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August 26, 2022
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भाषा, लिपि व्याकरण
भाषा
 भाषा वह साधन है जिसके माध्यम से भावों या विचारों को लिखकर या बोलकर व्यक्त किया जाता है। भाषा के दो रूप होते है।
;1द्ध लिखित ;2द्ध मौखिक
 भाषा का प्रयोग तीन रूप में होता है। बोलकर, लिखकर और संकेत द्वारा
 14 सितम्बर, को हिंदी को संविधान में संघ की राज भाषा का दर्जा मिला। इसीलिए 14 सितम्बर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है .
 विश्व में सबसे अधिक बोली जानेवाली भाषाओ में हिंदी का दूसरा स्थान है।
 भाषा का स्वरुप विस्तृत होता है और बोली का संकुचित। भाषा का अपना लिखित व्याकरण होता है जबकि बोली का अपना कोई लिखित व्याकरण नहीं होता।
 भारत के विभिन्न भाषा-भाषियों के मध्य संपर्क बनाने हेतु एक भाषा को सेतु रूप में व्यवहृत करने वाली भाषा को संपर्क भाषा कहा जाता है, हिंदी भारत की संपर्क भाषा है।
 पूर्णतया व्यकरणानुमोदित भाषा को मानक अथवा परिनिष्ठित हिंदी कहते है।
 किसी विशेष प्रयोजन के लिए प्रयोग में लाई जानेवाली भाषा प्रयोजनमूलक भाषा कहलाती है।
 प्रांतीय आधार पर बोलियों का वर्गीकरण, जिससे भाषा का रूप निर्मित होता है, विभाषा कहलाती है।
 खड़ी बोली चार चरणों से गुजरकर आई है दृ संस्कृत, पालि, प्राकृत और अपभ्रंश
 जिस भाषा का देश के अधिकांश नागरिक प्रयोग करते है, राष्ट्र भाषा कहलाती है।
 जिस भाषा का प्रयोग देश के शासकीय कार्यालयों में राज-काज में किया जाता है, राजभाषा कहते है।
 एक क्षेत्र विशेष में बोल-चाल में व्यवहार में की जानेवाली भाषा बोली कहलाती है।
 मुख से निकलने वाली आवाज ध्वनि कहलाती है।
 आधुनिक भारतीय आर्य भाषा का सम्बन्ध भारोपीय परिवार से है।
 मूल भाषा, विभाषा, बोली, और उपबोली ये भाषा के अन्य रूप है।
 उपभाषा अपेक्षाकृत विस्तृत क्षेत्र प्रदेश में बोलचाल में प्रयुक्त होती है। उपभाषा में साहित्य भी रचा जाता है उपभाषा क्षेत्रा की अनेक बोलियाँ हो सकती है .
लिपि
 ध्वनि का लिखित रूप लिपि कहलाती है .
 ब्राह्मी और खरोष्ठी भारत की प्राचीन लिपियाँ है। इसमे ब्राह्मी सबसे प्राचीन है।
 हिंदी की लिपि देवनागरी है।
 हिंदी, संस्कृत, प्राकृत, मराठी, कोंकणी और नेपाली देवनागरी लिपि में लिखी जानेवाली भाषाएँ है।
 अंग्रेजी, जर्मन, फ्रांसिसी की लिपि रोमन है जबकि सिन्धी, उर्दू और अरबी की लिपि फारसी है। पंजाबी की लिपि गुरुमुखी है।
 लिपि भाषा विकास का प्रमुख साधन है।
 देवनागरी लिपि का विकास भारत की प्राचीन ब्राह्मी लिपि से हुआ।
व्याकरण
 भाषा का शुद्ध रूप सम्बन्धी नियमों का ज्ञान करनेवाला शास्त्र व्याकरण कहलाता है .
 व्याकरण के तीन भाग है ;1द्ध वर्ण विचार ;2द्ध शब्द विचार ;3द्ध वाक्य विचार
 वर्णों के सार्थक समूह को शब्द कहते है .
 वर्ण विचार ,इसके अंतर्गत वर्णों से सम्बंधित उनके आकार, उच्चारण, वर्गीकरण और उनके मेल से शब्द बनाने के नियम आदि का उल्लेख किया जाता है .
 शब्द विचार – इसके अंतर्गत शब्द से सम्बंधित भेद, उत्पत्ति, व्युत्पत्ति तथा रचना आदि का उल्लेख किया जाता है .
 वाक्य विचार – इसके अंतर्गत वाक्य से सम्बंधित भेद, अन्वय, संश्लेषण, विश्लेषण, रचना, अवयय तथा शब्दों से वाक्य बनाने के नियमों का उल्लेख होता है
 भाषा का प्रयोग मौखिक और लिखित दोनों रूपों में हो सकता है, जबकि लिपि का प्रयोग लिखित रूप में ही होता है

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