उपसर्ग-प्रत्यय
उपसर्ग मूलशब्द प्रत्यय
– विश्व इक वैश्विक
उप न्यास इक औपन्यासिक
परि वर्तन इय परिवर्तनीय
परि चर इका परिचारिका
प्रति बन्ध इत प्रतिबन्धित
स्व देश ई स्वदेशी
अ मानव ईय अमानवीय
– इतिहास इक ऐतिहासिक
– सामाज इक सामाजिक
कु पुत्र ई कुपुत्री
अ सहयोग ई असहयोगी
अध खिल आ अधखिला
नि पूत आ निपूता
अति आचार ई अत्याचारी
– विवाह इक वैवाहिक
– संसार इक सांसारिक
– भूगोल इक भौगोलिक
अभि मुख ई अभिमुखी
प्रति हार ई प्रतिहारी
अनु करण ईय अनुकरणीय
अप व्यय ई अपव्ययी
अभि मान ई अभिमानी
अभि योग ई अभियोगी
अव गुण ई अवगुणी
उप स्थित इ उपस्थिति
दु गुण ई दुर्गुणी
प्र ताप ई प्रतापी
अ समान ता असमानता
अ योग्य ता अयोग्यता
प्र वास इ प्रवासी
नि युक्त इ नियुक्ति
अ सक्षम ता असक्षमता
अ समर्थ ता असमर्थता
वि भाग ईय विभागीय
वि जात इय विजातिय
अन देख ई अनदेखी
पर देश ई परदेशी
नि लम्ब इत निलम्बित
अप मान इत अपमानित
प्र भाव ई प्रभावी
स फल ता सफलता
वि फल ता विफलता
वि नम्र ता विनम्रता
अ धीर ता अधीरता
वि संगत इ विसंगति
अ सहयोग इ असहयोगी
उप लब्ध ता उपलब्धता
अति आचार ई अत्याचारी
अति शय ता अतिशयता
अति अल्प ता अत्यल्पता
अधि अक्ष ता अध्यक्षता
अधि आत्म इक अध्यात्मिक
अनु करण ईय अनुकरणीय
अनु उद इत अनूदित
अप कार ई अपकारी
अभि मुख ई अभिमुखी
अभि मान ई अभिमानी
अव गुण ई अवगुणी
आ जीव इका आजीविका
आ अराधन आ आराधना
दुर आचार ई दुराचारी
नि वास ई निवासी
निर अभिमान ई निरभिमानी
प्रति वाद ई प्रतिवादी
प्रति उप कार प्रत्युपकार
वि देश ई विदेशी
वि जय ई विजयी
सु लभ ता सुलभता
सु अच्छ ता स्वच्छता
अ ज्ञान नी अज्ञानी
परा क्रम ई पराक्रमी
स रस ता सरसता
वि योग ई वियोगी
सम् बन्ध ई सम्बन्धी
सम् मान ईय सम्मानीय
सम् सार ई संसारी
सु पुत्र ई सुपुत्री
स्व देश ई स्वदेशी
तत् काल इक तत्कालिक
सु गंध इत सुगंधित
सु वास इत सुवासित
प्रति बन्ध इत प्रतिबन्धित
प्र शासक ईय प्रशासकीय
परि श्रम ई परिश्रमी
अ अधर्म ई अधर्मी
अ खण्ड इत अखण्डित
अद्यः मुख ई अद्योमुखी
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