृद्धि करता है। जैसे – थोड़ा, बहुत, अति, अत्यंत, अधिक, अत्यधिक, बड़ा, बेहद, महा, घोर, ठीक, बिलकुल, लगभग आदि।
विशेष्य – जिस संज्ञा या सर्वनाम शब्द की विशेषता बतलायी जाती है, उस संज्ञा या सर्वनाम शब्द को ‘विशेष्य’ कहते हैं। –
ध्यान देने योग्य बातें-
(1) विशेषण के लिंग एवं वचन विशेष्य के लिंग एवं वचन के अनुसार होते हैं, चाहे विशेषण विशेष्य के पहले आए या बाद में।
(2) अगर एक ही विशेषण के अनेक विशेष्य हों, तो विशेषण के लिंग और वचन प्रथम विशेष्य के लिंग और वचन के अनुसार होंगे।
विशेषणों की तुलनावस्था – कभी-कभी दो या दो से अधिक वस्तुओं के गुणों या अवगुणों की आपस में तुलना की जाती है। जिन विशेषणों द्वारा तुलना की जाए, उन्हें तुलनाबोधक विशेषण कहते हैं। ऐसे विशेषणों की तीन अवस्थाएँ होती हैं। जैसे –
(1) मूलावस्था (अच्छा) (2) उत्तरावस्था (से अच्छा) (3) उत्तमावस्था (सबसे अच्छा)
क्रिया विशेषण
वह शब्द जो हमें क्रियाओं की विशेषता का बोध कराते हैं वे शब्द क्रिया विशेषण कहलाते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो जिन शब्दों से क्रिया की विशेषता का पता चलता है, उन शब्दों को हम क्रिया विशेषण कहते हैं।
क्रिया विशेषण के भेद
अर्थ के आधार पर क्रिया विशेषण के भेद:
अर्थ के आधार पर क्रियाविशेषण के चार भेद होते हैंः
1. कालवाचक क्रियाविशेषण 2. रीतिवाचक क्रियाविशेषण
3. स्थानवाचक क्रियाविशेषण 4. परिमाणवाचक क्रियाविशेषण

  1. कालवाचक क्रियाविशेषण – वो क्रियाविशेषण शब्द जो क्रिया के होने के समय के बारे में बताते हैं, कालवाचक क्रियाविशेषण कहलाते हैं।
  2. रीतिवाचक क्रियाविशेषण – ऐसे क्रियाविशेषण शब्द जो किसी क्रिया के होने की विधि या तरीके का बोध कराते हैं, वह शब्द रीतिवाचक क्रिया विशेषण कहलाते हैं।
  3. स्थानवाचक क्रियाविशेषण – ऐसे अविकारी शब्द जो हमें क्रियाओं के होने के स्थान का बोध कराते हैं, वे शब्द स्थानवाचक क्रियाविशेषण कहलाते हैं। जैसेः
  4. परिमाणवाचक क्रियाविशेषण – ऐसे क्रियाविशेषण शब्द जिनसे हमें क्रिया के परिमाण, संख्या या मात्र का पता चलता है, वे शब्द परिमाणवाचक क्रियाविशेषण कहलाते हैं। जैसेः प्रयोग के आधार पर क्रियाविशेषण के तीन भेद होते हैं:
    1. साधारण क्रियाविशेषण 2. सयोंजक क्रियाविशेषण व 3. अनुबद्ध क्रियाविशेषण
  5. साधारण क्रियाविशेषण – ऐसे क्रियाविशेषण शब्द जिनका प्रयोग वाक्य में स्वतंत्र होता है, वे शब्द साधारण क्रियाविशेषण कहलाते हैं।
  6. सयोंजक क्रियाविशेषण – जिन क्रियाविशेषणों का सम्बन्ध किसी उपवाक्य से होता है , वह शब्द सयोंजक क्रियाविशेषण कहलाते हैं।
  7. अनुबद्ध क्रियाविशेषण – ऐसे शब्द जो निश्चय के लिए कहीं भी प्रयोग कर लिए जाते हैं वे शब्द अनुबद्ध क्रियाविशेषण कहलाते हैं। जैसे: रूप के आधार पर क्रियाविशेषण के तीन भेद होते हैं:
    1. मूल क्रियाविशेषण 2. स्थानीय क्रियाविशेषण 3. योगिक क्रियाविशेषण
  8. मूल क्रियाविशेषण – ऐसे शब्द जो दुसरे शब्दों के मेल से नहीं बनते यानी जो दुसरे शब्दों में प्रत्यय लगे बिना बन जाते हैं, वे शब्द मूल क्रियाविशेषण कहलाते हैं। जैसे पास, दूर, ऊपर, आज, सदा, अचानक, फिर, नहीं, ठीक आदि।
  9. स्थानीय क्रियाविशेषण – ऐसे अन्य शब्द-भेद जो बिना अपने रूप में बदलाव किये किसी विशेष स्थान पर आते हैं, वे स्थानीय क्रियाविशेषण कहलाते हैं। जैसे:
  10. योगिक क्रियाविशेषण – ऐसे क्रियाविशेषण जो किसी दुसरे शब्दों में प्रत्यय या पद आदि लगाने से बनते हैं, ऐसे क्रियाविशेषण योगिक क्रियाविशेषणों की श्रेणी में आते हैं।

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