अभिनव मनुष्य1है बहुत बरसी धरित्री पर अमृत की धार,पर नहीं अब तक सुशीतल हो सका संसार।भोग-लिप्सा आज भी…
अभिनव मनुष्य, रामधारी सिंह ’दिनकर’ अभिनव मनुष्य रामधारी सिंह ’दिनकर’ ।ण् है बहुत बरसी …………………………पुरानी राह। है…
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